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नोएडा : उद्योग सहायक समिति की बैठक में एमएसएमई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने खोला समस्याओं का पिटारा, बोले जल्द हल करें

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नोएडा, 25 मई।

नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय में बृहस्पतिवार को हुई उद्यमी सहायक समिति की बैठक में एम एस एम ई इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने उद्योगों के सामने आ रही समस्याओं से जुड़ा एक दस्तावेज रखा यह दस्तावेज एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने रखा और इसमें 47 बिंदुओं का जिक्र किया गया है। यह बैठक अडिशनल सीईओ सतीश पाल की अध्यक्षता में हुई और इसमे ओएसडी अविनाश त्रिपाठी भी शामिल रहे।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र नोएडा में उद्योगों के विकास में आडे आ रही विभिन्न समस्याओं के निस्तारण एवं मूलभूत ढांचे ओर सुविधाओं की पूर्ति हेतु नोएडा प्राधिकरण द्वारा विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है इसके लिए धन्यवाद करते है। उन्होंने बताया कि उद्योगों का नोएडा प्राधिकरण सहित अन्य लगभग 18 सरकारी विभागों से काम पड़ता है। चूंकि नोएडा प्राधिकरण ने औद्योगिक क्षेत्र को स्थापित किया इसलिए नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी बनती है कि उद्योगों से जुड़े सभी सरकारी विभागों से हो रही समस्याओं का निस्तारण करवाने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाये। सभी विभागों के सहयोग से ही उद्योग चल सकते हैं परन्तु दुर्भाग्य इस बात का है कि विभागों से सहयोग की बजाय उद्यमियों को प्रताडित किया जाता है, आर्थिक बोझ डाला जाता है, सुविधाएं प्रदान नहीं की जाती है इसलिए उद्योगों का विकास नहीं हो पाता है, उत्पादन रुक जाता है, रोजगार उपलब्ध् नहीं हो पाते, राजस्व कम हो जाता है।

एमएसएमई के जिलाध्यक्ष ने कहा कि हम नोएडा प्राधिकरण से हो रही समस्याओं को प्रस्तूत कर रहे हैं इस विश्वास के साथ कि आप इन सभी समस्याओं के निस्तारण का निर्देश दे सकें ओर मूलभूत ढांचे और सुविधाओंकी पूर्ति के लिए बोर्ड बैठक से प्रस्ताव पास करवा सके। उद्यमियों और उद्योगों से संबंधित समस्याओं को संस्था विगत छः साल से निरंतर उठाते आ रहा है। इसको लेकर प्राधिकरण और शासन स्तर पर लगातार पत्राचार और बैठके भी की गई, लेकिन सिर्फ आश्वासन के सिवा अभी तक कुछ भी हाथ नहीं लगा है। उद्यमियों की समस्या जस की तस ही नहीं बनी हुई है बल्कि समस्याएं बढ़ती ही जा रही है।

सर्व विदित है कि नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में आधारभूत ढांचा सरंचना एवम् मूलभूत सुविधाओं का अभाव है ऐसे में उद्योग चलाने में उद्यमियों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर समय-समय पर समस्याओं का समाधान होता रहे तो हम दावे के साथ आपको अवगत करवाना चाहते हैं कि आने वाले समय में नोएडा, औद्योगिक क्षेत्र दुनिया में सबसे ज्यादा उत्पादन, रोजगार, राजस्व आदि उपलब्ध करवाने वाला क्षेत्र होगा।

उन्होंने कहा कि हम आपके संज्ञान में लाना चाहते है कि मुख्यमंत्री जी द्वारा निवेशकों को आमंत्रित किये जाने के लिए उ0प्र0 ग्लोबल ईवेस्टर समिट का आयोजन दिनांक 10, 11, 12 फरवरी-2023 को किया गया था जिसमें हमारी संस्था द्वारा हमारे 281 सदस्यों के निवेश की सूची उपायुक्त जिला उद्योग केन्द्र के माध्यम से भेजी गई है जिसमें 2918.61 करोड़ रूपये के निवेश के लिए 396900 वर्ग मीटर औद्योगिक भूखण्ड की मांग की गई है जिसमें 17934 रोजगार उपलब्ध करवाये जायेंगे। संस्था के माध्यम से औद्योगिक भूखण्डों के लिए की गई मांग को पूरा करवाने के लिए निकट भविश्य में स्थापित किये जा रहें नवीन नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक भूखण्ड आवंटित करवाने का कार्य किया जाए।
नोएडा के उद्यमियों के लिए विभिन्न विभागों से सहयोग और निराकण हेतु दी जा रही समस्यायें निम्न है:-

1. नोएडा से सम्बन्धित समस्याऐं:-
1. एमएसएमई इंडस्ट्रिययल एसोसिएशन नोएडा एक रजिस्टर्ड संस्था है। वर्तमान में इसके हजारों सक्रिय सदस्य है। संस्था जिला गौतमबुद्धनगर के लगभग पच्चीस हजार उद्योगों का नेतृत्व करती है जिसके गठन जून-2017 से लेकर अब तक नोएडा प्राधिकरण और शासन को कई बार एमएसएमई भवन आवंटित करने के लिए पत्राचार किया जा चुका है। सिर्फ आश्वासन और फाइल प्रोसेस तक ही मामला सिमट कर रह गया है। आपसे आग्रह है कि फाईलिंग प्रक्रिया को पूरी करवाकर एमएसएमई भवन आवंटन करवाया जाए। जिससे निवेश को बढ़ावा मिल सके, उत्पादन, रोजगार एवं राजस्व बढ़ सके।
2. नोएडा में 14 हजार से ज्यादा एमएसएमई सेक्टर की इंडस्ट्री है। ये सभी इंडस्ट्री प्राधिकरण की कूड़ा नीति से त्रस्त है। जिसके तहत प्राधिकरण की हायर की गई एजेंसी एजी एनवायरों मनमाने ढंग से कूड़ा उठाने के लिए पैसा वसूल रही है। इसका विरोध नीति बनने के दिन से ही औद्योगिक संगठन की ओर से किया जा रहा है। खास ये है कि लीज डीड की शर्तो में इसका उल्लेख नहीं है, और जो दर निर्धारित की गई उसका कोई मानक नहीं है। ऐसे में उद्यमी एक रुपए प्रतिवर्ग मीटर की दर से कूड़ा उठाने वाली कंपनी को पैसा दे सकते है या प्राधिकरण हमे बताए कि कूड़ा कहा फेंका जाना है उद्यमी वहां फेंक सकते है।
3. नोएडा में वाटर मीटर लगाने की प्रक्रिया अब शुरू हुई है। जबकि नोएडा के उद्यमियों को विगत पांच से पन्द्रह साल के पानी के बिल एक साथ चक्रवद्धि ब्याज लगाकर भेजे गए। प्रश्न ये है कि जब प्राधिकरण ने नियमता उस समय प्रतिमाह या त्रिमासिक बिल क्यों नहीं भेजे। दूसरा पानी की गुणवत्ता की रिपोर्ट तक साझा नहीं की जाती है और वर्तमान में जब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सरचार्ज पर 40 प्रतिशत की छूट दी हुई है तो नोएडा प्राधिकरण क्यो उद्यमियों को छूट नहीं दे रहा।
जी-18, सेक्टर-6, नोएडा की 370 वर्ग मीटर की फैक्ट्री में पानी का बिल 1,14,570/-रूपये का बनता है जबकि ब्याज और अर्थदण्ड रूपये 13,03,200/- जोड़कर 14,17,770/- बना दिया, जिस पर 3,90,960/- की छुट देकर 10,47,642/- की मांग की जा रही है। इसी तरह से हजारों फैक्ट्रियों पर आर्थिक बोझ डालकर उन पलायन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
4. नोएडा के औद्योगिक भूखंड का दुरूपयोग बढ़ा है। यहां औद्योगिक भूखंडों पर कामर्शियल गतिविधियां की जा रही है। फैक्ट्रियों में रिटेल आउटलेट खोले जा रहे हैं जबकि औद्योगिक भूखंडो पर शोरूम चलाना बिल्डिंग बायलॉज का उल्लघंन है। इसके दुरूपयोग को रोके। आपको अवगत करा दे प्राधिकरण अब तक जिन भूखंडों को कामर्शियल लैंड में बदल चुका है उनसे बतौर प्रोसेसिंग फीस के करोड़ों रुपए तक नहीं ले सका है। औद्योगिक भूखंडों का लैंड यूज चेंज किया जाना ही गलत है क्योंकि नोएडा शहर बसाया गया ही उद्योगों के लिए है।
5. नोएडा में पार्को का भी व्यवसायिकरण किया जा रहा है। फेज-1 में यानी सेक्टर-1 से 11 तक के पार्को में दुकाने और क्योस्क बना दिए गए है। इसके अलावा नए विकसित पार्को में भी दुकाने और शौचालय बना दिए गए है। इससे सिर्फ सीधे तौर पर एनजीटी के नियमों का वायलेशन है। इस पर सख्त एक्शन लिया जाए।

5. सी-91, सेक्टर-10, नोएडा की फैक्ट्री जोकि कोने की है इसमें कोरनर के चार्जच प्राधिकरण को दिये गये थे लेकिन वहां सामने ही किसी होटल को भूखण्ड आवंटित कर दिया गया जिसने पूरी गली अतिक्रमण कर उक्त उद्यमी को कोने से वंचित कर दिया गया। इसी तरह से नोएडा में और भी कही जगह अतिक्रमण कर उद्यमियों को परेषान किया जा रहा है।

6. नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी, छपरोला, जेवर आदि जिला गौतमबुद्धनगर में लगभग 25 हजार मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट है। लेकिन कच्चे मॉल के लिए हमे अब भी दिल्ली, लुधियाना, कोलकाता और सुदूर राज्यों के शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में कच्चे मॉल खरीद के एवज में जो राजस्व प्रदेश सरकार को जाना चाहिए वह नहीं मिलता। उद्यमियों को भी परेशानी होती है। कच्चे मॉल के बाजार की डिमांड 1984 से लगातार विभिन्न संगठनों की ओर से की जाती रही है। संस्था की ओर से विगत लगभग सात सालों से प्राधिकरण, शासन और प्रशासन के यहां कच्चे मॉल के बाजार की डिमांड होती रही है। आपसे आग्रह कि यहां कच्चे मॉल का बाजार बनाया जाए।

7. नोएडा के उद्यमियों को अपने प्रोडेक्ट की जांच के तैयार उत्पाद बैंगलूरू, भोपाल जाना पड़ता है। वहां से जांच रिपोर्ट आने में कम से कम एक महीने का समय लगता है। नोएडा एक औद्योगिक नगरी है यहां सरकार से मान्यता प्राप्त टेस्टिंग लैब की स्थापना अतिशीघ्र कराई जाए।

8. नोएडा में मशीनरी बाजार भी नहीं है। छोटे-छोटे टूल्स के लिए दिल्ली जाना पड़ता है। यहां मशीनरी बाजार भी बनाया जाए। विगत समय में दिल्ली में लॉकडाउन और यूपी में ढील होने के बाद भी उद्यमियों को उत्पाद तैयार करने में देरी हुई क्योंकि यहां मशीनरी बाजार नहीं है। ऐसे में हम सभी को एक छोटे से पेंच के लिए भी दिल्ली पर निर्भर रहना पड़ता है।

9. ओडीओपी में यहां गारमेन्ट को शामिल किया गया है। जबकि नोएडा मैन्यूफेक्चरिंग में सबसे ज्यादा अन्य ओर भी उत्पाद बनाता है। इनके उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक डिस्प्ले सेंटर बनाया जाए। इससे निवेश और रोजगार दोनों बढ़ेगा।

10. नोएडा में ट्रांसपोर्ट नगर का कामर्शिलाइजेशन न कर वहां से तैयार मॉल भेजने और कच्चा मॉल मंगवाने की सुविधा शुरू की जाए। वर्तमान में भी उद्यमियों को दिल्ली और गाजियाबाद के साहिबाबाद पर निर्भर रहना पड़ता है।
11. नोएडा के इंडस्ट्रियल सेक्टरों में बनी भूमिगत पार्किंग एनजीटी के नियमों का वायलेशन है। इसके साथ ही ये पार्किंग संस्थाओं से इतने दूर है कि यहां पार्किंग कर औद्योगिक इकाईयों तक पहुंचने में काफी समय लगता है। इसकी बड़ी वजह प्राधिकरण द्वारा निर्माण से पहले उद्यमियों से सुझाव नहीं लेना है। साथ ही औद्योगिक सेक्टरों में 1800 वर्गमीटर से बड़े भूखंडों के सामने भी पार्किंग को निशुल्क किया जाए।
12. नोएडा प्राधिकरण शुरुआती दौर में तो सिंगल विंडो सिस्टम का सपना दिखाया था लेकिन आज तक उस सिंगल विंडो सिस्टम पर अमल नहीं हो सका यही नहीं अब ऑनलाइन के बहाने भी प्राधिकरण में दलाल सक्रिय हैं पहले तो ऑनलाइन आवेदन लिया जाता है उसके बाद भी मैनुअल दस्तावेज मंगाए जाते हैं आपसे आग्रह है या तो पूर्णता ऑनलाइन कार्य किया जाए अन्यथा इस सेवा को बंद कर दिया जाए।
13. प्राधिकरण ने वन टाइम लीज रेंट 15 साल और ढाई प्रतिशत कर रखा है। इसे पूर्व की भांति 11 महीने और एक प्रतिशत किया जाए। ताकि उद्यमियों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार कम हो सके।
14. नोएडा एक औद्योगिक नगरी है। यहां उद्योगों से जुड़े सभी नितीगत फैसले बिना उद्यमियों के सुझाव लिए ही पास कर दिए जाते है। ये नहीं देखा जाता कि उसका परिणाम क्या होगा। इसके लिए जरूरी है प्राधिकरण की बोर्ड बैठक और उद्यमियों से जुड़े फैसले लेने से पहले बैठकों में औद्योगिक संगठन का एक प्रतिनिधि शामिल किया जाए।
15. कोरोना काल में श्रमिकों के पलायन की वजह से यहां के उद्योग बंदी की कगार पर आ गए। वे पलायन इसलिए कर गए क्योंकि यहां उनके पास आवास नहीं है। प्राधिकरण इनके लिए सस्ती दरों पर आवासीय योजना लेकर आए ताकि वे यहां रहे और जीवन यापन कर सके।
16. नोएडा प्राधिकरण ने उद्योगों के आवंटित भूखंडों को सिर्फ राजस्व के लिए उनका एफएआर तो बढ़ा दिया लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर वहीं पुराना है। इससे फेज-1 यानी सेक्टर-1 से 11 तक औद्योगिक सेक्टरों में मूलभूत सुविधा तक नहीं है। जलभराव से लेकर बिजली, नाली साफ न होना और अतिक्रमण यहां बड़ी वजह है जबकि प्राधिकरण वेडिंग जोन बनाने में करोड़ों रुपए खर्च कर रही है।
17. सेक्टर-4, 5, 8,9 व 10 में हजारों की संख्या में स्लम बसा हुआ है। ये सब औद्योगिक भूखंडों के पास में है। प्राधिकरण ने स्लम को हटाने के लिए झुग्गी-झोपड़ी पुर्नवास योजना बनाई जिसके तहत 1700 के आसपास झुग्गी वालों को मकान बनाकर दिए गए। जबकि संख्या लगभग 30 हजार है। ऐसे महज खानापूर्ती करने से क्या होगा। इस स्लम से उद्यमियों को बड़ा नुकसान हो रहा है। पहला निवेशक नहीं आते, दूसरा गाड़ियां नहीं आती तीसरा अतिक्रमण से परेशान और चैथा सर्वाधिक लाइन लॉस।
18. प्राधिकरण आवंटित भूखंडों का ऑडिट कराए और जिन भूखंडों पर काम नहीं शुरू हुआ उनका आवंटन निरस्त कर दोबारा से स्कीम लाई जाए। इन स्कीम में उनको मौका दिया जाए जो पहले की योजना में हिस्सा ले चुके है और उनको भूखंड आंवटन नहीं हो सका उनको प्रोसेसिंग फीस में छूट दी जाए। ताकि वे अपना विस्तार कर सके।
19. नोएडा के सभी सेक्टरों में छोटे बच्चों के लिए क्रेश और सस्ती दरों पर कैंटीन की व्यवस्था की जाए।
20. नोएडा को औद्योगिक नगरी के लिहाज से फेज-1 फेज-2 और फेज-3 में बांटा गया है। प्राधिकरण लैंडयूज के हिसाब से यहां भूखंडों को या तो इंडस्ट्री या फिर आईटी के लिए आवंटित किया जाता है। लेकिन बिना लैंडयूज बदले ही यहां बड़े स्तर पर कॉमर्शियल गतिविधि की जा रही है। बड़े-बड़े शोरूम चलाए जा रहे है। औद्योगिक भूखंडों का लैंडयूज नहीं बदला जाए और जहां कामर्शियल एक्टिविटी हो रही है उनको बंद कराया जाए।
21. नोएडा में भूखंडों का आवंटन बहुत ही महंगी दरों पर किया जाता है। इनको खरीद पाना एमएसएमई वर्ग के उद्यमी के लिए आसान नहीं है। यदि खरीद भी ले तो भुगतान 100 प्रतिशत करने के बाद ही आवंटन पत्र दिया जाएगा। जबकि आवंटन पत्र के आधार पर ही उद्यमी पहले लोन के लिए बैंक से आवेदन करता था। अब यदि वे सारा पैसा आवंटन से पहले ही दे देगें तो वर्किंग केपिटल और इमारत निर्माण मशीनरी कहा से लाएगा। ऐसे में 100 प्रतिशत भुगतान की शर्त और आवंटन दर को कम किया जाए।
22. नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में एक भी कांफ्रेंस हॉल नहीं है और न ही एक भी सामुदायिक केंद्र है। ऐसे में उद्यमियों के लिए कोई भी कार्यक्रम का आयोजन के लिए हमे रिहाएशी सेक्टरों के सामुदायिक सेंटरों पर निर्भर रहना पड़ता है जिसमे बुकिंग मिल जाए वहीं बहुत है। ऐसे में तीनों फेज के करीब छह से सात सेक्टरों में सामुदायिक केंद्र बनाए जाए।
23. नोएडा के सैकड़ो उद्यमी नोएडा गोल्फ कोर्स के सदस्य है। बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के ब्लड रिलेशन में सदस्यता स्थानानतरिक करने की अनुमति दी जाए। साथ ही सेक्टर-151ए में बन रहे नए गोल्फ कोर्स के सदस्यता लेने के लिए उद्यमियों को विषेश छूट दी जाए।
24. मानसून आने वाला है ऐसे में औद्योगिक सेक्टरों में जलभराव की समस्या न हो इसके लिए यहा समुचित व्यवस्था तत्तकाल कराई जाए। हालांकि प्राधिकरण के पीजीएम की ओर से बेहतर प्रयास किए जा रहे है लेकिन औद्योगिक सेक्टरों को भी प्राथमिकता दी जाए क्योंकि फेज-1 नोएडा का सबसे पुराना औद्योगिक सेक्टर है। इसके अलावा ग्रेटर नोएडा में भी जल भराव की समस्या चरम पर है।
25. नोएडा प्राधिकरण भी उद्योग सहायक समिति की बैठक नियमित रूप से करने लगे तो यहां के औद्योगिक विकास में बड़ा योगदान होगा। जिससे समस्याओं का निदान और आश्वासन को सामने रू-ब-रू होकर बताया जा सकेगा।
26. प्राधिकरण के जन सूचना विभाग को और अधिक सक्रिय बनाया जाए। खासकर औद्योगिक विभाग में एक अलग से काउंटर बनाया जाए जिससे सूचनाएं आसानी से मिले और समस्याओं का समाधान आसानी से हो या फिर कोई आब्जेक्शन आने पर आसानी से पूछा जा सके और समाधान किया जा सके।
27. भ्रष्टाचार को कम करने के लिए केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार ने नोट बंदी और जीरो टालरेंस जैसे सख्त कदम उठाए। इसके बाद भी नोएडा प्राधिकरण में आकंठ भ्रष्टाचार फैला हुआ है। समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात होता है कि यहां कितने घोटाले किए। ये पैसा औद्योगिक विकास पर खर्चा होना था। नोएडा के अध्ािकारियों ने प्राधिकरण पर रियल स्टेट का ठप्पा लगा दिया है। आपसे आग्रह है प्राधिकरण में जीरो टालरेंस निती को सख्ती से लागू किया जाए।
28. उद्योगों के विकास के लिए बुनायादी ढाचा महत्वपूर्ण है। इसके लिए औद्योगिक सेक्टरों से अतिक्रमण को हटाया जाए। वेडिंग जोन होने के बाद यहा बड़े स्तर पर अतिक्रमण है। सड़को के लेफ्ट टर्न पर होटल और ढकेल खुली है। इन लेफ्ट टर्न को ट्रैफिक विभाग ने डार्क स्पाट घोशित किया गया है। ताकि यहां दुर्घटनाएं न हो। इसके अलावा सड़को पर ही कार वाशिंग, पेंट और सर्विस सेंटर तक खुले है। जिन्होंने सड़कों की चैड़ाई को निगल लिया। इस पर ध्यान दिया जाए।
29. नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों में पैनल बाक्स खुले है। मानसून का समय है। इन बाक्सों को ठीक कराया जाए। अन्यथा करंट फ्लों का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही कभी दुर्घटना हो सकती है।
30. नोएडा ने औद्योगिक सेक्टरों में भूमिगत पार्किंग का निर्माण किया है। ये वैसे तो फिजूल खर्ची है। क्योंकि इनकी सभी पार्किंग खाली है। एमएसमएई ने नोएडा प्राध्ािकरण को पहले एक प्रस्ताव दिया था कि वे औद्योगिक सेक्टरों के कामगारों के साफ सुथरा कैंटीन सस्ती दरों पर खोलना चाहती है। ये कैंटीन पार्किंग के छतो पर खोली जा सकती है। इससे दो फायदे होंगे पहला कामगार स्वस्थ रहेगा और दूसरा फिजूल खर्ची से बचेगा।
31. नोएडा के उद्यमियों के विस्तार के लिए हमेशा से 4 हजार 5 हजार या उससे बड़े भूखंडों की योजना निकालती है। यदि छोटे भूखंडों की योजना आती भी है तो उनकी संख्या कम होती है। ऐसे में विस्तार के लिए प्राधिकरण जल्द ही 55, 114, 171, 200, 250, 400 और 800 वर्ग मीटर के भूखंडों की योजना लेकर आए। जिनका आवंटन ई आक्शन के जरिए नहीं बल्कि लाटरी के जरिए के साथ साथ साक्षात्कार से भी किया जाए।
32. प्राधिकरण किसानों से 5500 प्रतिवर्ग मीटर की दर से जमीन लेती है। और उद्यमियों को लगभग 20 एवम् 30 हजार और इससे भी ज्यादा की दर से आवंटन प्राइज निकालती है। प्राधिकरण को चाहिए कि भूखंडो की आवंटन दर 7 हजार प्रतिवर्ग मीटर करे। ताकि उद्यमी आसानी से योजनाओं में हिस्सा ले सके। क्योंकि उद्यमी प्राधिकरण को भूखंड के दाम के साथ लीज रेंट भी देता है और उद्योग लगाकर देश के लिए उत्पादन, सरकार को राजस्व और लोगों को रोजगार भी।
33. एमएसएमई सेक्टर में महिला उद्यमियों की संख्या बहुतायत में है। संस्था आपसे आग्रह करती है महिला उद्यमियों को और ज्यादा प्रोत्साहित करने के लिए अलग से योजनाएं निकाली जाए। उनको विस्तार का मौका दिया जाए जिससे वे मैन्यूफैक्चिरंग क्षेत्र में और ज्यादा प्रगति के साथ राजस्व और रोजगार में बढ़ावा दे सके।
34. प्राधिकरण ने शासन के 4 फरवरी 2020 के आदेश के सहारे किसी भी कंपनी के शेयर होल्डर्स या डायरेक्टर बदलने पर शुल्क (सीआईसी) का प्रावधान कर रखा है। जबकि शेयर होल्डर डायरेक्टर बदलने पर कंपनी की संरचना पर कोई असर नहीं होता। भारत की कंपनी मंत्रालय और इंडियन कम्पनीज एक्ट भी ऐसा ही कहता है। ऐसे में प्राधिकरण द्बारा लिए जा रहे सीआईसी चार्जेज को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
35. औद्योगिक भूखंड आवंटन के समय प्रावधान है कि भूखंड के 40 प्रतिशत हिस्से में ग्रीनरी या पार्क विकसित किया जाए। और इसका अनुरक्षण भी उद्यमियों को ही करना है। प्राधिकरण की ओर से ये उद्यमियों पर आर्थिक भार से कम नहीं है क्योंकि ग्रीनरी के लिए दिए जा रहे भूखंड के रेट भी औद्योगिक भूखंड की रेट के हिसाब से ही चुकाने होते हैं। प्राधिकरण का अपना होर्टिकल्चर विभाग है। वे ठेके पर पार्को को विकसित कराने और अनुरक्षण का कार्य करता है। ऐसे में भूखंडों में पार्को या ग्रीनरी विकसित करने की जिम्मेदारी नोएडा प्राध्ािकरण की होनी चाहिए न की उद्यमियों की और पार्क ग्रीनरी के लिए औद्योगिक भूखंड में प्रस्तावित भूखंड की रेट कम होनी चाहिए।
36. औद्योगिक सेक्टरों में बिजली के खंभे लगाने का काम प्राधिकरण का ई एंड एम (इलेक्ट्रिकल और मैनटेनेंस) करता है। यहां सेक्टरों में लगाए गए खंभे जर्जर और पुराने हो चुके है। हाल ही आई आंधी तुफान में कई खंभे टेढ़े और गिर गए थे। जिससे औद्योगिक सेक्टरों में कई घंटे सप्लाई बाधित हुई थी। इससे करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ था। उसकी भरपाई तो मुश्किल है लेकिन प्राधिकरण को निर्देशित किया जाए कि औद्योगिक सेक्टरों में जर्जर खंभों को ठीक किया जाए और टूट गए वहां नए खंभे लगाए जाए।
37. नोएडा के कामगारो और श्रमिकों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके इसके लिए प्राध्ािकरण ने जिन स्कूलों को एक रुपए के हिसाब से जमीन लीज पर दी है उन सभी में 20 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए। इसी तरह यहां के निजी अस्पतालों में भी कामगार और श्रमिकों के इलाज में छूट दिलाई जाए।
38. औद्योगिक भूखंडों की लीज डीड की शर्तो में बदलाव किया जाए। इसमे 20 साल तक न तो उद्यमी आवंटित भूखंडों को बेच सके और न ही उसका एक प्रतिशत हिस्सा शेयर कर सके। साथ ही आवंटन के दो साल में औद्योगिक इकाई का कार्यशील प्रमाणपत्र हासिल करे। इन शर्तो को लीज में शामिल किया जाए। और अगर उद्योग बन्द करने की या भूखंड बेचने की ऐसी स्थिति आती भी है तो प्राधिकरण को वर्तमान कीमत पर सौंपे जाने की प्रक्रिया को क्रियांवित करे।
39. वह उद्यमी जो दशकों से यहा उद्योग चला रहे है और विस्तार में उनको भूखंड आवंटित होता है या हो चुका है। उन सभी उद्यमियों के लिए प्रापर्टी ट्रान्सफर (ट्रांसफर ऑफ मैमोरेंडम) चार्ज नहीं लिया जाए। यही नहीं यदि वे ब्लड रिलेशन में भी प्रापर्टी को ट्रांसफर करते है तो भी उनसे टीएम का चार्ज नहीं लिया जाए।
40. रिसर्च, सेंटर मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट, एक्सपोर्टर, प्रोडेक्शन, होम एंप्लाइज, एलईडी लाइट मेकर, रेडिमेड गारमेंट, फूड प्रोडेक्ट, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग एवम् इलेक्ट्रॉनिक्स आदि प्रोडक्ट बनाने वाली ऐसी कंपनियां जो विगत पांच से दस सालों से शहर में किराए के भूखंडों पर उद्यम चला रही है। यह उद्यमी रोजगार व सरकारी विभागों को राजस्व भी दे रहे हैं। किराए के चलते इनका आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। भूखंड मालिक भी प्रत्येक साल जबरन किराया बढ़ाता है। ऐसे उद्यमियों की बैलेंसशीट चेक कर उनको स्पेशल श्रेणी में भूखंड आवंटित किए जाए।
41. शहर में करीब 13 तेरह लाख कामगार व श्रमिक ईएसआईसी के तहत पंजीकृत है। इनकी चिकित्सीय सुविधा के लिए उद्यमी प्रतिमाह लाखों रुपए ईएसआई में जमा करता है। यहा बनी डिस्पेंसरी भी जर्जर हालात में है। कामगारों व श्रमिकों की स्वास्थ्य की चिंता भी प्राध्ािकरण को करनी होगी। प्राधिकरण ईएसआईसी के मामले में हस्ताक्षेप करे और श्रमिकों व कामगारों को उचित इलाज मुहैया कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के मार्फत ईएसआईसी प्रबंध्ान पर दबाव बनाए।
42. औद्योगिक गतिविधियों को संचालित करने में बैंक लोन व बैंकों से अन्य कार्य के लिए वहां बार-बार चक्कर लगाने पड़ते है। यहा खुली मुख्य बैंकों की शाखाए प्राध्ािकरण की परिसंपत्ति पर ही। एमएसएमई चाहती है कि प्राधिकरण उद्यमियों की इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए बैंक प्रबंधकों से बातचीत कर उद्यमियों के लिए अलग से व्यवस्था बनाते हुए सिंगल काउंटर बनाए जहा से सभी प्रकार के कार्य किए जा सके। इसमे आपका हस्ताक्षेप होना जारूरी है।
43. नोएडा प्राधिकरण ने उद्योगों के आवंटित भूखंडों के लिए एफएआर को बढ़ाने की सुविधा प्रदान की हुई है परन्तु एफएआर बढ़ाने के चार्जेज में बहुत ज्यादा इजाफा किया गया है जो की उचित नहीं है निवेदन है कि चार्जेज पूर्व की भांति ही रखे जाएं, बढ़ाएं गए रेट वापस लिए जाएं। वहीं दशकों से यहां इंडस्ट्री चला रहे उद्यमियों को स्पेशल छूट का प्रावधान किया जाए।
44. उत्पाद क्षमता को बढ़ाने के लिए यहा उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए डिस्प्ले सेंट बनाया जाए। साथ ही शहर में बनने वाले उत्पादों को प्राधिकरण अपनी वेबसाइट पर अपलोड करे और निवेशकों को परेशानी न हो इसके लिए रजिस्टर्ड उद्यमी संगठन के जिला अध्यक्षो, औद्योगिक इकाईयों के अध्यक्षों के नाम व नंबर अपलोड किए जाए। ताकि किसी निवेशक को यहा भटकना न पड़े।
45. औद्योगिक सेक्टरों में खराब होती जा रही एलईडी लाइटों को ठीक कराया जाए। ये सुरक्षा कारणों से भी काफी अहम है। क्योंकि औद्योगिक इकाईयां चाहे वे नोएडा ग्रेटरनोएडा या यमुना क्षेत्र में हो रात की शिफ्ट में काम करने वाले सड़को पर चलने में असहज महसूस करते है।
46. उद्यमियों की आड़ में फाइनेंसरों को भू-माफियाओं की तर्ज पर शिकंजा कसा जाए। क्योंकि ये औद्योगिक भूखंडों में उद्योग चलने नहीं देते अतः भू-माफियां एक्ट लगाकर उनकी संपंत्ति की जांच की जाए और आघोषित संपत्ति को जब्त किया जाए।
47. सी-89, सेक्टर-4, नोएडा फैक्ट्री के सामने एवं आसपास सब्जी फल आदि विक्रेता रेहड़ी लगाकर परेषान कर रहें है। उनको हटाते हुये आवष्यक कार्रवाही की जाये। एमएसएमई के जिलाध्यक्ष ने कहा कि उपरोक्त सभी समस्याओं पर गम्भीरता से विचार करते हुये निस्तारण करवाएं।

 

 

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