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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के नए सीईओ के सामने किसानों की चुनौती, 18 जुलाई से आंदोलन पर अड़े किसान

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– पुलिस गांवों में जाकर किसानों को डराने की कोशिश निंदनीय

ग्रेटर नोएडा, 17 जुलाई।

अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में 61 दिन तक दिन रात चले धरने में 24 जून को राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर ने मध्यस्थता कर लिखित समझौता कराया था। समझौते के अनुसार 30 जून तक किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए हाई पॉवर कमेटी का नोटिफिकेशन किया जाना था और 15 जुलाई तक हाई पॉवर कमेटी को किसानों के मुद्दों पर फैसला लेना था किसान सभा ने समझौते को मानते हुए अपना आंदोलन 15 जुलाई तक सांसद के धरना स्थल पर आकर आश्वासन देने के बाद स्थगित कर दिया था परंतु 6 जुलाई को प्राधिकरण ने किसान सभा को अवगत कराया कि हाई पावर गठित कमेटी का गठन नहीं हो रहा है इस तरह प्राधिकरण ने समझौते का उल्लंघन कर दिया। किसान सभा ने 7 तारीख को अपनी कमेटीयों की बैठक बुलाकर सांसद और प्राधिकरण को 15 जुलाई तक का समझौते का पालन करने का वक्त देकर 18 जुलाई से किसानों का पक्का मोर्चा लगाकर आंदोलन करने की घोषणा कर दी।

समझौते के उल्लंघन के कारण क्षेत्र के किसानों में भारी आक्रोश है किसान प्राधिकरण और मध्यस्थ सुरेंद्र नागर के प्रति काफी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं और इस समझौते को प्राधिकरण से भी अधिक सांसद द्वारा किए गए छल के रूप में देख रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने पूर्व में 61 दिन के आंदोलन के दौरान भी किसानों को डराने धमकाने ढाई ढाई लाख के मुचलके भेजने की कोशिश की थी किसानों को गिरफ्तार भी किया था लाठीचार्ज भी किया था परंतु किसान बिना भयभीत हुए लगातार धरने को चलाते रहे पुलिस की बर्बरता के कारण डीसीपी सेंट्रल रामबदन को अपने पद से हटना पड़ा आंदोलन के कारण ही कार्यवाहक सीईओ रितु माहेश्वरी को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से हटाया गया नए सीईओ रवि कुमार एनजी के सामने चुनौती है कि वह किए गए समझौते के अनुसार कार्रवाई करें।

अभी भी पुलिस अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रही है नागरिकों के अभिव्यक्ति की आजादी के संवैधानिक बुनियादी अधिकार का उल्लंघन करते हुए किसानों पर धरने में शामिल नहीं होने का दबाव बनाने की कोशिश कर रही है इस क्रम में इटेड़ा पतवारी खोदना खुर्द सादोपुर पाली घंगोला एवं अन्य सभी गांवों में संबंधित थाना पुलिस के एसएचओ और पुलिसकर्मी जाकर किसान सभा के साथियों को एवं अन्य सामान्य किसानों को भयभीत करने की कोशिश कर रहे हैं किसान सभा के प्रवक्ता डॉ रुपेश वर्मा ने कहा पुलिस और प्रशासन ने पूर्व में भी किसानों को दबाने की कोशिश की थी लेकिन किसान बिना डरे बिना रुके शांतिपूर्ण ढंग से अपने संवैधानिक अधिकार का उपयोग करते हुए आंदोलन करते रहे इसलिए पुलिस कमिश्नर अथवा पुलिस को जरा भी इस बारे में गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि किसान उनके डराने या धमकाने से रुक जाएंगे बल्कि उन्हें प्राधिकरण पर दबाव डालना चाहिए कि वह किए गए समझौते का पालन करें।

इसी सिलसिले में आज किसान सभा की जिला एक्शन कमेटी की मीटिंग हुई जिसमें इस मुद्दे को उठाया गया और सभी ने एकमत से पुलिस की इस नाजायज गैर कानूनी गैर संवैधानिक कार्रवाई की निंदा की। बैठक की अध्यक्षता नरेंद्र भाटी ने की संचालन सूबेदार ब्रह्मपाल ने किया बैठक में सर्वसम्मति से कार्यक्रम के अनुसार आंदोलन को शुरू करने और उसकी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के बारे में प्रस्ताव पास किया गया किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हमें प्राधिकरण पर पहले भी विश्वास नहीं था सांसद ने बीच में आकर मध्यस्था की आश्वासन दिया तो हमने सांसद और प्राधिकरण को अपना वादा पूरा करने का मौका दिया परंतु जैसे की आशंका थी प्राधिकरण अपने वादे से मुकर गया और सांसद भी प्राधिकरण को वादे के अनुसार कार्रवाई करवाने में असफल रहे।

सूबेदार ब्रह्मपाल ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि 10% आबादी प्लाट रोजगार नए कानून के अनुसार किसानों को लाभ भूमिहीनों का 40 वर्ग मीटर का प्लाट, आबादी, 120 वर्ग मीटर का न्यूनतम प्लॉट साइज आदि सहित सभी मसलों पर तुरंत कार्रवाई की आवश्यकता है नए सीईओ के सामने चुनौती है कि वह किसानों से हुए ताजा समझौते का पालन करते हुए तुरंत किसानों की समस्याओं को निपटाये बैठक में जगबीर नंबरदार, गवरी मुखिया, सतीश यादव, प्रशांत भाटी, मोहित नागर, हरेंद्र खारी, अजय पाल भाटी, निशांत रावल, अजब सिंह नेताजी सहित जिला एक्शन कमेटी के सभी लोग उपस्थित रहे।

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