नोएडा खबर

खबर सच के साथ

भागवत कथा -विश्व मे पर्यावरण सुधार और ग्लोबल वार्मिंग से निपटने का उपाय स्कंद पुराण में, पश्चिम की नकल ना करें-राजेंद्रा नन्द सरस्वती

1 min read

नोएडा, 10 सितंबर।

नोएडा में कलरिया बाबा मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में छठवें दिन श्रीकृष्ण और रुक्मिणी विवाह के प्रसंग पर पांडाल में श्रद्धालुओं ने फूल बरसाए और जमकर झूमे नाचे। इस अवसर पर पूर्व मंत्री उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा दादरी के पूर्व विधायक श्री नबाब सिंह नागर जी और नोएडा खबर के एडिटर इन चीफ श्री विनोद शर्मा जी की उपस्थिति रही। भागवत कथा के दौरान महाराज जी ने स्कंद पुराण के श्लोक का जिक्र करते हुए प्राचीन पौधों की महत्ता बताई।

श्री राजेंद्रानंद सरस्वती जी ने कहा कि “महारास लीला” द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ है। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया। भगवान श्रीकृष्ण और रुकमणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। भागवत कथा के छठवें दिन कथा स्थल पर रूकमणी विवाह उत्सव के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। श्रीकृष्ण रुक्मणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई और कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री श्री नवाब सिंह नागर जी भाजपा से और “नोएडा खबर डॉट कॉम” के एडिटर श्री विनोद शर्मा ने महाराज का पूजन कर व्यास गद्दी से आशीर्वाद प्राप्त किया और सेक्टर वासियों को भगवान् की कथा में आने को हिंदू तथा सनातन को मजबूती से स्थापित करने की इस पहल को सराहनीय बताया तथा राजेंद्रनंद सरस्वती जी महाराज के सनातन को भारत में स्थापित करने के योगदान को सराहा। उनके साथ ही श्री चमन अवाना जी जो जिला गौतम बुद्ध नगर भाजपा में महा मंत्री ने भी महाराज जी आशीर्वाद प्राप्त किया। जिसकी जानकारी श्री गौरी शंकर वैदिक धर्मार्थ ट्रस्ट के राष्ट्रीय महासचिव श्री भानू प्रताप लवानिया जी ने दी!

श्री राजेंद्रानंद सरस्वती जी ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। कथा श्रवण के दौरान स्थानीय महिलाओं पर पांडवों के भाव अवतरित हुए। कथा वाचक ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है, इसलिए जीव के अंदर अपारशक्ति रहती है यदि कोई कमी रहती है, वह मात्र संकल्प की होती है। संकल्प व कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे। उन्होंने महारास लीला श्री उद्धव चरित्र श्री कृष्ण मथुरा गमन और श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तृत विवरण दिया।

रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुक्मणी के भाई ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था, लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल नंद के लाला अर्थात श्री कृष्ण जी को ही पति के रूप में वरण करेंगी।

रुकमणी जी ने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी है। द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्य मार्गी है। इसलिए वो असत्य को नहीं सत्य को अपनाएगी। अंत में भगवान श्री द्वारकाधीश जी ने रुक्मणी के सत्य संकल्प को पूर्ण किया। उन्हें भार्या के रूप में वरण करके प्रधान पटरानी का स्थान दिया।

रुक्मणी विवाह प्रसंग पर आगे कथावाचक ने कहा इस प्रसंग को श्रद्धा के साथ श्रवण करने से कन्याओं को अच्छे घर और वर की प्राप्ति होती है और दांपत्य जीवन सुखद रहता है। महाराज जी ने कहा कि कथा मानव के चरित्र शुद्धि का यज्ञ है जिसे सुनते सुनते मन शुद्ध होता है; विचार उदात्त हो जाते हैं और चरित्र ऊपर उठता है।

जैसे स्नान नित्य करते हो तन शुद्ध होता है। ध्यान भी नित्य करने से चित्त शुद्ध होता है। भगवत्कथा भी नित्य श्रवण करने से मन शुद्ध होता है।

कथा में महाराज जी ने कहा कि जैसे धर्म को जाननेवाला दुर्लभ होता है, उसे श्रेष्ठ तरीके से बतानेवाला उससे भी दुर्लभ और श्रद्धा से सुननेवाला उससे दुर्लभ, और सबसे उपर धर्म का आचरण करनेवाला सुबुद्धिमान सबसे बड़ा दुर्लभ प्राणी होता है।

सत्कथाश्रवणे येषां वर्तते सात्त्विकी मति:!
तद्भक्तविष्णुभक्ताश्च ते वै भागवतोत्तमा:!!
अर्थात—
जिनकी सात्त्विक बुद्धि उत्तम भगवत्कथा सुनने में लगी रहती है तथा जो भगवान और उनके भक्तों के भक्त हैं, वे श्रेष्ठ भगवद्भक्त हैं!!

नोएडा सेक्टर 12 स्थित कलरिया बाबा मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया गया। छठे दिन व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक श्री राजेंद्रानंद सरस्वती जी महराज ने रास पांच अध्याय का वर्णन किया।

उनमें गाये जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण हैं जो भी ठाकुरजी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है वह भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है।

कथा प्रसंग मैं भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया।

“कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है”

व्यासपीठ से कहा कि सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रज में अनेकानेक बाल लीलाएं कीं, जो वात्सल्य भाव के उपासकों के चित्त को अनायास ही आकर्षित करती हैं। जो भक्तों के पापों का हरण कर लेते हैं, वही हरि हैं।

कथा व्यास जी ने कहा कि नंदालय में गोपियों का तांता लगा रहता है। हर गोपी भगवान से प्रार्थना करती है कि किसी न किसी बहाने कन्हैया मेरे घर पधारें। जिसकी भगवान के चरणों में प्रगाढ़ प्रीति है, वही जीवन्मुक्त है।

कथा कर्म मैं महाराज जी ने कहा कि एक बार माखन चोरी करते समय मैया यशोदा आ गईं तो कन्हैया ने कहा कि मैया तुमने इतने मणिमय आभूषण पहना दिए हैं जिससे मेरे हाथ गर्म हो गए हैं तो माखन की हांडी में हाथ डालकर इन हाथों को शीतलता प्रदान कर रहा हूं।

महाराज जी ने कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, उद्धव-गोपी संवाद, द्वारका की स्थापना, रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया।

आस्था और विश्वास के साथ भगवत प्राप्ति आवश्यक हैं। भगवत प्राप्ति के लिए निश्चय और परिश्रम भी जरूरी हैं। भगवान श्रीकृष्ण रुक्मणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया। कथा के दौरान भक्तिमय संगीत ने श्रोताओं को आनंद से परिपूर्ण किया। उन्होंने कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है।

महाराज जी ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण-रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं।

महाराज जी ने आज की कथा में पर्यावरण संरक्षण ग्लोबल वार्मिंग जैसे गंभीर मुद्दों पर जोर दिया जिसका स्कंद पुराण में एक सुंदर श्लोक है उसका भी वर्णन किया –

अश्वत्थमेकम् पिचुमन्दमेकम्
न्यग्रोधमेकम् दश चिञ्चिणीकान्।
कपित्थबिल्वाऽऽमलकत्रयञ्च
पञ्चाऽऽम्रमुप्त्वा नरकन्न पश्येत्।।

अश्वत्थः = पीपल (100% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
पिचुमन्दः = नीम (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
न्यग्रोधः = वटवृक्ष (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
चिञ्चिणी = इमली (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
कपित्थः = कविट (80% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
बिल्वः = बेल (85% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आमलकः = आवला (74% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)
आम्रः = आम (70% कार्बन डाइऑक्साइड सोखता है)

(उप्ति = पौधा लगाना)

अर्थात् – जो कोई इन वृक्षों के पौधो का रोपण करेगा, उनकी देखभाल करेगा उसे नरक के दर्शन नही करने पड़ेंगे।

इस सीख का अनुसरण न करने के कारण हमें आज इस परिस्थिति के स्वरूप में नरक के दर्शन हो रहे हैं। अभी भी कुछ बिगड़ा नही है, हम अभी भी अपनी गलती सुधार सकते हैं औऱ गुलमोहर निलगिरी जैसे वृक्ष अपने देश के पर्यावरण के लिए घातक हैं।

पश्चिमी देशों का अंधानुकरण कर हमने अपना बड़ा नुकसान कर लिया है। पीपल, बरगद और नीम जैसे वृक्ष रोपना बंद होने से सूखे की समस्या बढ़ रही है।

ये सारे वृक्ष वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाते है। साथ ही, धरती के तापनाम को भी कम करते हैं।

हमने इन वृक्षों के पूजने की परंपरा को अन्धविश्वास मानकर फटाफट संस्कृति के चक्कर में इन वृक्षो से दूरी बनाकर यूकेलिप्टस (नीलगिरी) के वृक्ष सड़क के दोनों ओर लगाने की शुरूआत की। यूकेलिप्टस झट से बढ़ते है लेकिन ये वृक्ष दलदली जमीन को सुखाने के लिए लगाए जाते हैं। इन वृक्षों से धरती का जलस्तर घट जाता है। विगत 40 वर्षों में नीलगिरी के वृक्षों को बहुतायात में लगा कर पर्यावरण की हानि की गई है।

शास्त्रों में पीपल को वृक्षों का राजा कहा गया है…

मूले ब्रह्मा त्वचा विष्णु शाखा शंकरमेवच।
पत्रे पत्रे सर्वदेवायाम् वृक्ष राज्ञो नमोस्तुते।।

भावार्थ -जिस वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा जी तने पर श्री हरि विष्णु जी एवं शाखाओं पर देव आदि देव महादेव भगवान शंकर जी का निवास है और उस वृक्ष के पत्ते, पत्ते पर सभी देवताओं का वास है ऐसे वृक्षों के राजा पीपल को नमस्कार है आगामी वर्षों में प्रत्येक 500 मीटर के अंतर पर यदि एक एक पीपल, बड़ , नीम आदि का वृक्षारोपण किया जाएगा, तभी अपना भारत देश प्रदूषणमुक्त होगा। घरों में तुलसी के पौधे लगाना होंगे। हम अपने भविष्य में भरपूर मात्रा में नैसर्गिक ऑक्सीजन मिले इसके लिए आज से ही अभियान आरंभ करने की आवश्यकता है। आइए हम पीपल , बड़ , बेल , नीम , आंवला एवं आम आदि वृक्षों को लगाकर आने वाली पीढ़ी को निरोगी एवं सुजलां सुफलां पर्यावरण देने का प्रयत्न करें…

रविवार 10 सितंबर को कथा के सातवे और अंतिम दिवस में नवयोगेश्वर संवाद, अवधूतो पाख्यान, कलिधर्म और फिर कथा विश्राम जिसकी जानकारी ट्रस्ट के महासचिव श्री भानू प्रताप लवानिया जी ने दी!

 10,394 total views,  2 views today

More Stories

Leave a Reply

Your email address will not be published.

साहित्य-संस्कृति

चर्चित खबरें

You may have missed

Copyright © Noidakhabar.com | All Rights Reserved. | Design by Brain Code Infotech.