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नोएडा : एमिटी विश्वविद्यालय में मनाया गया विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2023

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नोएडा, 10 अक्टूबर।

छात्रों को मानसिक स्वास्थय के प्रति जागरूक करने के लिए और मानसिक स्वास्थय के क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए जानकारी प्रदान करने हेतु   मंगलवार को एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ साइकोलॉजी एंड एलाइड सांइसेस, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हैल्थ एंड एलाइड सांइसेस और एमिटी सेंटर फॉर गाइडेंस एंड कांउसलिंग द्वारा ‘‘मानव स्वास्थय एक सार्वभौमिक मानव अधिकार है’’ विषय पर विश्व मानसिक स्वास्थय दिवस 2023 मनाया गया।

इस कार्यक्रम के शुभारंभ समारोह में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेंटल हैल्थ के कान्स्टिटूअन्सी डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष और मनोचिकित्सक डा सुनिल मित्तल, वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा एन जी देसाई, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ साइकोलॉजी एंड एलाइड सांइसेस की प्रमुख डा रंजना भाटिया द्वारा किया गया।

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेंटल हैल्थ के कान्स्टिटूअन्सी डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष और मनोचिकित्सक डा सुनिल मित्तल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों के मध्य आकर मानसिक स्वास्थय पर चर्चा करके स्वंय के व्यक्तित्व में उत्साह का अनुभव करता हूं। जीवन में सफल होने के लिए मानसिक स्वास्थय का सुदृढ़ होना आवश्यक है। डा मित्तल ने कहा वैश्विक परिस्थितियों जैसे महामारी, युद्ध, जलवायु परिवर्तन आदि ने मानसिक स्वास्थय को प्रभावित किया है। हर व्यक्ति के पास स्वस्थ मानसिक स्वास्थय का अधिकार है और 1966 के यूएन कनवेंशन में समान अधिकार, 2006 यूएनसीआरपीडी कन्वेंशन, विकलांग व्यक्तियों की स्थिति के लिए मानव अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र से स्थापित मानव अधिकार सिद्धांतों को लागू करता है।

भारत में भी 2017 में मेंटल केयर एक्ट को पारित किया गया। डा मित्तल ने कहा कि आप योग, मेडिटेशन, व्यायाम और अच्छी जीवन शैली सेे एक बेहतर मानसिक स्वास्थय का निर्माण कर सकते है इसलिए आज से अभियान चलाये कि स्वंय भी मानसिक स्वास्थय के प्रति जागरूक होगे और अन्य लोगों को भी करेगें।

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डा एन जी देसाई ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कठिनाईयंा और समस्यायें सदैव आपको और भी मजबूत बनाती है इसलिए स्वंय के मानसिक स्वास्थय को संतुलित बनायें। कई बार इस उम्र में पीढ़ीयों के मध्य का रिक्त स्थान का बोझ या आपसी मतभेद भी मानसिक विकार पैदा करते है इसलिए सदैव शांत मन दूसरे व्यक्ति के विचारों को समझे। उन्होनें कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका सहित पश्चिम में मानसिक विकास बहुत आम है लेकिन भारत में केवल 10 से 12 प्रतिशत आबादी को सामाजिक सांस्कृतिक कारकों, पारिवारिक जुड़ाव, देखभाल की प्रकृति और कई अन्य कारकों के कारण मानसिक स्वास्थय समस्यांए है। मानसिक परेशानी एक महामारी और बहुत बड़ा मुद्दा है जबकि मानसिक कल्याण एक समाजिक राजनीतिक घटना है। उन्होनें कहा कि आप युवा जो भविष्य के मनोचिकित्सक होगे उन्हे बदलते परिदृश्य के बारे में विचार करना चाहिए।

एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने संबोधित करते हुए कहा कि कुछ वर्षो पहल लोग मानसिक स्वास्थय या विकारों के बारे में बात करने में असहज महसूस करते थे लेकिन आज लोग इस मुद्दे पर खुल कर बात कर रहे है। अगर व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ है तो वह सकारात्मक विचार रखेगा और सकारात्मक कार्य करेगा। डा शुक्ला ने कहा हैप्पीनेस इंडेक्स में हमारी रैकिंग भी हमारे मानसिक स्वास्थय पर आधारित होती है। आज कई देशों से लोग हमारे देश में मेडिकल सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए आते है और आने वाले समय में मानसिक स्वास्थय रोग से जुड़े व्यक्ति भी बड़ी संख्या में हमारे मनोचिकित्सकों से परामर्श व उनकी सेवाये प्राप्त करने के लिए आयेगें इसलिए छात्रों के इस स्वास्थय के क्षेत्र में कैरियर बनाने का बेहतरीन अवसर भी है।

एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ साइकोलॉजी एंड एलाइड सांइसेस की प्रमुख डा रंजना भाटिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि एक अच्छी शिक्षा, मानसिक स्वास्थय के जीवन में महत्वपूर्ण परिपेक्ष्य है। इस मानसिक स्वास्थय दिवस का आयोजन विश्व में लोगों को मानसिक स्वास्थय के प्रति जागरूक करने के लिए किया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘‘मानव स्वास्थय एक सार्वभौमिक मानव अधिकार’’ हर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थय को मजबूत बनाने में सहायक होगा क्योकी यह सभी का अधिकार है।

इस कार्यक्रम में एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हैल्थ एंड एलाइड सांइसेस की निदेशक डा रूशी तमन्ना, एमिटी सेंटर फॉर गाइडेंस एंड कांउसलिग की डा हरमिंदर गुजराल उपस्थित थे।

सम्मेलन के अंर्तगत आधारित तकनीकी सत्र में दिल्ली के द होप फांउडेरूान के संस्थापक निदेशक डा दीपक रहेजा, नोएडा के बिलबांग हाई इंटरनेशन स्कूल की प्रधानाचार्या डा शर्मिला चैटर्जी , अधिवक्ता सुश्री स्वाती शंकर, थिरेपहील प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक निदेशक डा अनन्या सिंन्हा आदि ने अपने विचार रखे।

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