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ग्रेटर नोएडा बोर्ड में फैसला, 8 नए औद्योगिक सेक्टर होंगे विकसित, बोड़ाकी रेलवे टर्मिनल का प्लान तैयार

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ग्रेटर नोएडा 25 सितंबर

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की 123वी बोर्ड बैठक में शहर के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए । सबसे बड़ी बात मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब की डीपीआर तैयार हो गई है और यह शासन में भेज दी गई है इसके साथ ही बोड़ाकी के आसपस मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित करने के प्लान पर भी काम शुरू कर दिया गया है। इस बोर्ड बैठक में जो महत्वपूर्ण फैसले लिए गए उनके बारे में प्राधिकरण की तरफ से विस्तार से जानकारी दी गई है। यह है अहम फैसले

1–आईआईटीजीएनएल की महत्वपूर्ण परियोजना मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार हो गई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने शनिवार को परियोजना रिपोर्ट शासन के लिए अग्रसारित कर दिया है।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने भारत सरकार के सहयोग से बोड़ाकी के आसपास 7 गांवों की 478 हेक्टेयर जमीन पर मल्टीमॉडल ट्रांंसपोर्ट व लॉजिस्टिक हब विकसित करने की योजना तैयार की है। इन दोनों परियोजनाओं पर भारत सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के अंतर्गत तीन अहम परियोजनाएं, बोड़ाकी के पास रेलवे टर्मिनल, अंतर्राज्यीय व लोकल बस अड्डा और मेट्रो कनेक्टिविटी की सुविधा विकसित की जाएगी। पहली परियोजना, बोड़ाकी के पास रेलवे टर्मिनल पर रेल मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है। अगले पांच साल में इसके बन जाने के बाद पूरब की ओर जाने वाली अधिकतर ट्रेनें यहीं से चलेंगी। ग्रेटर नोएडा व उसके आसपास रहने वालों को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल आदि के लिए ट्रेनें यहीं से मिल सकेगी। उन्हें दिल्ली, नई दिल्ली व आनंद विहार रेलवे स्टेशन जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरी परियोजना, अंतर्राज्यीय व लोकल बस अड्डा है। इसके बन जाने से उद्योगों में काम करने वालों के लिए दूरदराज के साथ ही लोकल बसें भी मिल सकेंगी। तीसरी परियोजना, नोएडा-ग्रेटर नोएडा को जोड़ते हुए डिपो स्टेशन से मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब तक मेट्रो स्टेशन है। मौजूदा डिपो स्टेशन से मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब तक करीब तीन किलोमीटर लंबी मेट्रो लाइन भी बनेगी। वहीं, लॉजिस्टिक हब से माल ढुलाई की राह आसान हो जाएगी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण के उद्योगों की जरूरत को देखते हुए यह परियोजना बेहद अहम है। मुंबई, गुजरात आदि जगहों पर जाने में चार से पांच दिन लगता है, इसके शुरू होने के बाद माल डेढ़ दिन में पहुंच सकेगा। दादरी के पास से गुजर रही डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर इससे जुड़ेगा। इसके अलावा लॉजिस्टिक हब में वेयर हाउस भी बनेंगे।

2–ग्रेटर नोएडा शहर का तेजी से औद्योगिक नगरी के रूप में विस्तार हो रहा है। नई औद्योगिक इकाइयां निरंतर लग रही हैं। ग्रेटर नोएडा डाटा सेंटर हब के रूप में भी विकसित हो रहा है। आवासीय व संस्थागत सेक्टर भी विकसित हो रहे हैं। इससे ग्रेटर नोएडा एरिया में ऊर्जा की खपत बढ़ रही है। बिजली की भविष्य की मांग को ध्यान में रखते हुए 06 नए बिजलीघर बनाने के लिए बोर्ड ने मंजूरी प्रदान कर दी है। ये सभी बिजलीघर गैस इंसुलेटेड सिस्टम पर आधारित होंगे।

ये हैं प्रस्तावित बिजलीघर
–220/132/33केवी सबस्टेशन–जलपुरा
–220/132/33 केवी सबस्टेशन–नॉलेज पार्क-5
–132/33 केवी सबस्टेशन– ईकोटेक -8
–133/33 केवी सबस्टेशन–ईकोटेक 10/11
— 400/220/132 केवी सबस्टेशन मेट्रो डिपो
–400/220/132 केवी सबस्टेशन अमरपुर

 

3–फ्लैट खरीदारों को घर दिलाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने एक अहम फैसला लिया है। बिल्डर परियोजनाओं को पूर्ण करने और फ्लैट खरीदारों को राहत देने के लिए शासन के निर्देश पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अधूरे प्रोजेक्टों का निर्माण कार्य पूरा करने की समयसीमा (टाइम एक्सटेंशन) जून 2021 तय की थी। बिना पेनल्टी उनको टाइम एक्सटेंशन दिया गया था। करीब 39 बिल्डरों ने इसका लाभ लिया था, लेकिन कोविड के चलते ऐसे प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो सके। खरीदारों को उनको आशियाना दिलाने के मकसद से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड ने बिना पेनल्टी इन प्रोजेक्टों का निर्माण कार्य पूरा करने की अवधि बढ़ाकर 31 दिसंबर 2021 कर दी है।

4–बिल्डर ग्रुप हाउसिंग, वाणिज्यिक व आईटी प्रोजेक्ट के देय धनराशि की वसूली के लिए एस्क्रो खाता खोलने के नियम में बदलाव किया गया है। अब तक प्राधिकरण व आवंटी के मध्य एस्क्रो खाता खोला जाता है। अब इसमें बैंकों को भी शामिल किया गया है। बोर्ड ने इस पर सहमति दे दी है। एस्क्रो खाता खोलने का निर्णय सबसे पहले 2016 में लिया गया था। इस फैसले से ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का पैसा समय से मिलता रहेगा और निवेशकों का पैसा भी नहीं फंसेगा। इस पैसे से प्रोजेक्ट भी निर्धारित समय पर तैयार हो सकेंगे, जिससे खरीदारों को तय समय पर अपना आशियाना मिल सकेगा।

5–ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में औद्योगिक निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण आठ नए औद्योगिक सेक्टरों को विकसित कर रहा है। ये सेक्टर ईकोटेक 7, 8, 9, 12ए, 16, 19, 19ए व 21 बन रहे हैं। इन 8 सेक्टरों के लिए करीब 899 हेक्टेयर जमीन की दरकार है। ये जमीन पौव्वारी, इमिलियाका, अटाई मुरादपुर, लुक्सर, दादूपुर, लड़पुरा, खानपुर, सिरसा, वैदपुरा, जौन समाना, सुनपुरा, भोला रावल, धूम मानिकपुर, खेड़ी, भनौता, खोदना कला, कैलाशपुर उर्फ किराचपुर, खोना खुर्द व आमका की है। इन 8 सेक्टरों की 899 हेक्टेयर जमीन में से करीब 450 हेक्टेयर जमीन प्राधिकरण के कब्जे में आ चुकी है। शेष जमीन को शीघ्र प्राप्त करने के लिए प्राधिकरण कार्यालय में किसान सुविधा केंद्र की स्थापना की गई है। साथ ही स्टांप पेपर के बजाय ई-स्टांप का प्रयोग किया जा रहा है। बैनामे के लिए पंजीकरण शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन किया जा रहा है। किसान से सहमति मिलने के 15 दिन के भीतर उसकी जमीन का बैनामा किया जा रहा है। प्राधिकरण बोर्ड ने 8 सेक्टरों को विकसित करने की अनुमति प्रदान कर दी है। इस फैसले से ग्रेटर नोएडा में औद्योगिक निवेश और बढ़ेगा जिससे हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे।

6–ग्रेटर नोएडा के निवासियों को इस साल के अंत तक गंगाजल मिल जाएगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बोर्ड बैठक ने शनिवार को 85 क्यूसेक गंगाजल प्रोजेक्ट की समीक्षा की और आगामी तीन माह में परियोजना पूर्ण कर बोर्ड को अवगत कराने का निर्देश दिया। ग्रेटर नोएडा में 85 क्यूसेक गंगाजल परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इसकी लागत करीब 800 करोड़ रुपये है। अपर गंगा कैनाल से गंगाजल आएगा। देहरा में यह पानी शोधित होगा। वहां पर 210 एमएलडी का जल शोधन यंत्र लगाया गया है। अगले तीन माह में गंगाजल ग्रेटर नोएडा पहुंचने का अनुमान है। यह प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी गंगाजल परियोजना है। इससे ग्रेटर नोएडा ईस्ट व ग्रेनो वेस्ट के लाखों निवासी लाभान्वित होंगे।

7–ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से बीपीओ/ कॉल सेंटर के आवंटियों की सुविधा के लिए लीज डीड कराने की समयसीमा 31 मार्च 2022 तक बढ़ा दी गई है।

8–ग्रेटर नोएडा को डाटा सेंटर कैपिटल बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर नियमावली 2021 को प्राधिकरण बोर्ड द्वारा अंगीकृत (एडॉप्ट) करने की अनुमति प्रदान कर दी गई है। इससे डाटा सेंटर क्षेत्र के बड़े प्लेयर्स आकर्षित हो सकेंगे और ग्रेटर नोएडा में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न डाटा सेंटर शीघ्र ही स्थापित हो सकेंगे।

9–पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रेटर नोएडा एरिया में स्थित सूरजपुर वेटलैंड के आरक्षित वन्य क्षेत्र को विकसित करने का निर्णय बोर्ड ने लिया है। इसके अंतर्गत दो प्रवेश द्वार व आधारभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस परियोजना पर लगभग 1.70 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।

10–ग्रेटर नोएडा की स्वच्छता मुहिम को आगे बढ़ाते हुए सेक्टर ईकोटेक 12 में मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर (एमआरएफ) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए यूएनडीपी (यूनाइटेड नेशन डेवलपमेंट प्रोग्राम) को चार साल के लिए 2000 वर्ग मीटर जमीन हस्तांरित की जाएगी। इस परियोजना का पूरा खर्च एचडीएफसी बैंक वहन करेगा। इस एमआरएफ सेंटर से ग्रेटर नोएडा शहर से निकलने वाले सूखे कूड़ा का निस्तारण हो सकेगा।

11–ग्रेटर नोएडा के निवासियों की सुविधा को देखते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की तरफ से तीन फुटओवर ब्रिज बनाने का निर्णय लिया गया है। ये तीनों फुटओवर ब्रिज बीओटी (बिल्ड ऑपरेट एंड ट्रांसफर) के आधार पर बनेंगे। ये एफओबी कैलाश अस्पताल के सामने, गामा शॉपिंग मॉल के सामने, कलेक्ट्रेट ऑफिस के सामने बनाए जाएंगे। इसमें आधुनिक सुविधाओं के साथ ही लिफ्ट की सुविधा भी मिलेगी।
बोर्ड बैठक की अध्यक्षता ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन संजीव मित्तल ने की। इस बैठक में औद्योगिक विकास विभाग के प्रमुख सचिव अरविंद कुमार, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण, नोएडा प्राधिकरण की सीईओ रितु माहेश्वरी, यीडा के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ दीपचंद्र व एसीईओ अमनदीप डुली व शासन से अन्य अधिकारी व प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

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