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नोएडा: एमिटी विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन के लिए वनरोपण पर कार्यशाला

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नोएडा, 5 जुलाई।

एमिटी विश्वविद्यालय में ‘‘जलवायु परिवर्तन के प्रति शहरी लचीलापन बढ़़ाने के लिए वनरोपण’’ पर शुक्रवार को एक कार्यशाला का आयोजन किया गया।

एमिटी विश्वविद्यालय में चल रहे साप्ताहिक वन महोत्सव कार्यक्रम कें अंर्तगत आज नैचुरल रिर्सोसेस एंड एनवायरमेंटल साइसेसं डोमेन द्वारा ‘‘ में ‘‘जलवायु परिवर्तन के प्रति शहरी लचीलापन बढ़ाने के लिए वनरोपण’’ पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का शुभारंभ पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर जनरल (वन) श्री बिवाश रंजन, एमिटी लॉ स्कूल के चेयरमैन डा डी के बंद्योपाध्याय, महाराष्ट्र के पूर्व प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डा डी के त्यांगी, पंजाब के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री विद्या भूषण कुमार और एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिर्सोसेस एंड सस्टनेबल डेवलपमेंट के निदेशक डा एस पी सिंह द्वारा किया गया।

कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के पूर्व एडिशनल डायरेक्टर जनरल (वन) श्री बिवाश रंजन ने कहा कि आज की यह कार्यशाला बेहद महत्वपूर्ण है, वर्षाकाल प्रारंभ होने वाली है और ऐसे समय में पौधारोपण बेहद जरूरी होता है। शहरीकरण एक अर्थव्यवस्था की प्रक्रिया है जिससे कार्बन उत्सर्जन होता है इसलिए इससे उत्पन्न होनेवाली चुनौतियों को समझना आवश्यक है और उनके निवारण के लिए कार्य करना होगा। उन्होेने नोएडा का उदाहरण देते हुए कहा कि शहरों में आबादी के रहने के स्थान मेे 40 प्रतिशत स्थान अन्य सेवाओं जैसे सड़क, अस्पताल, हरित स्थान, आदि के लिए होते है किंतु यह सिमटते जा रहे है। सबसे अधिक असर पर्यावरण पर पड़ रहा है जिसमें पानी की कमी सबसे बड़ी समस्या है। विश्व में कुछ शहर पानी की भयंकर कमी से तो कुछ डूबने की कगार पर है श्री रंजन ने कहा कि पौधे लगाने, कार्बन उत्सर्जन का को कम करने, स्वदेशी पौधों का रोपने, अक्षय उर्जा का उपयोग करने और स्थायी वनीकरण प्रबंधन का अभ्यास जैसे कुछ कार्य जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण कर सकते है।

एमिटी लॉ स्कूल के चेयरमैन डा डी के बंद्योपाध्याय ने कहा कि वर्तमान में विश्व में कोई देश या शहर नही है जो जलवायु परिवर्तन की समस्या से प्रभावित ना हो। हमारे द्वारा छोड़े गये कार्बन पदचाप एक लंबे समय तक पर्यावरण में रहते है इसलिए पौधारोपण को बढ़ावा दे कर और कार्बन उत्सर्जन को कम करने समस्या का निवारण संभव है। एमिटी मे ंहम छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के साथ उनके समाजिक कर्तव्यबोध के प्रति जागरूक करते है इसलिए इस प्रकार के वन महोत्सव कार्यक्रमों द्वारा छात्रांे को पौधा रोपण के लिए प्रोत्साहित भी किया गया।

महाराष्ट्र के पूर्व प्रमुख मुख्य वन संरक्षक डा डी के त्यांगी ने कहा कि तापमान, वर्षा और हवा जलवायु परिवर्तन के तीन मुख्य तत्व हैं। तापमान में वृद्धि से ग्लोबल वार्मिंग होती है, बाढ़ और सूखा वर्षा में बदलाव के कारण होता है और चक्रवात और आंधी हवाओं में विचलन के कारण होते हैं। औद्योगिक युग की शुरुआत से ही ग्रीनहाउस गैसों और नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन में वृद्धि हुई है और इनमें से अधिकांश उत्सर्जन निशेचित मिट्टी और पशु अपशिष्ट से आते हैं। इसलिए, इन उत्सर्जनों के प्रभाव को कम करने के लिए वृक्षारोपण बेहद जरूरी है।

पंजाब के पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री विद्या भूषण कुमार ने कहा कि हमे स्वंय को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना होगा और जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए पहल करनी होगी। श्री कुमार ने कहा कि केवल पौधा रोपण ही महत्वपूर्ण नही है बल्कि उसकी देखभाल करना आवश्यक है जिससे वह एक पूर्ण विकसित वृक्ष बन सकें।

एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिर्सोसेस एंड सस्टनेबल डेवलपमेंट के निदेशक डा एस पी सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य छात्रों में उत्साह और जागरूकता पैदा करना है जिससे सभी को पर्यावरण से होने वाले नुकसानों की जानकारी हो सके और इसके निराकरण के लिए सामूहिक प्रयास किये जा सके।

इस अवसर पर कार्यशाला में छात्रों और शिक्षक भी उपस्थित थे।

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