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क्या आप जानते हैं यूपी में बिजली विभाग 91 हजार करोड़ के घाटे में है ? कारण जानेंगे तो होंगे हैरान ?

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-यूपी में बिजली विभाग 91 हजार करोड़ के घाटे में क्यों है ?

-300 यूनिट तक बिजली फ्री देने पर आएगा 15 हजार करोड़ सालाना का भार

-आप और सपा ने किया है 300 यूनिट फ्री बिजली  दिलाने का वादा

-प्रदेश में 30 प्रतिशत हो रही है बिजली की चोरी

लखनऊ, 10 नवंबर।
यूपी के चुनाव में 300 यूनिट तक बिजली फ्री करने का मुद्दा आम आदमी पार्टी ने शुरू कर दिया है। इसी मुद्दे के तर्ज पर समाजवादी पार्टी ने भी अपने चुनावी वादे में 300 यूनिट तक बिजली फ्री करने का ऐलान किया है। आम आदमी पार्टी ने तो दिल्ली में इस प्रयोग को लागू करने के बाद इसी तरह की घोषणा यूपी, पंजाब, उत्तराखंड व गोवा तक में कर दी है। अब 28 नवंबर को लखनऊ में होने वाली आम आदमी पार्टी की रैली में इसे विस्तार से रखा जाएगा। इससे पहले कि बिजली के मुद्दे पर बीजेपी की तरफ से कोई पत्ते खोले जाएं आप सभी को एक महत्वपूर्ण बिंदु पर चर्चा करना जरूरी है कि इस समय यूपी बिजली विभाग का घाटा 91 हजार करोड़ तक पहुंच चुका है। हालांकि बिजली फ्री देने का इस घाटे से कोई लेना देना नही है। बिजली के विशेषज्ञ मानते हैं कि यूपी में अगर 300 यूनिट तक बिजली फ्री दी भी गई तो इसका भार 15 हजार करोड़ के करीब होगा जो सरकार भरपाई करेगी तो विभाग को कोई नुकसान नहीं होने वाला है। बहरहाल यह मुद्दा आने वाले दिनों में तूल पकडेगा।
क्यों हो रहा है बिजली विभाग में इतना घाटा
यूपी में बिजली विभाग में हुए 91 हजार करोड़ के घाटे पर तस्वीर साफ करते हुए ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने नोएडा खबर डॉट कॉम से बात करते हुए जानकारी दी कि यूपी में बिजली विभाग के घाटे के दो ही कारण हैं। पहला कारण यह है कि महंगी बिजली खरीद के सस्ते में बेचना और दूसरा बिजली चोरी रोकने का कारगर उपाय ना करना कारण है। उन्होंने बताया कि यूपी में पीक समय में 25 हजार मेगावाट की बिजली की मांग है। जबकि उत्पादन सिर्फ 5 हजार मेगावाट का होता है बाकी 20 हजार मेगावाट बिजली निजी क्षेत्र से महंगी खरीद रहे हैं। इस समय यूपी में बिजली के घरेलू उपभोक्ता के घर तक पहुंचने की लागत 7 रुपये 45 पैसे प्रति यूनिट आ रही है। निजी क्षेत्र से महंगी बिजली खरीदी जा रही है। उन्होंने आंकडा देते हुए बताया कि इस समय यूपी में सरकार के नियंत्रण में हो रहे बिजली उत्पादन संयंत्र अनपारा में 2630 मेगावाट बिजली का  थर्मल उत्पादन हो रहा है। यहां बिजली की लागत लगभग 2 रुपये प्रति यूनिट आती है। इसके अलावा ओबरा में एक हजार मेगावाट, परीच्छा में 1030 मेगावाट, हरदुआगंज में 610 मेगावाट बिजली पैदा हो रही है। इन बिजली घरों में कुल क्षमता का 70 प्रतिशत बिजली का उत्पादन होता है। लिहाजा लगभग 3500 मेगावाट बिजली यूपी में उत्पादन हो रहा है।इसकी औसत लागत 3 रूपये 34 पैसे प्रति यूनिट की लागत होती है। अब प्रदेश में बिजली ज्यादातर निजी क्षेत्र पर निर्भर हो गई है, वहां से 6 रूपये प्रति यूनिट तक पर खरीद की जा रही है।  सिर्फ 501 यूनिट जल विद्युत से मिल रहा है।  शैलेंद्र दुबे ने बताया कि हाल ही में जब कोयला संकट बढ़ा तो कई राज्यों ने 20 रुपये प्रति यूनिट तक बिजली खरीदी।
उन्होंने जानकारी दी कि बिजली घाटे का दूसरा कारण प्रदेश में बड़े पैमाने पर हो रही चोरी को रोक पाने मे विफल होना भी है। बिजली विभाग में अब वितरण, पारेषण और उत्पादन तीन अलग-अलग विभाग हैं। लेकिन विभाग को बिजली चोरी रोकने के लिए जो उपाय करने चाहिए थे, उस पर कोई कार्रवाई नहींं हुई। जिन क्षेत्रों में ज्यादा बिजली चोरी हो रही है वहां पर अंडरग्राउंड केबल या इंसुलेटेड वायर लगाना चाहिए था।  क्षेत्र से जो फीड बैक विभाग को मिलती है उसका एक कारण यह है कि बिजली चोरी करने वाले समय के हिसाब से अपनी पार्टी बदल लेते हैं वे सत्ताधारी पार्टी के साथ हो लेते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस समय यूपी में लगभग 30 प्रतिशत बिजली चोरी हो रही है। वैसे नोएडा में यह 8 प्रतिशत के करीब है। इसका कारण अन्य कारणों से लाइन लॉस होना भी है। ऐसे में जब यूपी का बिजली विभाग 91 हजार करोड के घाटे से हैं तब चोरी रोकने या बिजली में सरकार का उत्पादन में आत्मनिर्भर होने के बाद ही घाटा कम होगा वरना इस घाटे से कैसे हरेक को 300 यूनिट बिजली फ्री देने का सपना पूरा हो पाएगा।
(नोएडाखबरडॉटकॉम के लिए विनोद शर्मा से हुई बातचीत के आधार पर स्पेशल स्टोरी)

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