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विभाजन कालीन भारत की साक्षी ग्रन्थ का संघ प्रमुख मोहन भागवत ने किया विमोचन, कृष्णानन्द सागर ने लिखी पुस्तक

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-विश्व कल्याण के लिए हिंदू समाज समर्थवान बने: मोहन भागवत

-भारत के विभाजन की पीड़ा का समाधान विभाजन को निरस्त करना ही है।

नोएडा, 25 नवम्बर।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत ने कहा कि हमें इतिहास को पढ़ना और उसके सत्य को वैसा ही स्वीकार करना चाहिए। अगर राष्ट्र को सशक्त बनाना है और विश्व कल्याण में योगदान करना है तो उसके लिए हिंदू समाज को समर्थ बनना होगा। भारत के विभाजन की पीड़ा का समाधान विभाजन को निरस्त करना ही है।
श्री भागवत नोएडा सेक्टर 12 स्थिति भाऊ राव देवरस विद्या मंदिर के सभागार में कृष्णा नंद सागर लिखित पुस्तक विभाजनकालीन भारत के साक्षी के लोकार्पण समारोह में लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्हींने कहा कि भारत की विचारधारा सबको साथ लेकर चलने वाली है । ये अपने को सही और दूसरों को गलत मानने वाली विचारधारा नहीं है। इस्लामिक आक्रांता की सोच इसके विपरीत दूसरों को गलत और अपने को सही मानने वाला थी। पूर्व में यही संघर्ष का मुख्य कारण था। अंग्रेजों की सोच भी ऐसी थी और उन्होंने 1857 के विद्रोह के पश्चात हिन्दू मुस्लिम के बीच विघटन को बढ़ावा दिया।

संघ प्रमुख ने ये भी बताया कि यह 2021का भारत है, 1947 का नहीं। एक बार विभाजन हो चुका है अब दुबारा नहीं होगा। जो ऐसा सोचते हैं, उनके खुद खंडित हो जाएंगे।

आज नोएडा के सेक्टर 12 स्थित भाऊ राव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर में जागृति प्रकाशन द्वारा प्रकाशित और कृष्णानंद सागर द्वारा रचित ग्रंथ “विभाजन कालीन भारत के साक्षी” का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भगवत द्वारा किया गया।

कृष्णानंद सागर ने बताया कि ग्रंथ लिखने कि प्रेरणा स्वतंत्रता से पहले और ठीक बाद धार्मिक उन्मादियों से देश की रक्षा करने वाले महान विभूतियों से मिली।

उन्होंने बताया कि उन्होंने ऐसे महानुभावों से साक्षात्कार लिया और उसी के अनुरूप अध्यायीकरण किया है।

कार्यक्रम के अध्यक्ष न्यायमूर्ति शम्भू नाथ श्रीवास्तव (पूर्व न्यायाधीश,प्रयाग उच्च न्यायालय) ने अभी तक हुए हिंदुओं के नरसंहार और उनके द्वारा किये प्रतिकार पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में हिन्दू अल्पसंख्यक हो चुके हैं।

कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि विद्या भारती के महामंत्री श्रीराम अरावकर ने बताया कि हमें इतिहास में हिंदुओं द्वारा किये गए संघर्ष से सीखने की आवश्यकता है। उन्होने कहा कि हमें इतिहास गलत पढ़ाया गया है।

कार्यक्रम के दूसरे विशिष्ट अतिथि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सचिव कुमार रत्नम ने बताया कि यह ग्रंथ भारतीय इतिहास को समझने के काम आएगा।

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