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एमिटी में भविष्य के युद्ध की तैयारी, रणनीति और योजना पर वर्चुअल सम्मेलन

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नोएडा, 12 मार्च।

एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज द्वारा शोधार्थियों को अनुसंधान को विकसित और उसमें गुणात्मक रूप से सुधार और शोधकर्ताओं के मध्य बौद्धिक संपर्क को प्रोत्साहित करने के लिए ‘‘ भविष्य के युद्ध के लिए तैयारी, रणनीति और योजना’’ विषय पर वर्चुअल सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का शुभारंभ सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज में सीओएएस चेयर ऑफ एक्सलेंस और भारतीय सेना के मेकेनाइस्जड फोर्स के पूर्व महानिदेशक लेफ्ट जनरल अशोक भीम शिवाने, एमिटी सांइस टेक्नोलेॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज के महानिदेशक लेफ्ट जनरल (डा) एस के गिडिऑक द्वारा किया गया। इस सम्मेलन में एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज के 07 पीएचडी स्कॉलरों ने भविष्य के युद्ध के विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किये।

इस सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज में सीओएएस चेयर ऑफ एक्सलेंस और भारतीय सेना के मेकेनाइस्जड फोर्स के पूर्व महानिदेशक लेफ्ट जनरल अशोक भीम शिवाने ने संबोधित करते हुए कहा कि समकालीन समय में वर्तमान विषय पर आयोजित यह सम्मेलन अतिमहत्वपूर्ण हैं। भविष्य के युद्ध और संर्घष में भूसामरिक, सामाजिक, सेना, राजनीति सभी शामिल होगे। आज देश ने आंतरिक और बाहरी दोनो स्तरो पर बेहतर संतुलन बनाया है। उन्होनें कहा कि हमारे पड़ोस में पाकिस्तान और चीन है जो हमारे भूमि क्षेत्र और परिवेश को प्रभावित करते है इसलिए सर्तकता, रणनीति, योजना और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हमें भविष्य के युद्ध को भारत में बने हथियारों और उपकरणों से लड़ने के लिए तैयार करना होगा और इस क्षेत्र में शोध नवाचार को बढ़ावा देना होगा। आपको 15 वर्षो के भविष्य को ध्यान में रख कर तैयारी करनी होगी। लेफ्ट जनरल अशोक भीम शिवाने ने कहा कि आपको क्षमता, साख और आंतरिक और बाहरी रणनितिक जनसंचार पर चर्चा करनी होगी। तकनीकी आज के युद्ध का अहम हिस्सा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेस, आईओटी आदि एकीकृत युद्धभूमी के लिए आवश्यक है इसलिए डोमेन आधारित तकनीकी को विकसित करना होगा। निश्चितता के लिए प्रशिक्षित करे और अनिश्चितता के लिए शिक्षित करें। आत्मनिर्भर भारत की दिशा में हम अपने लक्ष्यो को हासिल कर सके और भविष्य के युदध को जीतने के सेना को तैयार करना होगा।

एमिटी सांइस टेक्नोलेॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने कहा कि एमिटी ने सदैव देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बहुस्तर के क्षेत्र पर कार्य किया है। इस सम्मेलन के जरिये हम भविष्य के युद्ध और सेना के 15 से 20 वर्षो से आगे के परिदृश्य को देखने की कोशिश कर रहे है। रशिया और यूक्रेन के युद्ध के उदाहरण देते हुए कहा कि हमें अपने युदध के लिए स्वंय ही तैयार रहना होगा। तकनीकी, भविष्य के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी इसलिए हमें स्वदेशी तकनीक से निर्मित हथियारों को विकसित करने में शोध पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी। आज भारत आर्थिक क्षेत्र, सैन्य के क्षेत्र और ज्ञान के क्षेत्र पर महाशक्ती बन रहा है इसलिए हमें सिविल मिलिट्री फ्युजन को बढ़ावा देना होगा जिससे भविष्य के युदध में वर्दी वाले सेना और विना वर्दी की सेना दोनो का सहयोग प्राप्त हो।
एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज के महानिदेशक लेफ्ट जनरल (डा) एस के गिडिऑक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा किसी भी युद्ध में सैन्य रणनीती और सैन्य इंटेलिजेस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और वर्तमान में तकनीकी जैसे एआई आदि इन्हे और मजबूती प्रदान कर रही है। उन्होनें कहा कि एमिटी द्वारा आयोजित इस सम्मेलन का उददेश्य पीएचडी शोधार्थियों सहित सभी को भविष्य के युुदध की तैयारी, स्वदेशी तकनीकी और हथियार के महत्व की जानकारी प्रदान करना था।

इस वर्चुअल सेमिनार में एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज के पीएचडी स्कॉलर ब्रिगेड विक्रांत देशपांडे ने ‘‘हाईब्रिड कॉनफ्लिक्ट – आपरेशन इन ग्रे जोन’’ पर संबोधित करते हुए कहा कि यह सूचना प्रौद्योगिकी युग है इसलिए युद्ध भी सूचना आधारित होगें और सूचना प्रौद्योगिक, युदध का चरित्र है। हम इस संघर्ष के चरित्र को बेहतर ढंग से समझना होगा। पीएचडी स्कॉलर कैप्टन एस के शर्मा ने ‘‘भविष्य का युद्ध: पेशेवर शिक्षा को फिर से जांचने की जरूरत’’ पर, संबोधित करते हुए कहा कि आज कोई अदांजा नही लगा सकता कि कोई भी देश किस कारण से युद्ध छेड़ सकता है, पिछल सदी में तकनीकी मे काफी बदलाव हुए है। प्रोफेशनल मिलिट्री शिक्षण आज की आवश्यकता है। पीएचडी स्कॉलर कर्नल कौशिक रे ने ‘‘ अंतरिक्ष का शस्त्रीकरण और भारत पर इसका प्रभाव‘‘ पर संबोधित करते हुए कहा कि स्पेस में उपलब्ध ससांधनों का दोहन बढ़ा है और इसका उपयोग शस्त्रीकरण और भविष्य के युद्ध के लिए किया जा सकता है। पीएचडी स्कॉलर कर्नल साइकत बोस ने ‘‘संर्घष के स्पेक्ट्रम के लिए विश्वसनीय भूमि युद्ध प्रणाली विकसित करना’’ पर संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध और संघर्षो के लिए तकनीकी सहायता से विश्वसनीय भूमि युद्ध प्रणाली को विकसित करना ही होगा। कर्नल बिजु जैकब ने ‘‘ हथियार प्रौद्योगिकी में मजबूत स्वदेशी अनुसंधान और विकास’’ पर संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य के युदध के लिए स्वदेशी अनुसंधान और विकास के जरीए बने हथियारों और प्रौद्योगिकी का उपयोग आवश्यक होगा और इस शोध के लिए हम पर्यावरण को विकसित करना होगा।

इसके अतिरिक्त सम्मेलन में पीएचडी स्कॉलर, कनर्ल पियुष चंद्रा और कर्नल गौरव सोनी ने अपनी प्रस्तुती दी। इस अवसर एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ डिफेंस एंड स्ट्रैटजिक स्टडीज के कर्नल (डा) राजन बक्शी ने कार्यक्रम का संचालन और धन्यवाद ज्ञापित किया।

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