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ग्रेटर नोएडा वेस्ट की शत प्रतिशत सीवेज को साफ करेगा 80 एमएलडी का एसटीपी

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–ग्रेनो प्राधिकरण ने दी मंजूरी, टेंडर जल्द जारी करने की तैयारी
–पहले चरण में 20 एमएलडी क्षमता का प्लांट बनाने की योजना

ग्रेटर नोएडा, 23 नवम्बर।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बढ़ती आबादी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए प्राधिरकरण ने 80 एमएलडी क्षमता का एसटीपी बनाने का निर्णय लिया है। इसका टेंडर बहुत जल्द जारी करने की तैयारी है। पहले चरण में यह 20 एमलडी का बनेगा और बाद में जरूरत के हिसाब से विस्तार होता रहेगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में करीब 200 बिल्डर सोसाइटियां विकसित हो रही हैं। इनमें से 60 से अधिक सोसाइटियों में लोग रहने भी लगे हैं। गांव और सेक्टरों में रहने वाली आबादी इससे अलग है। आने वाले समय में यहां की आबादी तेजी से बढ़ेगी। अधिकांश बड़ी सोसाइटियों में खुद के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बने हुए हैं, लेकिन कुछ सोसाइटियों, सेक्टरों व गांवों की आबादी, शिक्षण संस्थानों और उद्योगों के सीवर को शोधित करने के लिए एसटीपी की दरकार है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण के निर्देश पर जल-सीवर विभाग ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लिए एक 80 एमएलडी क्षमता का एसटीपी प्रस्तावित किया, जिस पर सीईओ ने मंजूरी दे दी। इसकी कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसे बनाने का टेंडर बहुत जल्द जारी होने जा रहा है। इसे बनाने में करीब 60 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस एसटीपी को चरणबद्ध तरीके से चार चरणों में बनाने का निर्णय लिया गया है। इसका प्लान अभी से बना लिया गया है। पहले चरण में 20 एमलडी का एसटीपी बनेगा। उसके बाद जरूरत के हिसाब से विस्तार होता रहेगा। इससे दोहरा फायदा होगा। पहला, पूरा एसटीपी बनाकर एक साथ चालू करने में बिजली खर्च अधिक आता। चरणबद्ध तरीके से एसटीपी बनने से बिजली की बचत होगी। दूसरे, पूरा एसटीपी बनाने से रखरखाव का खर्च भी अधिक आता, अब उसकी भी बचत हो सकेगी। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेंद्र भूषण की मंशा है कि चुनावी अधिसूचना लागू होने से पहले इस एसटीपी की कागजी प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाए, ताकि इसका निर्माण समय से शुरू हो सके और समय से तैयार कर सीवर का ट्रीटमेंट शुरू किया जा सके। जल-सीवर विभाग इस प्रोजेक्ट का टेंडर शीघ्र निकालने के लिए प्रयासरत है। इस एसटीपी के बन जाने से कई फायदे होंगे। एसटीपी से शोधित पानी का इस्तेमाल पेड़-पौधों व पार्कों की सिंचाई में हो सकेगा। जहां भी निर्माण हो रहा है वहां इस पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे भूजल का उपयोग कम होगा। जहां एसटीपी नहीं है, वहां से सीवर इधर-उधर फेंकने के बजाय इस प्लांट से शोधित हो सकेगा। इससे जल प्रदूषण भी रुकेगा।
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इन चार प्लांटों से शोधित हो रहा सीवर
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ग्रेटर नोएडा में चार एसटीपी पहले से चल रहे हैं। कासना में 137 एमएलडी के एसटीपी से सीवर को शोधित किया जा रहा है। बादलपुर में दो एमएलडी क्षमता का एसटीपी सीवर को साफ कर रहा है। ईकोटेक टू में 15 एमएलडी व ईकोटेक थ्री में 20 एमएलडी सीवर को ट्रीट किया जा रहा है। इन एसटीपी से शोधित पानी का इस्तेमाल सिंचाई व निर्माण कार्यों में किया जा रहा है।

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