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एमएसएमई की मांग, औद्योगिक भूखंडों की बंदरबांट करने वाले अफसरों को जेल भेजे

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– कैग रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों को भेजा जाए जेल
-संपत्ति सीज कर वसूल किया जाए राजस्व

नोएडा, 30 दिसम्बर।

एमएसएमई गौतमबुद्धनगर के जिलाध्यक्ष सुरेंद्र नाहटा ने प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर कैग रिपोर्ट में दोषी अधिकारियों को जेल भेजने की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि बिल्डरों को भूखंड आवंटन करने में प्राधिकरण अधिकारियों ने नियमों की धज्जियां उड़ा दी है। वर्ष 2००5 से 2०18 तक बिल्डरों को जितने भी व्यवसायिक भूखंड का आवंटन किया गया है। वह सभी औद्योगिक संस्थागत गतिविधियों वाले भूखंडों की श्रेणी में शामिल थे। कैग रिपोर्ट ने लाजिक्स के दो भूखंड का हवाला देकर 2०० से अधिक व्यवसायिक भूखंड की संपत्तियों को स्पष्ट किया है कि यह सभी संपत्तियां औद्योगिक गतिविधियों के लिए थी, लेकिन व्यवसायिक भूखंड में इसका आवंटन किया गया।

1976 में नोएडा की स्थापना औद्योगिक विकास के लिए की गई। पूर्व के शासन कालों में औद्योगिक भूखंडों की बंदरबाट की गई। 3००० हजार करोड़ से ज्यादा की रकम का राजस्व नुकसान हुआ। करने वाले सरकारी नुमाइंदे ही थे लेकिन यह अब भी शासन प्रशासन की निगाहों से दूर है। कैग की रिपोर्ट में इनके नाम तक को खोल दिया फिर भी इनके खिलाफ कार्यवाही करने में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

— संस्था आग्रह करती है कि औद्योगिक जमीन का नुकसान कर उद्यम, रोजगार , राजस्व का प्रभावित करने वाले ऐसे अधिकारियों को जेल में डाला जाए साथ ही इनकी संपत्ति सीज कर राजस्व हानि की वसूली की जाए। संस्था यह भी मांग करती है कि जितने भी औद्योगिक भूखंडों पर व्यवसायिक गतिविधियां की जा रही है उनका आवंटन रद्य कर दोबारा से योजना निकाली जाए। जिसमे विस्तार के लिए उद्यमियों को भूखंड का आवंटन किया जाए।

— कारगुजारी यहा भी नहीं थमी तो तत्कालीन अधिकारियों ने बिल्डर को लाभ देने के लिए 4० फीसद लैंड प्रीमियम के रूप में अपफ्रंट मनी देने की बजाए 1० फीसद का नियम लागू कर दिया। इससे सरकार को 3०32 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ। जबकि उद्यमियों को न तो पहले कोई लाभ दिया गया और न अब वर्तमान में। संस्था मांग करती है कि उद्यमियों को प्रीमियम में राहत दी जाए ताकि वह निवेश को बढ़ावा दे सके।

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