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गौतमबुद्ध नगर जिले की राष्ट्रीय लोकअदालत में 58,652 मामले निपटाए गए, 34 करोड़ 38 लाख रुपए के समझौते हुए

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गौतमबुद्धनगर, 12 मार्च।

राष्ट्रीय लोक अदालत में 58652 वादों का निस्तारण किया गया। इस दौरान 34 करोड़ 38 लाख रुपये के समझौते हुए। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली व उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन मुख्यालय व तहसील स्तर पर माननीय जनपद न्यायाधीश गौतमबुद्धनगर श्री अशोक कुमार-सप्तम की अध्यक्षता एंव दिशा-निर्देशन में दिनांक 12 मार्च को जनपद गोैतमबुद्धनगर में किया गया। जिसमें न्यायालयों, राजस्व न्यायालयों आदि द्वारा कुल 58652/- वादों का निस्तारण किया गया। जनपद न्यायालय में कार्यरत न्यायिक अधिकारीगण द्वारा कुल 22988/- वाद तथा राजस्व न्यायालयों द्वारा कुल 11366 वाद, प्री-लिटिगेशन स्तर पर बैकं द्वारा 482, बी0एस0एन0एल0 द्वारा 27, एन0पी0सी0एल द्वारा 16, परिवहन विभाग द्वारा 13795 तथा यातायात विभाग द्वारा 9978 ई-चालान के मामलांें का निस्तारण किया गया।
सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्री जयहिंद कुमार सिंह द्वारा न्यायालयवार प्राप्त विवरण के अनुसार बताया गया कि जिला जज श्री अशोक कुमार-सप्तम द्वारा 06 वाद, पीठासीन अधिकारी वाणिज्य न्यायालय श्री आई0पी0एस0 जोश द्वारा 47 वाद व समझौता धनराशि रु0 4,16,60,936/-, पीठासीन अधिकारी मोटरयान दुर्घटना दावा अधिकरण श्री अशोक कुमार सिंह द्वारा 114 वाद व समझौता धनराशि रु0 6,61,82,929/-, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय श्री मंजीत सिंह श्योरान द्वारा 32 वाद, अपर जिला जज प्रथम वेद प्रकाश वर्मा द्वारा 08 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 5,01,510/-, विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी दिनेश सिंह द्वारा 06 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 4000/-, अपर जिला जज तृतीय पुष्पेन्द्र सिंह द्वारा 02 वाद, अपर जिला जज चतुर्थ ज्योत्सना सिंह द्वारा 702 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 68,70,612/-, अपर जिला जज/पोक्सो कोर्ट प्रथम निरंजन कुमार द्वारा 04 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 2000/-, अपर जिला जज पंचम मोना पवार द्वारा 02 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 4,69,489/-, अपर जिला जज/एफ0टी0सी प्रथम डा0 अनिल कुमार सिंह द्वारा 34 एन0डी0पी0एस0 वाद, अपर जिला जज/एफ0टी0सी द्वितीय राजीव कुमार वत्स द्वारा 01 वाद, प्रधान न्यायाधीश अतिरिक्त परिवार न्यायालय शैला द्वारा 34 वाद, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋचा उपाध्याय द्वारा 6041 वाद एंव जुर्माना धनराशि रु0 19,63,940/-, सिविल जज (वरिष्ठ संवर्ग) सुशील कुमार द्वारा 35 वाद व धनराशि रु0 13,29,83,832/- का उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी किया गया, ए0सी0जे0एम0 प्रथम डा0 सुरेश कुमार द्वारा 1894 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 2,30,510/-, ए0सी0जे0एम0 तृतीय विकास वर्मा द्वारा 1752 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 58,060/-, ए0सी0जे0एम0 द्वितीय प्रदीप कुमार कुशवाहा 3248 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 160370/-, सिविल जज (वरिष्ठ संवर्ग)/एफ0टी0सी अवधेश कुमार द्वारा 1703 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 34790/-, अपर सिविल जज (कनिष्ठ संवर्ग) प्रथम/वर्चुअल कोर्ट नितिका महाजन द्वारा 4662 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 30,36,500/-, सिविल जज (कनिष्ठ संवर्ग) जेवर निमिषा गुप्ता द्वारा 331 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 29,170/-, सिविल जज (कनिष्ठ संवर्ग)/एफ0टी0सी द्वितीय हर्षिका रस्तोगी द्वारा 2153 वाद व जुर्माना धनराशि रु0 1,20,630/-, अतिरिक्त न्यायालय संख्या 3 श्री विनोद कुमार अग्रवाल द्वारा 181 वाद व समझौता धनराशि रु0 2,97,82,646/- है।
उक्त के अतिरिक्त राष्ट्रीय लोक अदालत के अन्तर्गत जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर, अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी व तहसीलदार आदि समस्त विभागों से प्राप्त विवरण के अनुसार राजस्व के 11366 वाद निस्तारित हुये।
उपरोक्तानुसार राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 58652/- मामलों का निस्तारण हुआ, जिसमें कुल समझौता धनराशि रु0 34,38,96,893/-(चैंतिस करोड अडतीस लाख छयानवे हजार आठ सौ तिरानवे रु0) है।
उल्लेखनीय है कि परिवार न्यायालय गौतमबुद्वनगर के प्रधान न्यायाधीश श्री मंजीत सिंह श्यौरान द्वारा परिवाद संख्या 136/2019 अन्तर्गत धारा-125 दं0प्रं0सं0 स्वेता बनाम रुपेश उर्फ शंकर के मामलें में पक्षकारों के मध्य सुलह कराते हुये आपसी विवाद हमेशा के लिये समाप्त कर दिया गया। इसके अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश अतिरिक्त परिवार न्यायालय श्रीमती शैला द्वारा 02 वैवाहिक प्रकरण क्रमशः 39/2021 सचिन बनाम नेहा व वाद सं0 734/21 संदीप बनाम दीपिका तथा एक मूल वाद 1211/2019 नागेन्द्र बनाम सूगडा में पक्षकारों के मध्य सुलह कराया गया। उपर्युक्त सभी मामलों में समस्त पक्षकार राजी खुशी से एक साथ रहने के लिये तैयार हो गये तथा उनके मध्य लम्बित उपर्युक्त समस्त वाद इस लोक अदालत में अंतिम रुप से निस्तारित कर दिये गये। उपर्युक्त मामलों में पक्षकारांे के मध्य सुलह हेतु दोनो ही पीठासीन अधिकारी द्वारा संवेदनापूर्ण सुनवाई करते हुये पक्षकारों को एक साथ रहने के लिये प्रेरित किया गया, जिससे समस्त पक्षकारों के उपर्युक्त विवाद सुलझ गये।

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