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नोएडा : 46 वर्ष बाद भी शुद्ध पेयजल को क्यों तरस रहा शहर, कॉनरवा ने सीईओ को लिखी चिट्ठी

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नोएडा, 1 अगस्त।

कॉनरवा ने नोएडा प्रधिकरण की सीईओ को पत्र लिखकर कहा है कि नौएड़ा को स्थापित हुऐ 46 वर्षो से अधिक होने के बाद भी नौएड़ा प्राधिकरण पीने योग्य पानी की आपूर्ति करने में पुर्णतः सफल नहीं रहा है यदपि माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा लगभग 25 वर्ष पूर्व शतः प्रतिशत ट्रिटिड़ शुद्ध पेयजल आपूर्ति के निर्देश दिये गये थे परन्तु प्राधिकरण द्वारा इस सम्बंध में कोई ठोस कार्यवाही नही की गई है।

कॉनरवा के अध्यक्ष पी एस जैन और महासचिव ब्रिगेडियर अशोक हक ने अपने पत्र में कहा है कि प्राधिकरण के पास पर्याप्त संसाधन होने के उपरान्त भी ठोस कार्यवाही न करना प्राधिकरण की इस ओर ध्यान न देने की मानसिकता को दर्शाता है। जहॉ तक पॅूजी (धन राशी) का प्रश्न है वह प्राधिकरण के पास पर्याप्त है क्योकि प्राधिकरण के द्वारा दूसरे अन्य विभागो को कई हजार करोड़ रूपये उधार दिए जाते रहे है तथा अन्य बाहरी योजनाओ में भी हजारों  करोड़ रूपये इनवेस्ट कर रखे है।

कॉनरवा ने कहा है कि शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नागरिकां का मौलिक अधिकार है तथा प्राधिकरण की नैतिक जिम्मेदारी है। यदि प्राधिकरण द्वारा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कर ली जाती है तो लाखों लीटर पानी की बरबादी को भी रोका जा सकता है। जैसे शुद्ध पेयजल की आपूर्ति न होने के कारण लाखों घरों एवमं संस्थानों में RO का प्रयोग से 70 से 90 प्रतिशत तक पानी वेस्ट होता है। जिसका कोई उपयोग नही होता है। गंगा जल में रेनी वेल के पानी को मिक्स करने से गंगा जल भी दूषित हो जाता है अथवा गंगा जल पीने योग्य नही रहता है। अतः उसे भी रि-ट्रिटिड़ कर के ही पिया जा सकता है। इस प्रकार गंगा वाटर की भी बरबादी हो रही है।

प्राधिकरण के अधिकांश रेनी वेल/टयूबवैल से भी उपल्बध कराया जात है। जिनसे टिनटिड़ पानी निकल रहा है उन सभी रिजर्व वायर पर पर्याप्त स्तर का वाटर ट्रीटमेन्ट प्लान्ट लगाया जाना चाहिए तथा ट़यूबवेल पर भी आवश्यकतानुसार ट्रीटमेन्ट प्लान्ट लगाया जाना चाहिए। जिसकी समय समय पर उच्च अधिकारियों की निगरानी में प्रतिश्ठित तकनीकी संस्थाओ द्वारा जॉंच की जानी चाहिए। जिससे शहर के नागरिकां को शत प्रतिशत शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हो सके। इस प्रकार के ट्रीटमेन्ट प्लान्टों में बहुत अधिक धन राशि भी नही लगेगी तथा गंगा जल का भी सदोपयोग हो सकेगा तथा पानी की वेस्टेज पर भी नियंत्रण हो सकेगा।

गंगा वाटर की सप्लाई गंग नहर से बन्द होने के कारण प्रत्यके वर्ष में दो बार होती है तथा उस अवधि में जो पानी सप्लाई किया जाता है। वह पानी रा वाटर होता है तथा पीने योग्य नही होता है। अतः संस्था द्वारा पूर्व में भी सुझाव दिया गया था कि रिर्जव वायर में जो पानी टयूबवैल व रैनी वेल का पानी होता है जो गंदा भी होता है तथा उस पर छोटे छोटे ट्रिटमेन्ट प्लान्ट लगा लिये जाये, जिससे ट्रिटिड वाटर ही गंगा वाटर में मिलाया जाऐगा। जिससे गंगा वाटर की गुणवत्ता भी खराब नही होगी तथा गंगा वाटर की सप्लाई ना होने पर भी शहरवासीयो को साफ पानी पीने के लिए मिल सकेगा। जो वर्तमान में सप्लाई किये जा रहे पानी से निश्चित ही अच्छा होगा।

रिजर्व टैंक एवम् टंकी की प्रत्येक महीने सफाई की जानी चाहिए जो नही की जा रही है। उससे भी पानी की आपूर्ति में मिट्टी व मड़ का कमी आना निश्चित है।

सैक्टरो में पाईप लाईन के फैलेशिंग पोईन्ट की सूची बना कर व रोस्टर बनाया जाऐ जिसकी सूची आर0डब्लू0ए0 को भी दी जाऐ तथा प्रत्येक सप्ताह आर0डब्लू0ए0 के अधिकारीयो की जानकारी में फैलेशिंग की जाऐ। जिससे पानी में आने वाली मड़ व गन्दगी में कमी आऐगी, पाईप लाईनो में जमने वाले मड़ में भी कमी आऐगी। जिससे पाईप लाईन में पानी अधिक होगा जिससे पानी का प्रेसर भी बढ़ने की सभावना है। इस पानी का प्रयोग पार्को व ग्रीन बैल्ट में किया जा सकता है।

पानी की मात्रा को बढ़ाने के लिए

पानी की उपल्बधता बढ़ाने के लिए रेनीवेल व टयूबवेल के पाईप में नीचे लगे फिल्टरो पर लगी फिल्टर जाली की सफाई कर फिल्टर के ऊपर जाली बदल दी जाऐ जिससे रेनीवेल व टयूबवेल से पानी की उपल्बधता अधिक होगी जिससे गंगा वाटर की स्पलाई न होने पर वहॉं से अधिक पानी लिया जा सकेगा तथा रिजर्व टैंक भर कर टंकी के माध्यम से स्पलाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

पानी की लिकेज को तथा अन-ओथोराईज कनेक्सन को जैसे मार्किट में व अन्य सार्वजनिक स्थल पर जहॉ पर पानी हर समय बहता रहता है। उन पर नियंत्रण किया जाऐ। तथा लिकेज को अविल्मब बन्द किया जाना चाहिए। पानी काफी बहने के बाद कार्यवाही कई बार सुचना के उपरान्त की जाती है।

बड़ा ही विचारणीय विषय है कि जहॉ मात्र कुछ करोडों रूपये से शहर को शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकती है उस ओर कोई ठोस नीती नहीं बनाई जा रही है। अपितु प्राधिकरण के द्वारा दूसरे अन्य विभागां को कई हजार करोड़ रूपये उधार दिए गए है तथा अन्य बाहरी योजनाओं में भी हजारां करोड़ रूपये इनवेस्ट किया जा रहा है तथा शुद्ध पेयजल आपूर्ति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है तथा पानी की बरबादी हो रही है।
पीएस जैन और ब्रिगेडियर अशोक हक ने कहा है कि इस सम्बंध में अविलम्ब ठोस नीति बनाकर शीघ्र लागू की जाऐ। यदि इस सम्बंध में आवश्यक हो तो संस्था भी आपको सहयोग करने के लिए तत्पर है। हमें आशा ही नही पूर्ण विश्वास है कि अब 46 वर्षो के बाद ही सही जनहित में इस विशय पर आपके द्वारा अविलम्ब कार्यवाही की जाएगी।

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