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नई दिल्ली, 20 फरवरी।

यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव राजनीति की प्रयोगशाला बनने जा रही है। इसमे दिग्गजों की आने वाली दिशा तय होगी। चुनाव परिणाम के बाद ही 2024 के चुनावों की भूमिका बनने लगेगी और जुलाई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष को एक प्लेटफॉर्म बनाने में मदद मिलेगी।

क्षेत्रीय दलों की ताकत का इम्तिहान

उत्तर प्रदेश के चुनाव में वर्ष 1991 के बाद क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़ती चली गई। कभी समाजवादी पार्टी तो कभी बसपा का शासन रहा। जनता ने राष्ट्रीय दल कांग्रेस और बीजेपी किनारे कर दिया। वर्ष 2017 में बीजेपी ने सपा और बसपा के वर्चस्व को चुनौती देते हुए उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई उसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी 60 से अधिक सीटें जीती इस दृष्टि से 2022 का चुनाव इसलिए अहमियत रखता है क्या बीजेपी अपना वर्चस्व बनाए रखेगी या उत्तर प्रदेश में फिर से क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ेगा। यही नहीं 2007 के बाद से हर पार्टी पूर्ण बहुमत में आती रही है इस बार यह भी तय होगा कि सरकार बनाने वालों दल पूर्ण बहुमत में होगा या चुनाव के बाद उसे फिर से गठबंधन करना पड़ेगा

जयंत चौधरी की पहली परीक्षा

राष्ट्रीय लोकदल लगभग समाप्ति के कगार पर था 2022 का चुनाव यह तय करेगा कि राष्ट्रीय लोक दल का अस्तित्व और जड़े कितनी मजबूत है यह पहला चुनाव है जब जयंत चौधरी अपने पिता अजीत सिंह के बिना चुनाव लड़ रहे हैं समाजवादी पार्टी के साथ उनका गठबंधन का फैसला कितना सही है या गलत यह भी उनके राजनीतिक कद के हिसाब से महत्वपूर्ण होगा चुनाव के बाद उनकी क्या भूमिका रहेगी क्या वे उप मुख्यमंत्री बन सकेंगे या बदली परिस्थिति में वह बीजेपी का साथ देंगे

अखिलेश की रणनीति कितनी कारगर ?

मुलायम सिंह यादव के उत्तराधिकारी के रूप में अखिलेश यादव ने 2012 से 2017 तक यूपी के मुख्यमंत्री बंद कर अपना राजनीतिक कद बढ़ाया 2022 का चुनाव यह तय करेगा की अखिलेश यादव की रणनीति कितनी कारगर रही छोटे दलों से गठबंधन करना कितना फायदेमंद रहा यूपी की राजनीति में वापस लौट कर राष्ट्रीय राजनीति में जाने का अवसर इस चुनाव के बाद अखिलेश यादव को मिलेगा क्या वह भी योगी की तरह दो उप मुख्यमंत्री बनाएंगे ओमप्रकाश राजभर कितने विश्वसनीय रहेंगे।

योगी की वापसी की राह कितनी कठिन ?

योगी आदित्यनाथ के 5 साल के मुख्यमंत्री कार्यकाल में बीजेपी मजबूत हुई है या कमजोर यह 2022 के चुनाव में पता चलेगा बीजेपी के रथ को रोकने के लिए पश्चिम उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी पार्टी के अपने कई नेता भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं इनमें सांसद वरुण गांधी पीलीभीत क्षेत्र में सुरेंद्र सिंह बलिया क्षेत्र में और बीजेपी के पूर्व सहयोगी दल सुभासपा के अध्यक्ष ओपी राजभर के सपा गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं इसी तरीके से अपना दल की अनुप्रिया पटेल और उनकी मां का अपना दल एस एक दूसरे के विपरीत चुनाव लड़ रहे हैं इसके साथ साथ कोरोना काल में सरकारी मशीन द्वारा किया गया कार्य, महंगाई, कोरोना के दौरान हुई मौत के बाद मुआवजा, बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण फैक्टर काम करेंगे जातीय राजनीति का प्रभाव कितना असरदार होगा हिंदू मुस्लिम का फैक्टर कितना कारगर होगा यह सब कुछ 2022 के चुनाव में निकल कर आएगा।

एक्सप्रेस निर्माण की रफ्तार से बीजेपी की वापसी

जनता का आकलन यह भी है जिस तरीके से उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस वे के निर्माण हुए हैं उससे जनता के बीच में भरोसा गया है के जनता के लिए सरकार कार्य कर रही है और उनके आने जाने के साधन जितने आसान हुए हैं उससे योगी सरकार के प्रति भरोसा बढ़ा है विकास कार्यों के जरिए बीजेपी अपना वोट बैंक बढ़ने का दावा कर रही है इसी तरीके से अयोध्या और काशी की विकास की जिस तरीके से योजनाओं को बढ़ाया जा रहा है उसका असर उत्तर प्रदेश चुनाव के साथ-साथ 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दिखाई देगा एयरपोर्ट और हर जिले में मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना भी वोटर को प्रभावित कर रही है।

 

प्रियंका गांधी की परख और आप की जड़ें कितनी

ऐसा पहली बार हो रहा है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस तीन दशकों के बाद सबसे ज्यादा सीटों पर विधानसभा का चुनाव लड़ रही है और वह भी गांधी परिवार की महत्वपूर्ण सदस्य प्रियंका गांधी की नेतृत्व में एक बात और प्रियंका गांधी ने पहली बार 40%  महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारा है यह प्रयोग कांग्रेस की उत्तर प्रदेश में जड़ों को मजबूत कर पाएगा यह महत्वपूर्ण है लेकिन यह तय है कि 2024 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की भूमिका बढ़ेगी यही आकलन करने के लिए प्रियंका गांधी ने सभी विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं उन्होंने संकेत भी दिया है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन के साथ या अलग चुनाव लड़ सकती है वही आम आदमी पार्टी के लिए भी यह चुनाव 2024 की जमीन मजबूत करने का एक आधार होगा।

राष्ट्रपति के चुनाव में भी होगी महत्व पूर्ण भूमिका

यूपी चुनाव के बाद जुलाई 2022 में देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव होगा चुनाव परिणाम के बाद बीजेपी मजबूत होगी या कमजोर विपक्ष मजबूत होगा या कमजोर क्या विपक्ष एक प्लेटफार्म पर आकर राष्ट्रपति बनाने की हैसियत रखेगा यह महत्वपूर्ण होगा उत्तर प्रदेश में जनता दल यू बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रहा है तो क्या यूपी चुनाव के बाद नीतीश कुमार बीजेपी का साथ छोड़ सकते हैं विपक्षी गठबंधन को एकजुट करने के लिए किसी चंद्रशेखर राव ममता बनर्जी शरद पवार नवीन पटनायक अरविंद केजरीवाल विपक्षी पार्टियां विकल्प बनने की तैयारी करेंगी वह चाहेंगे कि कांग्रेस उनके पीछे रहे 2024 में वह थर्ड फ्रंट के रूप में बीजेपी के सामने निखर कराएं यह राजनीति का बदलाव आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।

(Noidakhabar.com के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा की विशेष रिपोर्ट )

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