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जीएसटी में हुए बदलाव पर 26 जुलाई को कैट भोपाल में करेगा समीक्षा, राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की तैयारी

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– भारत मे आजादी के बाद ऐसा पहली बार है, जब बिना ब्रांड वाले खाद्य पदार्थों को जीएसटी के तहत लाया गया है सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर इसे बापिस ले।

-कैट 26 जुलाई से जीएसटी की समीक्षा करने के लिए एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन भोपाल से शुरू करेगा

नोएडा, 19 जुलाई।

आज 18 जुलाई से आम गरीब आदमी के उपयोग में आने वाले नॉन ब्रांडेड उत्पादों जेसे आटा चावल, दूध दही जैसी वस्तुओ पर टैक्स लगाया जा रहा है, इस संवध मे श्री सुशील कुमार जैन ने कहा कि सरकार ने 25 किलो या 25 लीटर से ज्यादा की बिना ब्रांड अथवा बिना लेवल की पेकिंग मे खाध्य पदार्थो पर जी एस टी नही लगेगा ऐसा स्पस्टीकरण देकर खाध्य पदार्थो के होलसेलर्स को कुछ राहत दी है किन्तु 25 किलो से कम की पैक्ड खाध्य पदार्थो पर जी एस टी लागू करके गरीबो के साथ अन्याय किया है। जैसा कि हम जानते है कि गरीबो की जेब पर यह वोझ बास्तव मे असहनीय होगा क्यूंकि इससे महंगाई बड़ेगी ।

कंफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स यानि कैट 26 जुलाई से जी एस टी के नियम कानूनों एवं करों की दरो की विसंगतियो को लेकर एक राष्ट्रीय आंदोलन की शुरूआत भोपाल से करेगा।
कैट की मांग है जी एस टी को लगे पाॅच वर्ष हो गये है किंतु पाॅच वर्षो मे लगभग 1146 के आस पास संशोधन हो चुके है। जो अपने आप मे इस बात का परिचायक है कि जी एस को सरल करना आवश्यकहो गया है। जिस कानून मे इतने संशोधन हो चुके है वो अपने आप मे इतना जटिल हो चुका है कि उसको पूर्ण समीक्षा के बाद दोबारा से सरल करके लाना आवश्यक है। इस कानून की जटिलतायो से व्यापारियो की प्रताणना होती है अतः जिला स्तर पर व्यापारिक संगठनो को कमेटी बनाकर सुझाव लेकर , सरकार एक सरल जी एस टी कानून लाकर, व्यापारियो के साथ न्याय करे।
आजादी के बाद ऐसा पहली बार है, जब बिना ब्रांड वाले खाद्य पदार्थों को जीएसटी के तहत लाया जा रहा है
सुशील कुमार जैन ने कहा कि लोग ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं कि मामला क्या है। दरअसल अभी तक खाद्यान्न में दो श्रेणियां थीं, ब्रांडेड और नॉन ब्रांडेड। पैकेट बंद ब्रांडेड खाद्यान्न जैसे आटा, मैदा, सूजी, दाल, चावल, गेहूं, पनीर, शहद आदि पर पांच फीसदी जीएसटी देय था। अब इस कड़ी में बदलाव हुआ है। अब नॉन ब्रांडेड पर भी जीएसटी लगेगा।
ब्रांडेड का अर्थ था कि जिस नाम का लेबल लगा है , वह ट्रेडमार्क में रजिस्टर्ड है। लेकिन अब रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है । यदि कोई खाद्यान्न पेकिंग में है , और उस पर किसी भी तरह की पहचान का लेबल है , तो उस पर सीधे पांच फीसदी जीएसटी देय होगा। अभी तक केवल पंजीकृत ब्रांडों पर ही 5% जीएसटी लगता था । अब सब पर जीएसटी लगेगा।

सुशील कुमार जैन ने कहा अब नये नियम में प्रयोग किए गए शब्द, प्री पैकेज्ड एवं लेबल्ड को लीगल मैट्रोलॉजी कानून की धारा दो के अनुसार माना जाएगा।
इसमें प्री पैकेज्ड वह है, जिसमें पैकेज सील्ड हो या अनसील्ड, दोनों ही प्री पैकेज्ड माने जाएंगे, यदि वह निर्धारित मात्रा में पैक किए गए हों।
यहां लेबल्ड का अर्थ है किसी पैकेज पर लिखित, अंकित, स्टांप, प्रिंटेड या ग्राफिक मार्का लगा हो। खास बात यह है कि जीएसटी परिषद की घोषणा में पैकिंग के साथ रिटेल शब्द जोड़ा गया था। जबकि हाल के नोटिफिकेशन में लीगल मैट्रोलॉजी नियमावली पर जोर दिया गया है। इसके नियम छह एवं 24 में रिटेल व होलसेल दोनों प्रकार के पैकेज पर लेबल लगाने (स्व घोषणा) की अनिवार्यता है।
व्यापारियों में यह भी भ्रांति फैली है , कि केवल 25 किलोग्राम से कम की पैकिंग में खाद्य सामग्री के विक्रय पर ही जीएसटी लगेगा, परंतु जीएसटी अधिनियम के अंतर्गत जारी नोटिफिकेशन से यह स्पष्ट है, की सभी प्रकार के पैकेज्ड एवं लेबल्ड खाद्य सामग्रियों पर 5 प्रतिशत की दर से जीएसटी 18 जुलाई 2022 से लागू हो गया है। अधिसूचना में जिस शब्दावली का उपयोग किया है, उसमें प्री-पैकेज्ड एवं लेबल्ड शब्द ही दिए गए हैं,ऐसे में इंडस्ट्रियल व इंस्टिट्यूशनल सप्लाय को छोड़कर अन्य सभी ग्राहकों को किसी भी वजन की पैकिंग में बेचे गए, प्री-पैकेज्ड एवं लेबल्ड फूड ग्रेन्स पर अब 5% की दर से जीएसटी लागू होगा।
यानि कोई भी खाद्य उत्पाद जो किसी भी फूड प्रोसेसिंग यूनिट, फैक्ट्री, फ्लोर मिल में प्रोसेस हुआ हो उस पर जीएसटी देय होगा।

खुले रूप में बिकने वाले पनीर, शहद, दही, लस्सी, बटर मिल्क, सूखे दाल-दलहन, सूखी अदरक, केसर, सूखी हल्दी, अजवाइन, कड़ीपत्ता व अन्य मसाले, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, रागी व सभी प्रकार के अनाज, राई, जौ, चावल, जई (ओटस), कुटू, मिलेट, केनरी बीज, धान्य आटा, मक्का आटा, राई आटा, सूजी, दलिया, आलू का आटा, सभी प्रकार का गुड़, फूला हुआ चावल ,अब जीएसटी के दायरे में आ गए हैं।
इससे महंगाई और भी बढ़ना तय है।
अतः सरकार इस सभी बिंदुयो पर पुनर्विचार करके ऐसे निर्णयो को बापिस ले। एवं जी एस टी की पूर्ण समीक्षा कर एक सरल जीएसटी लागू करे।

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