भारतीय दूरदर्शन की प्रमुख और सबसे लोकप्रिय समाचार वाचिकाओं में से एक सरला माहेश्वरी का गुरुवार को निधन हो गया। वे 71 वर्ष की थीं। उनके निधन से टीवी पत्रकारिता के स्वर्णिम युग की एक महत्वपूर्ण कड़ी टूट गई है।
दूरदर्शन नेशनल ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “सौम्य आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमामयी प्रस्तुति” के लिए याद किया है। परिवार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर होगा।
सरला माहेश्वरी की जीवनी एवं योगदान
सरला माहेश्वरी ने 1976 में दूरदर्शन के साथ अपना करियर शुरू किया था। हालांकि, उन्होंने न्यूज रीडिंग का कार्य मुख्य रूप से 1982 से शुरू किया और 2005 तक लगातार दूरदर्शन पर हिंदी समाचार बुलेटिन प्रस्तुत किए। 1980 और 1990 के दशक में जब दूरदर्शन देश का एकमात्र प्रमुख समाचार स्रोत था, सरला माहेश्वरी की आवाज और चेहरा लाखों भारतीय घरों में रोजाना पहुंचता था।उनकी खासियतें:
शुद्ध हिंदी उच्चारण और सटीकता
शांत, संयमित और गरिमामयी प्रस्तुति शैली
सादगी भरा पहनावा (साड़ी, बिंदी और सीधा पल्लू) जो महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय रहा
उन्होंने 1982 एशियाड खेलों के दौरान भारत के पहले रंगीन प्रसारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी
1984 से 1986 तक वे बीबीसी इंग्लैंड में भी कार्यरत रहीं, जहां उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई। वापसी के बाद उन्होंने दूरदर्शन में फिर से न्यूज रीडिंग जारी रखी।सरला माहेश्वरी की आवाज और शैली ने दूरदर्शन को एक विश्वसनीय और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध माध्यम बनाने में अहम योगदान दिया। कई लोग उन्हें “टीवी पत्रकारिता के गोल्डन एरा” का प्रतीक मानते हैं। उनके सहकर्मी और पूर्व सह-एंकर शम्मी नारंग ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्हें “शालीनता, गरिमा और भाषाई उत्कृष्टता” का प्रतीक बताया।उनके निधन पर सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि की लहर दौड़ गई है।
कई यूजर्स ने कहा कि “इनकी आवाज में हमारी पीढ़ी बड़ी हुई”। दूरदर्शन परिवार और मीडिया जगत में शोक की लहर है।सरला माहेश्वरी के पति पवन माहेश्वरी (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट) और परिवार के सदस्य उन्हें याद कर रहे हैं। नोएडा खबर डॉट कॉम की तरफ से विनम्र श्रद्धांजलि