ग्रेटर नोएडा (नोएडा खबर डॉट कॉम)
ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख पुलिस ने रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों को ठगने वाले एक शातिर गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। पुलिस ने तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया और उनके पास से फर्जी ज्वाइनिंग लेटर, नकली दस्तावेज, रबर स्टैंप और ठगी के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण जब्त किए हैं।
एडीसीपी सेंट्रल नोएडा आर.के. गौतम ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि थाना बिसरख पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गिरोह को पकड़ा है। ये लोग बेरोजगार युवकों को रेलवे में आसान नौकरी का लालच देकर लाखों रुपये ऐंठते थे। जांच में पता चला कि गिरोह ने फर्जी दस्तावेज बनाकर लोगों को धोखा दिया। हमने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनके कब्जे से पूरा ठगी का सामान बरामद हुआ है। यह कार्रवाई लोगों को सतर्क करने और ऐसे फ्रॉड से बचाने के लिए महत्वपूर्ण है। हम लोगों से अपील करते हैं कि सरकारी नौकरी के नाम पर कभी कोई पैसे न दें, क्योंकि असली भर्ती में कोई फीस नहीं ली जाती।
“ठगी का तरीका
गिरोह के सदस्य बेरोजगारों को फोन या सोशल मीडिया पर संपर्क करते थे। वे कहते थे कि उनके रेलवे में ‘अंदरूनी लोग’ हैं, जो ग्रुप डी, टिकट कलेक्टर या अन्य पदों पर नौकरी आसानी से लगा सकते हैं। बदले में प्रोसेसिंग फीस, मेडिकल चार्जेस आदि के नाम पर पैसे मांगते थे। एक पीड़ित से मुख्य आरोपी अश्वनी सारस्वत और पवन चौधरी ने करीब 8 लाख रुपये ले लिए और उसे एक फर्जी ज्वाइनिंग लेटर थमा दिया। जब पीड़ित नौकरी जॉइन करने पहुंचा तो सब फर्जी निकला। पीड़ित ने थाना बिसरख में शिकायत की, जिस पर मु0अ0सं0 103/2026 (धारा 318(4)/352/351(3) बीएनएस) दर्ज हुआ।
पुलिस ने कैसे पकड़ा?
11 फरवरी 2026 को पुलिस ने मुखबिर की सूचना और जांच के आधार पर रेलवे फाटक चिपियाना बुजुर्ग के पास से अश्वनी सारस्वत (46 वर्ष, जयपुरिया सोसायटी, क्रासिंग रिपब्लिक, गाजियाबाद) और पवन चौधरी (30 वर्ष, ग्राम रुहनला, आस्था सिटी, सिकंदरा, आगरा) को गिरफ्तार किया। दोनों की निशानदेही पर उनका साथी आकिल उर्फ अयान (31 वर्ष, ग्राम नहाल, थाना मसूरी, गाजियाबाद) को शाहबेरी से पकड़ा गया।बरामदगी 8 फर्जी ज्वाइनिंग लेटर
4 फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र
15 फर्जी टिकट आईडी कार्ड
3 फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट
कई फर्जी नोटिस, इनडेमनिटी बॉन्ड, डिपार्टमेंटल मीमो
3 फर्जी रेलवे रबर स्टैंप
4 फर्जी आधार कार्ड
कंप्यूटर, प्रिंटर, CPU, LED मॉनिटर
2 एंड्रॉयड मोबाइल, 1 एप्पल फोन
एक स्कूटी (बिना नंबर प्लेट)
पुलिस का कहना है कि गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और कई लोगों को ठग चुका है। जांच जारी है, और और भी आरोपी पकड़े जा सकते हैं। लोगों से सलाह है कि सरकारी नौकरी के लिए आधिकारिक वेबसाइट या नोटिफिकेशन चेक करें और पैसे देने से पहले पुलिस या संबंधित विभाग से सत्यापन कराएं।
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