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योगी सरकार ने झांसी के 33 गांवों को मिलाकर नोएडा की तर्ज पर नया औद्योगिक क्षेत्र “बीड़ा” के गठन का फैसला किया

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लखनऊ: 12 सितम्बर।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाने के साथ ही मंगलवार को बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के गठन हेतु अधिसूचना आलेख अनुमोदित
मंत्रिपरिषद ने जनपद झांसी के 33 ग्रामों को सम्मिलित करते हुए बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के गठन हेतु प्रस्तुत अधिसूचना के आलेख को अनुमोदित कर दिया है।

उत्तर प्रदेश में इसके पूर्व वर्ष 1976 में एक नए शहर नोएडा के गठन का निर्णय लिया गया था। 47 वर्षों के बाद एक नए शहर की स्थापना का निर्णय लिया गया है। इस ऐतिहासिक निर्णय से बुन्देलखण्ड के बहुआयामी विकास को तेज गति मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022-23 के अनुपूरक बजट में नई मांग के रूप में प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण/नए औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना’ का शुभारम्भ मुख्यमंत्री जी द्वारा किया गया। इसके अन्तर्गत बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण के गठन के लिए 5,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अन्तर्गत झांसी में बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा नोएडा की तर्ज पर एक नई इण्डस्ट्रियल टाउनशिप विकसित किए जाने का लक्ष्य है।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में मुख्य मंत्री औद्योगिक क्षेत्र विस्तारीकरण/नये औद्योगिक क्षेत्र प्रोत्साहन योजना मद के अन्तर्गत ऋण के रूप में 5000 करोड़ रुपये का प्राविधान किया गया है।
प्रस्तावित नए इण्डस्ट्रियल टाउनशिप उद्योगों के साथ-साथ शैक्षणिक संस्थाओं, अन्य सेक्टर से सम्बन्धित संस्थाओं के विकास, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों एवं आवासीय परिसर के निर्माण को बढ़ावा देगा। प्रस्तावित नए शहर में विश्व स्तरीय नियोजन व उसके अनुसार अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए कार्य किया जाएगा। बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण झांसी के अलावा बुन्देलखण्ड के अन्य जनपदों में भी सेटेलाईट औद्योगिक क्षेत्र के विकास में सहायक होगा।
बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण में पहले चरण में झांसी-ग्वालियर रोड एवं झांसी-बबीना-ललितपुर रोड के मध्य पड़ने वाले 33 राजस्व ग्रामों की भूमि अधिग्रहीत कर स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इन 33 ग्रामों में कुल लगभग 35,000 एकड़ भूमि उपलब्ध है, जिसमें लगभग 8,000 एकड़ भूमि ग्राम समाज की है। ग्राम समाज की भूमि रिज्यूम कर निःशुल्क बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण को उपलब्ध करायी जाएगी एवं कृषकों की निजी भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा।
जिलाधिकारी, झांसी द्वारा अपने 28 जुलाई, 2023 के पत्र द्वारा 33 ग्रामों की सूची भूमि के रकबा वार उपलब्ध करायी गई है। जिलाधिकारी झांसी द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रस्ताव के अनुसार समस्त ग्रामों की प्राइवेट भूमि का सर्किल रेट का 4 गुना एवं परिसम्पत्तियों का अनुमानित मूल्यांकन लगभग 6,312 करोड़ रुपये है।
बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण का मुख्यालय झांसी में होगा। झांसी वह स्थान है, जहाँ ईस्ट-वेस्ट, नार्थ-साउथ स्वर्णिम चतुर्भुज कॉरीडोर का जंक्शन है और यह प्रदेश को देश के दक्षिणी हिस्से से कनेक्ट करने का भी एक रास्ता है। बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण की प्लानिंग एक अन्तरराष्ट्रीय स्तर के इण्डस्ट्रियल टाउनशिप के विकास को लक्षित कर बनायी जाएगी। एक एयरपोर्ट का निर्माण भी इसी क्षेत्र में प्रस्तावित है।
बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण गठित होने पर क्षेत्र का सर्वांगीण विकास होगा तथा रोजगार का सृजन होगा तथा जन सामान्य को क्षेत्रीय विकास के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे, जिससे जन सामान्य को प्रत्यक्ष लाभ होगा।

खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत धान क्रय नीति अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में मूल्य समर्थन योजना के अन्तर्गत धान क्रय नीति को अनुमोदित कर दिया है।
कामन धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2183 रुपये प्रति कुन्तल तथा ग्रेड-ए धान का समर्थन मूल्य 2203 रुपये प्रति कुन्तल निर्धारित है, जिसमें 143 प्रति कु0 की दर से 7 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है।
खाद्य विभाग, पी0सी0एफ0, पी0सी0यू0, मण्डी परिषद, यू0पी0एस0एस0 एवं भारतीय खाद्य निगम, कुल 06 क्रय एजेन्सियों तथा 4,000 क्रय केन्द्रों के माध्यम से 70 लाख मीट्रिक टन धान क्रय का प्रस्तावित अनन्तिम लक्ष्य रखा गया है। सभी क्रय एजेन्सियों द्वारा धान के मूल्य का भुगतान भारत सरकार के पी0एफ0एम0एस0 पोर्टल के माध्यम से धान क्रय के 48 घण्टे के अन्दर किया जायेगा।
खाद्य विभाग की विपणन शाखा द्वारा 1350, उत्तर प्रदेश सहकारी संघ (पी0सी0एफ0) द्वारा 1600, उत्तर प्रदेश कोआॅपरेटिव यूनियन लिमिटेड (पी0सी0यू0) द्वारा 550, उ0प्र0 उपभोक्ता सहकारी संघ (यू0पी0एस0एस0) द्वारा 200, उत्तर प्रदेश राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद द्वारा 100 तथा भारतीय खाद्य निगम द्वारा 200 क्रय केन्द्र स्थापित किये जाएंगे।
खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में लखनऊ सम्भाग के जनपद हरदोई, लखीमपुर-खीरी, सीतापुर तथा सम्भाग बरेली, मुरादाबाद, मेरठ, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, झांसी में धान क्रय की अवधि 01 अक्टूबर, 2023 से 31 जनवरी, 2024 तक तथा लखनऊ सम्भाग के जनपद लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, व सम्भाग चित्रकूट, कानपुर, अयोध्या, देवीपाटन, बस्ती, गोरखपुर, आजमगढ़, वाराणसी, मिर्जापुर एवं प्रयागराज में 01 नवम्बर, 2023 से 29 फरवरी, 2024 तक होगी।
धान विक्रय से पूर्व कृषक पंजीयन तथा समस्त क्रय एजेन्सियों पर ऑनलाइन धान क्रय की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है। खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में इलेक्ट्राॅनिक प्वाइंट ऑफ परचेज मशीन के माध्यम से कृषकों के बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण द्वारा क्रय केन्द्रों पर धान की खरीद की जायेगी।
धान खरीद वर्ष 2023-24 के अन्तर्गत कृषक हित के दृष्टिगत हाइब्रिड धान विक्रय हेतु कृषक का घोषणा पत्र अथवा हाइब्रिड बीज खरीद प्रमाण पत्र में से एक ही प्रपत्र लिये जाने की व्यवस्था की गयी है। कृषकों से धान खरीद कम्प्यूटराइज्ड सत्यापित खतौनी तथा आधार कार्ड के आधार पर की जायेगी। रेवेन्यू रिकाॅर्ड के माध्यम से कृषकों द्वारा बोए गए रकबे का सत्यापन।
क्रय केन्द्र का समय प्रातः 09 बजे से सायं 05 बजे तक निर्धारित किया गया है। रविवार एवं राजपत्रित अवकाश को छोड़कर, शेष कार्य दिवसों में क्रय केन्द्र खुले रहेंगे। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जिलाधिकारी क्रय केन्द्र के खुलने व बन्द होने के समय में आवश्यक परिवर्तन कर सकेंगे।
खरीद विपणन वर्ष 2023-24 धान खरीद हेतु फाॅरमर्स प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन (एफ0पी0ओ0) एवं फाॅरमर्स प्रोड्यूसर कम्पनी (एफ0पी0सी0) को मण्डी परिषद उत्तर प्रदेश से सम्बद्ध होकर खरीद कार्य करने की अनुमति प्रदान की गयी है।

आकांक्षी नगर योजना के क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने वर्तमान वित्तीय वर्ष 2023-24 में प्रारम्भ की जा रही आकांक्षी नगर योजना के क्रियान्वयन हेतु तैयार किए गए दिशा-निर्देशों को स्वीकृति प्रदान कर दी है। योजना के दिशा-निर्देशों में भविष्य में आवश्यक परिवर्तन, परिवर्धन एवं संशोधन हेतु मंत्रिपरिषद ने नगर विकास विभाग के मंत्री को अधिकृत किया है।
20 हजार से 01 लाख जनसंख्या के नगर निकायों के संसाधनों के आदर्श रूप में प्रयोग, आर्थिक विकास के अवसरों में वृद्धि कर पलायन को रोकने तथा उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर बनाने में बड़ा योगदान देने हेतु तैयार किये जाने के उद्देश्य से सबसे पिछड़े 100 नगरीय निकायों हेतु आकांक्षी नगर योजना की संकल्पना की गयी है।
आकांक्षी नगर योजना का मुख्य उद्देश्य वर्तमान में चल रही सरकारी योजनाओं को नियोजित शहरी विकास हेतु अच्छे ढंग से लागू करते हुए त्वरित प्रगति व सतत विकास प्राप्त करना है। योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2023-24 के बजट में 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था उपलब्ध है। इस योजना में केन्द्र सरकार, राज्य सरकार मा0 सांसद/विधायक निधि, अन्य संस्थाओं से सहयोग प्राप्त कर कन्वर्जेन्स के माध्यम से परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा।
03 सी (कनवर्जेन्स, कोलेबरेशन, कम्प्टीशन) का अनुप्रयोग कर योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा।
योजनान्तर्गत स्टेट अर्बन डिजिटल मिशन के माध्यम से आकड़ों का संकलन एवं उनका अनुप्रयोग करते हुए अनुश्रवण, वित्तीय भौतिक प्रगति, गैप एनालिसेस एवं गुणवत्ता सुधार किया जाएगा।
आकांक्षी नगर योजनान्तर्गत के तहत कुल 762 नगरीय निकायों में से 100 आकांक्षी नगरीय निकायों का चयन नीति आयोग द्वारा निर्धारित 16 पैरामीटर्स के आधार पर किया जाएगा। चयनित 100 नगर निकायों में यह योजना 31 मार्च, 2026 तक लागू रहेगी, परन्तु इनकी मानीटरिंग डॅशबोर्ड के माध्यम से 31 मार्च, 2028 तक चलती रहेगी।
31 मार्च, 2026 के पूर्व वर्तमान चयनित 100 नगर निकायांे के स्थान पर अन्य 100 नगर निकायों का चयन किया जाएगा तथा वहां यह योजना 01 अप्रैल, 2026 से आगे के 02 वित्तीय वर्षों तक लागू रहेगी। इसके उपरान्त यह नगर निकाय आत्म निर्भर रूप से कार्य करेंगे।
योजना के अन्तर्गत चयनित 100 आकांक्षी नगर निकायों में मुख्यमंत्री शहरी फेलोज के माध्यम से रणनीति तैयार करने, आकड़ो का संकलन एवं राज्य सरकार के साथ समन्वय, अनुश्रवण एवं अभिलेखों के रख-रखाव सम्बन्धी कार्य किए जाएंगे।
इस योजना के सुचारु रूप से कियान्वयन हेतु योजना का सतत अनुश्रवण एवं पर्यवेक्षण किया जाएगा तथा योजना के तहत आकांक्षी शहरी निकायों के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करने हेतु विभिन्न प्रकार के प्रदर्शन के आधार पर निकायों को प्रोत्साहन धनराशि प्रदान की जायेगी।
आकांक्षी नगर योजना से मूलभूत शहरी विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक संरचना के क्षेत्रों में परियोजना के क्रियान्वयन, आर्थिक अवसरों के सृजन से जनसामान्य को सीधा लाभ प्राप्त होगा।

अयोध्या, फिरोजाबाद एवं सहारनपुर में नगरीय बसों के संचालन हेतु एस0पी0वी0 गठन का प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने अयोध्या, फिरोजाबाद एवं सहारनपुर में नगरीय बसों के संचालन हेतु कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत कतिपय शर्तों के अनुसार एस0पी0वी0 गठन के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सुगम बनाने हेतु नगरीय परिवहन निदेशालय, उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा प्रदेश के कुल 14 शहरों में कुल 740 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन 13 एस0पी0वी0 के माध्यम से कराया जा रहा है।
मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की अध्यक्षता में गठित ‘निधि प्रबन्ध समिति’ की बैठक 20 सितम्बर, 2022 में प्रदेश के 17 शहरों में 04 चरणों में कुल 4,665 वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों को जी0सी0सी0 मोड पर संचालित कराये जाने पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गयी। इन 17 शहरों में से सहारनपुर, अयोध्या एवं फिरोजाबाद में आगामी वर्षों में वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कराया जाना है। अतएव इन शहरों में इलेक्ट्रिक बसों के सकुशल संचालन, प्रबंधन एवं अनुरक्षण हेतु कम्पनी अधिनियम, 2013 के अन्तर्गत सम्बन्धित मण्डल के आयुक्त की अध्यक्षता में नवीन एस0पी0वी0 के गठन किये जाने का निर्णय लिया गया है।
एस0पी0वी0 को नगरों में बसें चलाने के लिए मार्ग निर्धारित करने का अधिकार, मार्गों पर किराये के निर्धारण का अधिकार एवं यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं के सम्बन्ध में विचार-विमर्श करने का अधिकार होगा। इस प्रकार एस0पी0वी0 के गठन से इन शहरों में नगरीय बसों के संचालन में सुगमता एवं सुदृढ़ता होगी।

गुड़/खाण्डसारी इकाईयों हेतु चीनी वर्ष 2022-2023 के लिए समाधान योजना लागू किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने गुड़/खाण्डसारी इकाईयों हेतु उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम, 1964 की धारा 17 के खण्ड (iii) के उपखण्ड (ख) के द्वितीय परन्तुक के अधीन चीनी वर्ष 2022-2023 के लिए समाधान योजना लागू किए जाने के सम्बन्ध में प्रस्तुत प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मण्डी अधिनियम, 1964 की धारा 17 (3) (ख) के प्राविधानों के अन्तर्गत अधिसूचित कृषि उत्पाद के क्रय-विक्रय पर मण्डी शुल्क एवं विकास सेस वसूल किया जाता है।
खाण्डसारी उद्योग को बढ़ावा देने एवं मण्डी शुल्क की प्रभावी वसूली के उद्देश्य से वर्ष 1995-96 में गुड़/खाण्डसारी की क्रेशर इकाईयों हेतु मण्डी शुल्क समाधान योजना लागू की गयी थी, जिसका समय-समय पर विस्तार होता रहा है। अन्तिम बार अधिसूचना संख्या-20/2019/1328/80-1-2019-600 (20)/1994 दिनांक 25 अक्टूबर, 2019 द्वारा यह योजना चीनी वर्ष 2019-20 से 2021-22 के लिये लागू की गयी थी।
चीनी वर्ष 2021-2022 में 2.00 प्रतिशत मण्डी शुल्क एवं 0.5 प्रतिशत विकास सेस के आधार पर निर्धारित प्रशमन राशि के स्थान पर चीनी वर्ष 2022-23 में 1.00 प्रतिशत मण्डी शुल्क एवं 0.5 प्रतिशत विकास सेस के आधार पर पूर्व निर्धारित प्रशमन राशि, जिसमें मण्डी शुल्क को आधा करते हुए तथा विकास सेस को पूर्व निर्धारित प्रशमन राशि के समान रखते हुए 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ चीनी वर्ष 2022-23 के लिए के लिए गुड़/खाण्डसारी की क्रेशर इकाईयों हेतु मण्डी शुल्क समाधान योजना लागू की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में गुड़ एवं खाण्डसारी उद्योग का सीधा सम्बन्ध गाँव में रहने वाले लाखों किसानों और मजदूरों से है। इकाईयां ग्रामीण क्षेत्र में ही रोजगार उपलब्ध कराकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान करती हैं। समाधान योजना के फलस्वरूप खाण्डसारी इकाईयों को प्राप्त हो रही राहत के परिणाम स्वरूप गन्ना किसानों को भी लाभ प्राप्त होता है।
समाधान योजना के लागू किये जाने से खाण्डसारी उद्योग को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों को उनकी उपज का प्रतिस्पर्धात्मक मूल्य प्राप्त होगा एवं मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे।

प्रदेश पुलिस बल में नियुक्त आरक्षी/मुख्य आरक्षी को प्रदत्त साइकिल भत्ते को मोटर साइकिल भत्ते में परिवर्तित कर इसे 200 रु0 प्रतिमाह से बढ़ाकर 500 रु0 प्रतिमाह अनुमन्य किये जाने के सम्बन्ध में

मंत्रिपरिषद ने वित्तीय नियम संग्रह खण्ड-3 के नियम 82 के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश पुलिस बल के आरक्षी/मुख्य आरक्षी (काॅन्सटेबल/हेड काॅन्सटेबल) को उनके प्रास्थिति यथा-कार्यदायित्व/कार्य क्षेत्र/कार्य प्रकृति/कार्यभार के अनुसार निर्धारित वाहन (साइकिल, मोटर साइकिल आदि) भत्ते तथा तदनुरूप वाहन भत्ते की अनुमन्यता व तत्क्रम में वित्त (सामान्य) अनुभाग-2 के शासनादेश दिनांक 07 दिसम्बर, 2018 द्वारा आरक्षी/मुख्य आरक्षी को प्रदत्त साइकिल भत्ते को मोटर साइकिल भत्ते में परिवर्तित किये जाने के साथ ही इसे 200 रुपये प्रतिमाह के स्थान पर 500 रुपये प्रतिमाह मोटर साइकिल भत्ता स्वीकृत किये जाने हेतु नवीन शासनादेश निर्गत किये जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
ज्ञातव्य है कि अन्य राजकीय विभागों के समक्ष कार्मिकों जिन्हें साइकिल भत्ता अनुमन्य है, से पुलिस विभाग के आरक्षी/मुख्य आरक्षी के पृथक कार्यदायित्व के दृष्टिगत अल्प समय में घटना स्थल, विभिन्न प्रकार की अति महत्वपूर्ण ड्यूटी पर वर्तमान परिदृश्य में अब साइकिल से पहुंचना व्यावहारिक नहीं रहा गया है। यह निर्णय राजकीय हित में श्रेयस्कर होगा, क्योंकि इससे कानून-व्यवस्था के त्वरित नियंत्रण तथा कार्यकुशलता/दक्षता में वृद्धि होगी। साइकिल भत्ते के स्थान पर मोटर साइकिल भत्ता 500 रुपये प्रतिमाह किये जाने पर 6.78 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्ययभार अनुमानित है।


जनपद गोरखपुर में उ0प्र0 विशेष सुरक्षा बल की 2वीं वाहिनी की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण में प्रयुक्त उच्च विशिष्टियों एवं आवासीय तथा अनावासीय भवनों के निर्माण कार्य हेतु प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद गोरखपुर में उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल की 2वीं वाहिनी के स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण में प्रयुक्त उच्च विशिष्टियों एवं आवासीय भवनों के निर्माण कार्य हेतु 25523.07 लाख रुपये तथा अनावासीय भवनों के निर्माण कार्य हेतु 17647.19 लाख रुपये, कुल 43170.26 लाख रुपये की लागत पर प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही, मंत्रिपरिषद ने इस सीमा तक पुनरीक्षित प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति विभागीय मंत्री के अनुमोदन से निर्गत किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।

जनपद शामली में एक नई पी0ए0सी0 वाहिनी की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण में प्रयुक्त उच्च विशिष्टियों एवं आवासीय भवनों तथा अनावासीय भवनों निर्माण कार्य हेतु प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद शामली में एक नई पी0ए0सी0 वाहिनी की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण में प्रयुक्त उच्च विशिष्टियों एवं आवासीय भवनों के निर्माण कार्य हेतु 24448.82 लाख रुपये तथा अनावासीय भवनों निर्माण कार्य हेतु 13360.07 लाख रुपये, कुल 37808.89 लाख रुपये की लागत पर प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। साथ ही, मंत्रिपरिषद द्वारा इस सीमा तक पुनरीक्षित प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति विभागीय मंत्री के अनुमोदन से निर्गत किए जाने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित कर दिया है।

जनपद सम्भल की पुलिस लाइन में आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में 37217.47 लाख रु0 की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद सम्भल की पुलिस लाइन में आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में कुल धनराशि 37217.47 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि नवीन जनपदों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास, वर्तमान चुनौतियों का सामना करने तथा जनपदों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाये जाने के दृष्टिगत जनपद सम्भल की पुलिस लाइन में आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में यह निर्णय लिया गया है।

जनपद औरैया की पुलिस लाइन में आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में 40941.40 लाख रु0 की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद औरैया की पुलिस लाइन में आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में कुल धनराशि 40941.40 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि नवीन जनपदों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास, वर्तमान चुनौतियों का सामना करने तथा जनपदों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाये जाने के दृष्टिगत जनपद औरैया की पुलिस लाइन में आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में यह निर्णय लिया गया है।

जनपद लखनऊ में वीरांगना ऊदादेवी महिला पुलिस बटालियन की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में 39156.10 लाख रु0 की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ में वीरांगना ऊदादेवी महिला पुलिस बटालियन की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में कुल धनराशि 39156.10 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ करने, वर्तमान चुनौतियों का सामना करने तथा महिलाओं की सुरक्षा के दृष्टिगत वीरांगना ऊदादेवी महिला पुलिस बटालियन की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में यह निर्णय लिया गया है।

जनपद लखनऊ में उ0प्र0 विशेष सुरक्षा बल मुख्यालय तथा 01वीं वाहिनी विशेष सुरक्षा बल की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में 65541.98 लाख रु0 की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद लखनऊ में उ0प्र0 विशेष सुरक्षा बल मुख्यालय तथा 01वीं वाहिनी विशेष सुरक्षा बल की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में कुल धनराशि 65541.98 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि वर्तमान चुनौतियों का सामना करने तथा जनपद लखनऊ की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाये जाने के दृष्टिगत उ0प्र0 विशेष सुरक्षा बल मुख्यालय एवं 01वीं वाहिनी विशेष सुरक्षा बल की स्थापना हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में यह निर्णय लिया गया है।

जनपद उन्नाव में राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय के आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में 43402.86 लाख रु0 की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति

मंत्रिपरिषद ने जनपद उन्नाव में राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय के आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के सम्बन्ध में कुल धनराशि 43402.86 लाख रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। ज्ञातव्य है कि प्रदेश के अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में पर्याप्त अग्निशमन कर्मियों के प्रशिक्षण हेतु आवासीय/अनावासीय भवनों के निर्माण के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है।

पर्यटन विभाग के बन्द/घाटे में चल रहे/असंचालित पर्यटक आवास गृहों एवं टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेन्टर, अयोध्या को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित व संचालित किए जाने का प्रस्ताव स्वीकृत

मंत्रिपरिषद ने पर्यटन विभाग के बन्द/घाटे में चल रहे/असंचालित पर्यटक आवास गृहों एवं टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेन्टर, अयोध्या को पी0पी0पी0 मोड पर विकसित व संचालित किए जाने सम्बन्धी प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इसके तहत आर0एफ0क्यू0, आर0एफ0पी0 एवं प्री-बिड कांफ्रेन्स के आधार पर समय समय पर उल्लिखित नियमों एवं शर्तों के आधार पर पर्यटन विभाग के बन्द/घाटे में चल रहे/असंचालित 05 पर्यटक आवास गृहों-राही पर्यटक आवास गृह, संकिसा (फरुर्खाबाद), राही पर्यटक आवास गृह, नरौरा (बुलन्दशहर), राही पर्यटक आवास गृह, देवकली (औरैया), राही पर्यटक आवास गृह, गोकुल रेस्टोरेण्ट (मथुरा) तथा राही पर्यटक आवास गृह, बिठूर (कानपुर) के सापेक्ष शार्टलिस्टेड निविदा कर्ताओं (बिडर्स) में से उच्चतम निविदाकर्ता (एच-1) फर्म को इकाई लीज पर दिये जाने एवं फर्म से अनुबन्ध किये जाने के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदन किया गया है।
पर्यटन विभाग के 07 पर्यटक आवास गृहों-राही पर्यटक आवास गृह, मुंशीगंज (अमेठी), राही पर्यटक आवास गृह, देवाशरीफ (बाराबंकी), राही पर्यटक आवास गृह, सोरों (एटा), राही पर्यटक आवास गृह, कान्धला (शामली), राही पर्यटक आवास गृह, खुर्जा (बुलन्दशहर), राही पर्यटक आवास गृह, हरगांव (सीतापुर) तथा राही पर्यटक आवास गृह, पटना पक्षी विहार (एटा) इकाईयों की आर0एफ0क्यू0 की ई-निविदा के सापेक्ष निविदा कर्ताओं (बिडर्स) को शॉर्टलिस्ट करते हुए सार्वजनिक निजी सहभागिता निविदा मूल्यांकन समिति (पी0पी0पी0बी0ई0सी0) द्वारा अन्तिमीकृत आर0एफ0पी0 प्रपत्रों को मंत्रिपरिषद द्वारा अनुमोदित किया गया है।
जनपद अयोध्या में टूरिस्ट फैसिलिटेशन सेन्टर, अयोध्या की आर0एफ0क्यू0 की प्रकाशित ई-निविदा के सापेक्ष शाॅर्टलिस्टेड निविदा कर्ताओं (बिडर्स) के मध्य जारी आर0एफ0पी0 के सापेक्ष प्राप्त पृच्छाओं को समाहित करते हुए सार्वजनिक निजी सहभागिता निविदा मूल्यांकन समिति (पी0पी0पी0बी0ई0सी0) द्वारा अन्तिमीकृत आर0एफ0पी0 प्रपत्रों को मंत्रिपरिषद का अनुमोदित किया गया है।
मंत्रिपरिषद ने प्रकरण में आवश्यकतानुसार अग्रेतर निर्णय लिये जाने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बंद/घाटे में चल रहे/असंचालित पर्यटक आवास गृहों को जनोपयोगी बनाने एवं पर्यटकों के सुविधार्थ उच्च स्तरीय सुविधायें विकसित करने तथा प्रदेश में निजी निवेश को बढ़ावा दिये जाने के उद्देश्य से सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पी0पी0पी0) मोड पर विकसित व संचालित कराये जाने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय से पर्यटन अवस्थापना सुविधाओं का विकास होगा तथा प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रोजगार का सृजन होगा।

आगरा एयरपोर्ट पर नवीन सिविल ऐन्क्लेव के विकास हेतु प्रस्तुत प्रस्ताव अनुमोदित

मंत्रिपरिषद ने आगरा एयरपोर्ट पर नवीन सिविल ऐन्क्लेव के विकास हेतु प्रस्तुत प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है।
इसके तहत आगरा एयरपोर्ट के विकास हेतु अतिरिक्त प्रस्तावित कुल भूमि
37.4336 हेक्टेयर (लगभग 92.50 एकड़) के क्रय हेतु कुल अनुमानित 1,23,59,27,574 रुपये (01 अरब 23 करोड़ 59 लाख 27 हजार पांच सौ चैहत्तर रुपये मात्र) पर अनुमोदन प्रदान करते हुए प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति के साथ व्यय किये जाने का भी अनुमोदन कर दिया है।
साथ ही, मंत्रिपरिषद ने परियोजना क्षेत्र के अन्तर्गत पड़ने वाली विभिन्न शासकीय विभागों की परिसम्पत्तियों यथा वृक्षों, सड़कों, नहरों, बिजली के खम्भों, विद्युत लाइन्स, सब-स्टेशनों, विद्यालयों, आंगनवाड़ी केन्द्रों इत्यादि तथा विभिन्न अवरोधों के विस्थापन, डायवर्जन तथा नव-निर्माण से सम्बन्धित कार्य सम्बन्धित विभागों द्वारा अपने विभागीय बजट से वहन किए जाने तथा शासकीय विभागों द्वारा अपनी भूमि एवं परिसम्पत्तियाँ इत्यादि निःशुल्क एवं भारमुक्त रूप से नागरिक उड्डयन विभाग को उपलब्ध कराए जाने/अन्तरित किए जाने हेतु अनुमोदन प्रदान किया है।
मंत्रिपरिषद ने परियोजना में किसी भी प्रकार के परिवर्धन/परिवर्तन की स्थिति में निर्णय लेने हेतु तथा अन्य सम्बन्धी कार्यों के सम्बन्ध में भविष्य में यथावश्यकतानुसार निर्णय लेने हेतु मुख्यमंत्री जी को अधिकृत किया है।

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