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नोएडा : एमिटी यूनिवर्सिटी में 7 दिवसीय शिक्षक विकास कार्यक्रम सम्पन्न

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नोएडा, 29 दिसम्बर।

एमिटी विश्वविद्यालय में शुक्रवार को फॉरेंसिक विज्ञान शिक्षा और कैरियर लक्ष्यों में वर्तमान रूझान आयोजित 7 दिवसीय शिक्षक विकास कार्यक्रम का समापन हो गया।

एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस द्वारा एमिटी एकेडिमिक स्टाफ कॉलेज के सहयोग ‘‘फॉरेंसिक विज्ञान शिक्षा और कैरियर लक्ष्यों में वर्तमान रूझान’’ विषय पर सात दिवसीय ऑनलाइन शिक्षक विकास कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसका समापन हो गया। इस शिक्षक विकास कार्यक्रम का समापन पर, दिल्ली के फॉरेसिक साइंस लैबोरेटरी की निदेशक सुश्री दीपा वर्मा, इटली के सार्वजनिक अन्वेषक और प्रमाणित भौगोलिक प्रोफाइलिंग विश्लेषक डॉ डोमिंगो मैग्लियोका, झारखंड के राजेन्द्र इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल सांइसेस के फॉरेसिक मेडिसिन एंड टॉक्सीकोलॉजिस्ट विभाग के डा भूपेंद्र सिंह और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस के एसोसिएट प्रोफेसर डा अमरनाथ मिश्रा ने प्रतिभागियों को जानकारी दी।

दिल्ली के फॉरेसिक साइंस लैबोरेटरी की निदेशक सुश्री दीपा वर्मा ने कहा कि सभी वस्तुओं की उचित पैकेजिंग और लेबलिंग, प्रत्येक वस्तु को उचित रूप से सील किया गया, चिन्हित किया गया, लेबल और प्रतिक्रियात्मक दस्तावेजीकरण पर सही और सुसंगत जानकारी दर्ज हो यह सुनिश्चित करना चाहिए। सुनिश्चित करें कि आपकी जानकारी सटीक है। प्रतिबंधित वस्तुओं का वर्णन करते समय सामान्य वस्तुओं का उपयोग ना करें। अनुमान ना लगाये बल्कि तथ्य प्रस्तुत करें। सुश्री वर्मा ने कहा कि प्रदर्शनों की अभिरक्षा, संरक्षण और परिक्षण सहित रसायनिक विभाग, टॉक्सीकोलॉजी, विसरा और बायोलॉजिकल सैंपल का भंडारण, विस्फोटक, जीवविज्ञान विभाग, डॉक्यूमेंट डिविजन आदि के बारे में जानकारी प्रदान की।

इटली के सार्वजनिक अन्वेषक और प्रमाणित भौगोलिक प्रोफाइलिंग विश्लेषक डॉ डोमिंगो मैग्लियोका ने संबोधित करते हुए कहा कि भौगोलिक अपराध क्षेत्र में स्थान एक सुराग है। उन्होनें भौगोलिक प्रोफाइल मैप के महत्व को बताते हुए प्रतिभागीयों को विस्तृत जानकारी दी।

एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस के एसोसिएट प्रोफेसर डा अमरनाथ मिश्रा ने कहा कि इस सात दिवसीय कार्यक्रम में यूएई, कैमरून, यूके, यूएसए सहित कई देशों और देश के ई संस्थानो ंसे 100 से अधिक प्रतिभागी हिस्सा लिया और 30 से अधिक सत्रों में चलने वाले इस सात दिवसीय शिक्षक विकास कार्यक्रम में 30 विशेषज्ञों द्वारा उन्नत जानकारी की गई।

इस अवसर पर झारखंड के राजेन्द्र इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल सांइसेस के फॉरेसिक मेडिसिन एंड टॉक्सीकोलॉजिस्ट विभाग के डा भूपेंद्र सिंह ने भी अपने विचार रखे।

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