नोएडा के कैपिटल पावर सिस्टम्स कारखाने में भयानक आग: एक कर्मचारी की मौत, 36 घायल – अब फैक्ट्री में उत्पादन पर तत्काल रोक, कड़ी कार्रवाई की सिफारिश

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा सेक्टर-4 स्थित मेसर्स कैपिटल पावर सिस्टम्स लिमिटेड के कारखाने में 12 मार्च 2026 की सुबह लगभग 5 बजे विद्युत शॉर्ट सर्किट के कारण लगी भीषण आग में एक कर्मचारी की मौत हो गई और 36 कर्मचारी घायल हो गए। इस हादसे के बाद कारखाना विभाग ने गहन जांच की और बुधवार को फैक्ट्री में उत्पादन कार्य को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक दिया है। साथ ही कारखाना मालिक और प्रबंधक के खिलाफ कारखाना अधिनियम, 1948 के तहत सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।

हादसे का विवरण और जांच के मुख्य निष्कर्ष:

आग की सूचना मिलने पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और कारखाना विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली। आग बुझाने में 20-25 मिनट लगे।
एक कर्मचारी उपेंद्र की मौत हो गई, जबकि 36 घायलों में से 33 को अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है और 2 का इलाज जारी है।
जांच में पाया गया कि आग का मुख्य कारण विद्युत शॉर्ट सर्किट था, जो जर्जर वायरिंग, पुरानी इंसुलेशन, ओवरलोडिंग या खराब रखरखाव के कारण हुआ।

कारखाने में स्मोक डिटेक्टर काम नहीं कर रहे थे, कई जगह निकासी के रास्ते बंद थे, फायर ड्रिल नहीं होती थीं।
भवन में दो बेसमेंट और तीन मंजिलें हैं, लेकिन टेरेस पर टिन शेड बनाकर भंडारण किया जा रहा था, जबकि अग्निशमन विभाग की NOC केवल दो बेसमेंट + तीन मंजिल तक ही थी।
चारों ओर सेटबैक (खाली जगह) नहीं छोड़ा गया था, जिससे फायर ब्रिगेड वाहन पहुंचने में दिक्कत हुई।
कारखाने में 50 टन पॉलीकार्बोनेट और 200 लीटर ज्वलनशील केमिकल असुरक्षित तरीके से रखे गए थे।
विद्युत सुरक्षा की कोई जांच रिपोर्ट या रखरखाव के रिकॉर्ड नहीं दिखाए जा सके।

कारखाना विभाग का फैसला:

सहायक निदेशक कारखाना राम बहादुर और संदीप कुमार सिंह ने कारखाना अधिनियम की धारा 40(2) के तहत आदेश जारी किया है कि:क्षतिग्रस्त भवन, मशीनरी और संयंत्र में कोई भी उत्पादन कार्य तब तक नहीं होगा, जब तक:पूरी मरम्मत किसी योग्य इंजीनियर की देखरेख में न हो जाए।

सेफ्टी ऑडिट, HAZOP, हेजर्ड एनालिसिस, स्थायित्व प्रमाण-पत्र और अन्य सुरक्षा प्रमाण-पत्र किसी मान्यता प्राप्त संस्था से न प्राप्त कर लिए जाएं।
सभी प्रमाण-पत्रों की कॉपी कारखाना विभाग को जमा न कर दी जाए।
आदेश का उल्लंघन करने पर कारखाना मालिक और प्रबंधक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

क्यों हुई यह सिफारिश?
जांच में साफ हुआ कि कारखाना प्रबंधन ने कर्मचारियों की जान-माल की सुरक्षा की अनदेखी की। विद्युत सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा उपकरण, निकासी मार्ग और ज्वलनशील सामग्री के भंडारण में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिसके कारण यह हादसा इतना विनाशकारी हो गया। विभाग का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित सेफ्टी ऑडिट, फायर ड्रिल, विद्युत जांच और सुरक्षित भंडारण अनिवार्य होना चाहिए।

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