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एमिटी विश्वविद्यालय में भारतीय वन सेवा अफसरों की तीन दिवसीय कार्यशाला

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नोएडा, 17 जनवरी।

एमिटी विश्वविद्यालय में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) अधिकारियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

एमिटी विश्वविद्यालय के एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिसोर्सेज एंड सस्टेनेबल डेेवलपमेंट द्वारा भारतीय वन सेवा अधिकारियों के लिए ‘‘ भारत में लकड़ी के उत्पादन ओर उपभोग पैटर्न और भविष्य के दायरे’’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में हरियाणा, कर्नाटक, उड़िसा, गुजरात और अन्य सहित विभिन्न संवर्गो के 14 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यशाला का शुभारंभ भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सीएएमपीए के सीईओ और अतिरिक्त महानिदेशक श्री सुभाष चंद्रा, एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती, एमिटी लॉ स्कूल के चेयरमैन डा डी के बंद्योपाध्याय और एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिसोर्सेज एंड सस्टेनेबल डेेवलपमेंट के निदेशक डा एस पी सिंह द्वारा किया गया।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सीएएमपीए के सीईओ और अतिरिक्त महानिदेशक श्री सुभाष चंद्रा ने कहा कि हाल के दिनों में वनों से संबंधित कई मुद्दे सामने आये है जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है जैसे कि हरित आवरण को कैसे बढ़ाया जाये, वन प्रमाणन और कानूनों से संबंधित समस्याओं पर भी। ऐसे समय में कार्यशाला के लिए चुना गया विषय उपयुक्त और प्रांसगिक है जिससे सामूहिक प्रयासों से चुनौतियों को बेहतर तरीके से समाधान किया जा सकता है। नवोन्मेषी सोच और नए जमाने की रणनीतियों को विशेष रूप से कौशल विकास और ग्रामीण बाजार के उपयोग में लागू करने की आवश्यकता है।

एमिटी सांइस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने कहा कि लकड़ी का उत्पादन, उसके खपत की अनुपात में होना चाहिए इसके अतिरिक्त लकड़ी का इष्टतम उत्पादन और खपत सुनिश्चित करने के लिए नई तकनीकों को अपनाया जाना चाहिए। सतत विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए उत्पादकता बढ़ाने के लिए एक बहु विषयक दृष्टिकोण और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों की भागीदारी की आवश्यकता है।

एमिटी स्कूल ऑफ नैचुरल रिसोर्सेज एंड सस्टेनेबल डेेवलपमेंट के निदेशक डा एस पी सिंह ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यशाला का उददेश्य वन अधिकारियों को भारत वन क्षेत्र की चुनौतियों में समाधान प्रदान करने के लिए बातचीत करने और विचारों का आदान प्रदान करने का अवसर प्रदान करना है।

तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान ‘‘लकड़ी की मांग और आपूर्ति और भारत में उपभोग पैटर्न पर इसका प्रभाव, विश्व के वन संसाधनों का अवलोकन और लकड़ी के उत्पादन और उपभोग की प्रर्वृित्त, भविष्य में सुधार की गुंजाइश, भारत में इमारती लकड़ी का उपभोग पैटर्न – रणनीतियां और चुनौतियां जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

 

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