नोएडा मेट्रो कैलेंडर विवाद: IAS महेंद्र प्रसाद NMRC से हटाए गए, अब नोएडा प्राधिकरण से भी ट्रांसफर, लखनऊ अटैच

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)

नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (NMRC) के 2026 कैलेंडर में शीर्ष अधिकारियों की तस्वीरें छपने से शुरू हुआ विवाद अब बड़े प्रशासनिक फेरबदल तक पहुंच गया है। इस मामले के केंद्र में रहे 2014 बैच के IAS अधिकारी महेंद्र प्रसाद को पहले NMRC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से हटाया गया, और अब उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें नोएडा प्राधिकरण से भी हटाकर लखनऊ मुख्यालय से अटैच (प्रतीक्षारत) कर दिया है।

विवाद की शुरुआत:

जनवरी 2026 की शुरुआत में NMRC का आधिकारिक कैलेंडर विवादों में घिर गया। कैलेंडर के अप्रैल महीने के पेज पर मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) लोकेश एम (जो नोएडा प्राधिकरण के CEO भी हैं) की दो तस्वीरें छपी थीं, जबकि जुलाई महीने के पेज पर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर महेंद्र प्रसाद की दो तस्वीरें थीं। संयोगवश, लोकेश एम का जन्मदिन 3 अप्रैल और महेंद्र प्रसाद का 5 जुलाई को पड़ता है। कैलेंडर में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी जनप्रतिनिधि की तस्वीर नहीं थी, जिससे सवाल उठे कि यह व्यक्तिगत प्रचार तो नहीं।MD लोकेश एम ने स्पष्ट किया कि तस्वीरें उनकी अनुमति के बिना छापी गईं और उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। वहीं, महेंद्र प्रसाद ने कहा था कि कैलेंडर में “कुछ भी व्यक्तिगत या व्यावसायिक नहीं” है, बल्कि यह सरकारी हित में था।

पहली कार्रवाई:

9 जनवरी 2026 को नोएडा प्राधिकरण ने आदेश जारी कर महेंद्र प्रसाद को NMRC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से हटा दिया। उनकी जगह एडिशनल CEO कृष्णा करुणेश को नियुक्त किया गया। यह आदेश एनएमआरसी के एमडी डॉ लोकेश एम की मंजूरी से जारी हुआ।

ताजा ट्रांसफर:
मीडिया रिपोर्ट्स के बाद सुर्खियों में आये कलेंडर विवाद पर उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त कदम उठाया। महेंद्र प्रसाद, जो लंबे समय से नोएडा प्राधिकरण में OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) थे, को अब पूरी तरह हटाकर लखनऊ मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है। यह प्रतीक्षारत (awaiting posting) की स्थिति मानी जाती है। अभी तक MD लोकेश एम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

यह घटनाक्रम NMRC और नोएडा प्राधिकरण जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों में पारदर्शिता और सरकारी नियमों के पालन पर सवाल उठाता है। कैलेंडर अन्य सरकारी विभागों और मंत्रालयों में भी वितरित किया गया था, जिससे विवाद और बढ़ा।अधिकारी फिलहाल इस पर टिप्पणी से बच रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जांच जारी है। आने वाले दिनों में कुछ अन्य अफसरों पर भी गाज गिर सकती है।

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