विनोद शर्मा
(नोएडा खबर डॉट कॉम)
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने वाकई इतिहास रच दिया है! अब अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर आसमान से पैनी नजर रखी जाएगी, क्योंकि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC) के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू साइन किया गया है। यह देश का पहला ऐसा विकास प्राधिकरण बन गया है, जो एआई और सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल करके सरकारी भूमि की रक्षा करेगा।
यह एमओयू दिल्ली में बृहस्पतिवार (26 फरवरी 2026) को साइन हुआ, जिसके तहत उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट (जैसे Cartosat सीरीज) की तस्वीरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जोड़कर हर दो महीने में बदलावों की ऑटोमैटिक पहचान होगी। कोई नया निर्माण, अवैध कब्जा या बदलाव हुआ नहीं कि सिस्टम उसे फ्लैग कर देगा, अलर्ट भेजेगा और जीआईएस-आधारित डैशबोर्ड पर साफ दिखाएगा। इससे कार्रवाई तेज, सटीक और पारदर्शी हो जाएगी।
प्रारंभ में 800 एकड़ से ज्यादा सरकारी भूमि पर फोकस रहेगा, जहां अतिक्रमण की समस्या सबसे ज्यादा है। सफल होने पर इसे पूरे क्षेत्र में विस्तार दिया जाएगा। एनआरएससी एआई मॉडल, मॉनिटरिंग डैशबोर्ड, अलर्ट सिस्टम बनाएगा और प्राधिकरण के अधिकारियों को ट्रेनिंग भी देगा, ताकि यह सिस्टम लंबे समय तक आत्मनिर्भर रहे।
ग्रेटर नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एनजी रवि कुमार आईएएस ने इसे टेक-इनेबल्ड गवर्नेंस की दिशा में बड़ा कदम बताया है। इससे भूमि संरक्षण, सार्वजनिक संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और जवाबदेही बढ़ेगी।
अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुमित यादव ने कहा कि यह सिस्टम अतिक्रमण रोकथाम और कार्रवाई की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा – एकदम स्मार्ट, प्रोएक्टिव और डेटा-ड्रिवन व्यवस्था।यह पहल न सिर्फ ग्रेटर नोएडा के लिए गेम-चेंजर है, बल्कि पूरे देश के अन्य शहरों और विकास प्राधिकरणों के लिए एक मॉडल बनेगी। अंतरिक्ष तकनीक और एआई का यह संयोजन विकास को सुरक्षित, वैज्ञानिक और भविष्योन्मुखी बनाने की नई मिसाल पेश कर रहा है।ग्रेटर नोएडा अब सचमुच “आसमान से जमीन की रक्षा” करेगा – अवैध कब्जे अब छिप नहीं पाएंगे!
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