केदारनाथ धाम का कचरा संकट: RTI से खुलासा—2025 यात्रा सीजन में 21.4 MT कचरा, 60% (12.7 MT) बिना प्रोसेस डंप, 5 TPD प्लांट के दावे खोखले
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केदारनाथ धाम का कचरा संकट: RTI से खुलासा—2025 यात्रा सीजन में 21.4 MT कचरा, 60% (12.7 MT) बिना प्रोसेस डंप, 5 TPD प्लांट के दावे खोखले

नोएडा/केदारनाथ,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा के पर्यावरण कार्यकर्ता और RTI एक्टिविस्ट अमित गुप्ता की लगातार दायर RTI से केदारनाथ धाम में कचरा प्रबंधन की कड़वी हकीकत सामने आई है। नगर पंचायत केदारनाथ के जवाब में पुष्टि हुई कि 2025 के यात्रा सीजन (मई से अक्टूबर) में कुल 21.4 मीट्रिक टन (21,400 किलो) ठोस कचरा उत्पन्न हुआ, जो 2024 के 17.5 MT से 22% अधिक है। यह पिछले 5 वर्षों में सबसे ज्यादा कचरा उत्पादन दर्ज किया गया है।

चिंताजनक तथ्य यह है कि कुल कचरे में से मात्र 8.7 MT (40%) ही प्रोसेस किया गया, जबकि 12.7 MT (12,700 किलो) — यानी लगभग 60% कचरा — बिना किसी वैज्ञानिक प्रोसेसिंग के डंप कर दिया गया। यह डंपिंग ईको-सेंसिटिव हिमालयी क्षेत्र में हो रही है, जहां मंदाकिनी नदी और आसपास का पर्यावरण पहले से ही दबाव में है।माहवार कचरा उत्पादन (2025)मई: 4.8 MT
जून: 5.6 MT
जुलाई: 3.6 MT
अगस्त: 1.1 MT
सितंबर: 1.2 MT
अक्टूबर: 1.5 MT
कुल: 21.4 MT

अमित गुप्ता ने RTI के आधार पर कई सवाल खड़े किए हैं:

यदि 5 TPD (टन प्रतिदिन) क्षमता वाला MRF (मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी) सेंटर पिछले साल बनाया गया था, तो 6 महीनों (करीब 180 दिन) में कुल प्रोसेसिंग सिर्फ 8.7 MT क्यों हुई? यह क्षमता का महज 10-15% उपयोग दर्शाता है।
12.7 MT कचरा कहां और किस तरीके से डंप किया गया? क्या यह वैज्ञानिक लैंडफिल में है या खुले में?
क्या यह डंपिंग पर्यावरण संरक्षण नियमों, एनजीटी दिशानिर्देशों और स्वच्छ गंगा मिशन के अनुरूप है? ईको-सेंसिटिव जोन में अनट्रिटेड कचरा डालना गंभीर उल्लंघन हो सकता है।

गुप्ता ने बताया कि गीले कचरे के लिए नई मशीनों की DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) अभी स्वीकृति के इंतजार में है, जबकि मौजूदा सुविधाओं का उपयोग भी न्यूनतम है। पिछले वर्षों के आंकड़ों से भी यही तस्वीर उभरती है—2022 से 2024 तक कुल 72.53 MT कचरा उत्पन्न हुआ, जिसमें से सिर्फ 32% प्रोसेस हुआ और बाकी डंप साइट्स पर फेंका गया।
यह RTI केदारनाथ जैसे पवित्र धाम की बढ़ती पर्यटक संख्या (रेकॉर्ड श्रद्धालु) के बीच पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर सवाल उठाती है। अमित गुप्ता ने कहा, “आस्था का केंद्र होने के बावजूद केदारनाथ में कचरा प्रबंधन की स्थिति चिंताजनक है। बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत अलग है। एनजीटी और उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा मंदाकिनी और हिमालयी पारिस्थितिकी को स्थायी नुकसान हो सकता है।”

पर्यावरणविदों का मानना है कि यात्रा सीजन में कचरा उत्पादन बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन 5 TPD प्लांट के बावजूद 60% कचरा अनप्रोसेस्ड रहना प्रशासनिक विफलता दर्शाता है। अमित गुप्ता ने आगे RTI और शिकायतें दायर करने की तैयारी जताई है ताकि केदारनाथ का “स्वच्छ धाम” का दावा हकीकत बने।

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