ब्रेकिंग न्यूज़: ग्रेटर नोएडा में CRPF जवान और पत्नी द्वारा 10 साल की रिश्तेदार बच्ची के साथ अमानवीय क्रूरता: बच्ची वेंटिलेटर पर, -जिंदगी-मौत की लड़ाई लड़ रही

-सीआरपीएफ ने जवान को किया सस्पेंड

नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
ग्रेटर नोएडा के CRPF कैंप में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 235 बटालियन में तैनात कांस्टेबल तारीक अनवर और उनकी पत्नी रिम्पा खातून पर रिश्तेदार की 10 साल की मासूम बच्ची के साथ लंबे समय से क्रूर शारीरिक प्रताड़ना, मारपीट, भूखा रखने और अमानवीय यातना देने का गंभीर आरोप लगा है। बच्ची की हालत इतनी नाजुक हो चुकी है कि उसे प्राइवेट अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है।

डॉक्टरों के अनुसार उसकी कई पसलियां टूटी हुई हैं, दांत टूट चुके हैं, हीमोग्लोबिन स्तर बेहद खतरनाक 1.9 तक गिर चुका है। यह चोटें न केवल एक रात की मारपीट की नतीजा हैं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही व्यवस्थित क्रूरता की ओर इशारा करती हैं। बच्ची घरेलू कामकाज और बच्चों की देखभाल के नाम पर बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति के CRPF कैंप के आवास में रखी गई थी।

घटना का क्रूर सच

14-15 जनवरी 2026 की मध्यरात्रि में बच्ची के साथ इतनी बर्बर मारपीट की गई कि उसकी हालत गंभीर हो गई।छोटी-छोटी बातों पर उसे लगातार प्रताड़ित किया जाता था, पीटा जाता था और भूखा रखा जाता था। बच्ची को अवैध रूप से घरेलू नौकरानी की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि वह रिम्पा खातून की भांजी (niece) है। CRPF नियमों के अनुसार बच्ची को कैंप में रखने की कोई अनुमति नहीं ली गई थी, जो विभागीय उल्लंघन भी है।

पुलिस और विभागीय कार्रवाई

पुलिस के अनुसार 18 जनवरी 2026 को CRPF के सूबेदार मेजर (असिस्टेंट कमांडेंट) ने थाना ईकोटेक-3 में शिकायत दर्ज कराई। इस आधार पर तत्काल कार्रवाई करते हुए ईकोटेक-3 पुलिस ने दोनों आरोपियों तारीक अनवर और रिम्पा खातून को गिरफ्तार कर लिया। CRPF ने तारीक अनवर को तत्काल सस्पेंड कर दिया है। बच्ची के अस्पताल में इलाज के दौरान पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौजूद हैं। यह मामला न केवल एक बच्ची के साथ अमानवीय व्यवहार का है, बल्कि बलात्कार विरोधी कानूनों, बाल श्रम निषेध, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और मानव तस्करी जैसे गंभीर प्रावधानों को भी आकर्षित कर सकता है।

फिलहाल केवल धारा 110 बीएनएस (हत्या का प्रयास जैसी गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित) में केस दर्ज हुआ है, लेकिन जांच में और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।यह घटना समाज के सामने एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि जो लोग देश की सुरक्षा के लिए तैनात हैं, उनके घर में एक मासूम बच्ची के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार कैसे हो सकता है? बच्ची के जल्द स्वस्थ होने और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलने की कामना के साथ यह मामला पूरे देश का ध्यान खींच रहा है।

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