पंडित नरेंद्र शर्मा का जन्म 28 फरवरी 1913 को उत्तर प्रदेश के जहांगीरपुर गांव में हुआ था। यह गांव पहले बुलंदशहर जिले के खुर्जा तहसील में आता था, लेकिन अब गौतम बुद्ध नगर जिले का हिस्सा है। जहांगीरपुर जेवर के निकट स्थित है, जहां नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) बन रहा है। पंडित जी के पिता यहां पटवारी थे, लेकिन कम उम्र में उनके निधन के बाद परिवार ने संघर्ष भरा सफर तय किया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एम.ए. करने के बाद उन्होंने साहित्य, पत्रकारिता और स्वतंत्रता संग्राम में कदम रखा।
- विविध भारती सेवा की शुरुआत का श्रेय उन्हें जाता है – आकाशवाणी की यह लोकप्रिय सेवा लाखों दिलों तक पहुंची।
- फिल्मों में उनके लिखे गीत आज भी अमर हैं:
- “भंवरे ने खिलाया फूल…” (प्रेम रोग)
- “यशोमती मैया से बोले नंदलाला…” (सत्यम शिवम सुंदरम)
- “दिन पर दिन बीत गए…” (महाभारत में इस्तेमाल)
- महाभारत धारावाहिक की कथा-रचना, भीष्म की श्वेत वस्त्र वाली छवि तय करने से लेकर कलाकार चयन (जैसे द्रौपदी के लिए रूपा गांगुली का सुझाव उनकी पत्नी सुशीला जी से) तक – सबमें उनकी निर्णायक भूमिका रही।
- मृत्यु: 11/12 फरवरी 1989 को मुंबई में।
नई इंटरनेशनल फिल्म सिटी: जहांगीरपुर के ठीक पास एक नया अध्याय
आज जहांगीरपुर यमुना एक्सप्रेसवे के सेक्टर-21 में प्रस्तावित इंटरनेशनल फिल्म सिटी के बहुत निकट है। YEIDA (यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी) द्वारा विकसित यह प्रोजेक्ट PPP मॉडल पर चल रहा है, जिसमें बनी कपूर और भूटानी ग्रुप जैसी कंपनियां शामिल हैं।
- कुल 1000 एकड़ में फैला प्रोजेक्ट।
- 2026 में निर्माण का पहला चरण तेजी से आगे बढ़ रहा है – टेंडर जारी, इंडिपेंडेंट इंजीनियर नियुक्ति, फेज-1 में 230 एकड़ पर फिल्म इंस्टीट्यूट, स्टूडियो, शूटिंग फ्लोर्स आदि।
- निवेश: हजारों करोड़ रुपये, मुंबई को टक्कर देने वाला मनोरंजन हब।
- हालिया अपडेट्स: ‘मॉम 2’ जैसी फिल्मों की शूटिंग यहां शुरू होने की खबरें, एयरपोर्ट के साथ कनेक्टिविटी से क्षेत्र वैश्विक स्तर पर चमकेगा।
संयोग या नियति? जन्मभूमि और फिल्म सिटी का निकट संबंध
एक तरफ जहां पंडित नरेंद्र शर्मा ने जहांगीरपुर की मिट्टी में सांस ली और हिंदी साहित्य-गीत-सिनेमा को नई ऊंचाई दी, वही क्षेत्र अब भारत की सबसे बड़ी फिल्म सिटी का केंद्र बन रहा है। यह संयोग कमाल का है – जैसे उनकी विरासत खुद को दोहरा रही हो। स्मृति में क्या बन सकता है यादगार स्थल?
- पंडित नरेंद्र शर्मा स्मृति उद्यान या कविता-गीत लाइब्रेरी जहां उनकी रचनाएं, किताबें और ऑडियो रिकॉर्डिंग्स उपलब्ध हों।
- ऑडिटोरियम जहां नए गीतकार-कवि कार्यक्रम हों, युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन मिले।
- फिल्म सिटी के एंट्री पॉइंट पर प्रतिमा या प्लाक – ताकि आने वाली पीढ़ियां जानें कि इस धरती ने विविध भारती के रचयिता, महाभारत के मार्गदर्शक और अमर गीतकार को जन्म दिया।
यह न सिर्फ स्थानीय इतिहास का सम्मान होगा, बल्कि फिल्म सिटी को सांस्कृतिक गहराई देगा। जहांगीरपुर से मुंबई तक उनकी यात्रा अब फिर से इस क्षेत्र से जुड़ रही है – जय जै…!! पंडित नरेंद्र शर्मा की स्मृति अमर रहे। क्या आपको लगता है कि YEIDA या फिल्म सिटी प्रोजेक्ट में उनकी याद में कुछ खास कदम उठना चाहिए ?
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