नोएडा: इच्छाशक्ति और संस्कारों की ज्योति: आर्ष गुरुकुल नोएडा में नवप्रवेशित ब्रह्मचारियों का उपनयन

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)

15 और 16 अगस्त 2026 को नोएडा के सेक्टर-33 स्थित आर्य समाज आर्ष गुरुकुल में एक ऐसा क्षण आया, जो सिर्फ संस्कार नहीं, बल्कि जीवन की नई दिशा का आरंभ था। श्रावणी पर्व के पावन अवसर पर नवप्रवेशित ब्रह्मचारियों का उपनयन संस्कार संपन्न हुआ। यज्ञ की लपटें आकाश की ओर उठ रही थीं और वैदिक मंत्रों की गूंज पूरे परिसर में फैल रही थी। माता-पिता, अभिभावक, शिक्षाविद् और समाजसेवी सभी इस दृश्य को साक्षी बनकर बैठे थे।

आचार्य डॉ. जयेंद्र कुमार के आचार्यत्व में जब छोटे-छोटे ब्रह्मचारियों ने यज्ञोपवीत धारण किया, तो लगता था मानो सदियों पुरानी गुरुकुल परंपरा फिर से जीवित हो उठी हो। उन्हें सिर्फ मंत्र नहीं दिए गए, बल्कि जीवन का सबसे बड़ा संदेश दिया गया—अनुशासन, चरित्र, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा।

मुख्य वक्ता डॉ. संध्या शर्मा ने जब कहा कि गुरुकुल शिक्षा किताबी ज्ञान से कहीं आगे जाती है, तो हर किसी का हृदय छू गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यहाँ विद्यार्थी को केवल अंक नहीं, बल्कि संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम मिलता है। उनके शब्दों में नवप्रवेशित ब्रह्मचारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना छिपी थी। उन्होंने उपनयन संस्कार यानी जनेऊ धारण करने और तीन धागों के महत्व में तीनों ऋण की चर्चा की।

उसके बाद मंच पर आए निपुण मल्होत्रा। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित इस उद्यमी ने बच्चों को सीधे आँखों में देखकर कहा—“जीवन में आने वाली कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती। अगर अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने की लगन हो, तो हर चुनौती मार्ग बन जाती है।” उनके शब्दों में अनुभव था, संघर्ष था और सबसे बढ़कर विश्वास था। बच्चों की आँखों में एक नई चमक आ गई। वे समझ गए कि लक्ष्य के प्रति समर्पण ही सबसे बड़ी शक्ति है।

वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा ने भारतीय संस्कृति और गुरुकुल परंपरा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अगर हम अपनी जड़ों को मजबूत रखें, तो आने वाली पीढ़ी कभी दिशाहीन नहीं होगी। आर्ष गुरुकुल द्वारा आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कारों को जोड़ने के प्रयास की उन्होंने भरपूर सराहना की।

भजनोपदेशक संदीप आर्य के भजनों ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। ब्रह्मचारियों ने अपनी वैदिक, सांस्कृतिक और देशभक्तिपूर्ण प्रस्तुतियों से सबका दिल जीत लिया। उनके आत्मविश्वास और अनुशासन ने साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन मिलने पर बच्चे कितने ऊँचे उठ सकते हैं।

कार्यक्रम का संचालन आचार्य डॉ. जयेंद्र कुमार और कैप्टन अशोक गुलाटी ने किया। अंत में गुरुकुल प्रबंधन ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कारवान, चरित्रवान, आत्मनिर्भर और राष्ट्रभक्त युवा पीढ़ी का निर्माण ही गुरुकुल शिक्षा का असली उद्देश्य है।यह आयोजन सिर्फ एक संस्कार नहीं था। यह याद दिलाता है कि जब इच्छाशक्ति, अनुशासन और संस्कार एक साथ खड़े होते हैं, तो कोई भी बाधा राह नहीं रोक सकती। आर्ष गुरुकुल नोएडा के इन नवब्रह्मचारियों ने आज जो बीज बोया है, वही कल राष्ट्र की नई सुबह बनेगा।

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