नई दिल्ली, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन ने अपने 54वें स्थापना दिवस पर देशभर के पावर इंजीनियरों से विद्युत क्षेत्र के निजीकरण का पुरजोर विरोध करने का आह्वान किया है।
फेडरेशन के चेयरमैन इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल इंजीनियर पी. रत्नाकर राव ने कहा कि सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था, उपभोक्ता हितों और राष्ट्रीय परिसंपत्तियों की रक्षा के लिए इंजीनियर एकजुट, सजग और तैयार रहें।
यहां जारी एक बयान में कहा गया कि देश को वास्तविक, भारत-विशिष्ट और उपभोक्ता केंद्रित विद्युत सुधारों की जरूरत है, न कि सुधारों के नाम पर सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निजीकरण की। फेडरेशन ने विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025, सार्वजनिक क्षेत्र के डिस्कॉम के निजीकरण, टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग (टीबीसीबी) के माध्यम से ट्रांसमिशन के बड़े पैमाने पर निजीकरण, विद्युत परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण तथा विद्युत उत्पादन (विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा) के बड़े पैमाने पर निजीकरण का कड़ा विरोध किया।
इंजीनियर शैलेन्द्र दुबे और इंजीनियर पी. रत्नाकर राव ने कहा कि भारत की विद्युत व्यवस्था दशकों से सार्वजनिक निवेश, सरकारी सहयोग, उपभोक्ताओं के योगदान और सार्वजनिक ऋण से बनी है। ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क राष्ट्रीय परिसंपत्तियां हैं। इन्हें निजी कंपनियों के लिए केवल लाभदायक उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने चेतावनी दी कि वितरण में निजी कंपनियों को लाभदायक उपभोक्ताओं का चयन करने की अनुमति देने से सार्वजनिक डिस्कॉम पर कृषि, ग्रामीण, गरीब और रियायती उपभोक्ताओं का बोझ बढ़ जाएगा। इससे सार्वजनिक कंपनियों की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी, जबकि निजी कंपनियां सार्वजनिक धन से बने बुनियादी ढांचे का लाभ उठाएंगी। एक ही सार्वजनिक नेटवर्क पर कई वितरण लाइसेंसधारियों को अनुमति देना भी गंभीर चिंता का विषय है।
फेडरेशन ने ट्रांसमिशन परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर टीबीसीबी के उपयोग का भी विरोध किया। ट्रांसमिशन विद्युत व्यवस्था की रीढ़ और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा का आधार है। रणनीतिक ट्रांसमिशन परिसंपत्तियों को लंबे समय के लिए निजी कंपनियों को सौंपना राज्य और केंद्रीय ट्रांसमिशन कंपनियों की भूमिका को कमजोर कर सकता है। फेडरेशन ने मांग की कि इन कंपनियों को पर्याप्त मानव संसाधन, आधुनिक तकनीक, वित्तीय संसाधन और पेशेवर स्वायत्तता देकर मजबूत किया जाए।भूमि, ट्रांसमिशन कॉरिडोर, सब-स्टेशन और विद्युत गृह जैसी परिसंपत्तियां रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्तियां हैं। एसेट मॉनेटाइजेशन इन्हें निजी हाथों में सौंपने का पिछला दरवाजा नहीं बनना चाहिए। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते निजी नियंत्रण पर भी चिंता जताते हुए कहा गया कि देश में नवीकरणीय उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और ग्रिड एकीकरण में सार्वजनिक क्षेत्र की मजबूत क्षमता विकसित करना आवश्यक है।
फेडरेशन ने उपभोक्ता और कर्मचारी केंद्रित सुधारों की मांग की, जिनमें रिक्त पदों पर युवा इंजीनियरों की भर्ती, तकनीकी मानव संसाधन को मजबूत करना, नेटवर्क का आधुनिकीकरण और परिचालन दक्षता बढ़ाना शामिल है।54वें स्थापना दिवस पर फेडरेशन ने संकल्प लिया कि सार्वजनिक विद्युत व्यवस्था की रक्षा, उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और राष्ट्रीय विद्युत परिसंपत्तियों के निजीकरण का विरोध पूरी दृढ़ता से जारी रखा जाएगा। फेडरेशन पावर इंजीनियरों, कर्मचारियों, उपभोक्ताओं, किसानों और समाज के अन्य वर्गों के साथ मिलकर अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेगा।
