ग्रेटर नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
किसान संघर्ष मोर्चा के 250 से अधिक कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों की यमुना प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी के साथ लंबी वार्ता हुई। 21 अक्टूबर को प्राधिकरण पर आंदोलन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच टकराव हुआ था और 12 किसानों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, जिन्हें अगले दिन रिहा कर दिया गया था।
गुरुवार की बैठक में अधिकांश प्रमुख मुद्दों पर समयबद्ध कार्रवाई का आश्वासन मिला।बैठक में 10% आबादी के प्लॉट, ग्रेटर नोएडा के एसआईटी मामलों, यमुना प्राधिकरण के 521 आबादी प्रकरणों, 64.7% अतिरिक्त मुआवजे का भुगतान, जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित युवाओं को रोजगार और पुनर्वास के मकानों की रजिस्ट्री जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक का कार्यवृत्त तैयार किया गया है, जिसकी आधिकारिक प्रतिलिपि मिलते ही सार्वजनिक की जाएगी।
मुख्य मुद्दों पर सहमति:
- 10% आबादी प्लॉट: यमुना प्राधिकरण के बोर्ड का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन स्तर पर सकारात्मक पैरवी का आश्वासन मिला। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने बताया कि 13 नवंबर को अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार सिंह के साथ वार्ता तय है। मोर्चा ने मांग की कि इस बैठक में तीनों प्राधिकरणों के अधिकारी किसान प्रतिनिधियों के साथ मौजूद रहें।
- ग्रेटर नोएडा के एसआईटी मामले: शिफ्टिंग के 211 मामले, बादलपुर के 208 प्रकरण और एसआईटी के अन्य 151 मामले लंबित थे। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने इनके निस्तारण पर सहमति जताई और दो से तीन सप्ताह में कार्रवाई पूरी करने का आश्वासन दिया।
- 521 आबादी प्रकरण: पहले 306 मामले स्वीकृत हुए थे, जिनमें से 206 किसानों की लीज प्रभावित हुई। करीब 190 मामले खारिज किए गए। मोर्चा ने नियमावली के अनुसार दोबारा सुनवाई की मांग की। पुनः सुनवाई शुरू करने पर सहमति बनी।
- 64.7% अतिरिक्त मुआवजा: कुल 4,200 करोड़ रुपये में से करीब 3,200 करोड़ वितरित हो चुके हैं, 1,000 करोड़ बाकी हैं। प्राधिकरण ने अपने हिस्से का भुगतान जल्दी करने और कंपनियों पर दबाव बनाने का आश्वासन दिया।
- एयरपोर्ट प्रभावित युवाओं का रोजगार: इस मुद्दे पर कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि स्थायी रोजगार उपलब्ध नहीं हैं और ज्यादातर काम वेंडर कंपनियों के जरिए होता है। मोर्चा ने कहा कि इस पर आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
- पुनर्वास मकानों की रजिस्ट्री: मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया में तेजी लाने का आश्वासन दिया।
नेताओं के बयान:
सुखबीर खलीफा ने कहा कि सभी लंबित मुद्दों का समाधान होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
सोरन प्रधान ने कहा कि आंदोलन के दबाव में अधिकारियों ने गंभीरता दिखाई।
डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि दो-तीन सप्ताह का आश्वासन महत्वपूर्ण है, लेकिन असली सफलता तभी होगी जब किसानों को न्याय मिले।
वीर सिंह नागर ने चेतावनी दी कि तय समयसीमा में कार्रवाई न हुई तो हजारों किसान फिर प्राधिकरण का घेराव करेंगे।किसान संघर्ष मोर्चा ने कहा कि आंदोलन और गिरफ्तारियों के बाद आज की वार्ता में अधिकांश मुद्दों पर सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि कुछ मुद्दे अभी अनसुलझे हैं। मोर्चा का साफ संदेश है कि केवल आश्वासन काफी नहीं, धरातल पर नतीजे चाहिए। किसानों के अधिकारों, मुआवजे, आबादी और रोजगार के सवालों पर संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक न्यायपूर्ण समाधान न हो जाए।
