- मत्स्य विभाग की उपलब्धियाँ: डॉ. निषाद ने बताया कि 2022 से अब तक 1 लाख से अधिक मछुआ परिवारों को विभिन्न योजनाओं (प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषाद राज बोट योजना, मछुआ दुर्घटना बीमा, कल्याण कोष आदि) का लाभ मिला है। उत्तर प्रदेश इनलैंड फिशरीज में देश में नंबर-1 बना है। उन्होंने कम बजट वाले विभाग में “मलाई” काटने के आरोपों का मजाक उड़ाते हुए कहा कि “मछली के साथ दूध-मलाई नहीं खाई जा सकती”।
- आरक्षण मुद्दा: मझवार-तुरैहा आरक्षण को नहीं भुलाया गया। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही इस मुद्दे का समाधान करेंगे।
- सोनू कश्यप हत्याकांड: जनवरी 2026 में मेरठ में हुए सोनू कश्यप हत्याकांड पर डॉ. निषाद ने खुलासा किया कि वे पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन गाजियाबाद में पुलिस ने उन्हें नजरबंद कर रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता और “पश्चिम के ठेकेदार” जाने दिए गए, लेकिन उन्हें रोका गया। कहा – “अन्याय होने पर हम पहुँचेंगे, चाहे देर से ही सही। हम शांति प्रिय हैं, लेकिन संवैधानिक राह से लड़ेंगे।”
सपा और अखिलेश यादव पर 5 तीखे सवाल:
- निषाद-कश्यप समाज की याद इतने दिन बाद क्यों आई?
- फूलन देवी की प्रतिमा और पार्क लखनऊ में क्यों नहीं बनवाया जब सपा सरकार थी?
- फूलन देवी मामले में CBI जांच की माँग आपके 37 सांसद क्यों नहीं करते? 4 और 5. फूलन देवी की माता जी को सम्मान क्यों नहीं दिया और अंतिम बार उनसे कब मिले?
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जवाब नहीं दिया तो मछुआ समाज सपा की “दलाल राजनीति” में नहीं आएगा।

गुर्जर समाज के लिए प्रमुख मांगें:गुर्जर भाइयों को संबोधित करते हुए डॉ. निषाद ने सरकार के समक्ष रखने की घोषणा की:
- दादरी स्थित सम्राट मिहिर भोज कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा और बेहतर सुविधाएँ।
- स्वतंत्रता सैनानी विजय सिंह पथिक और धन सिंह कोतवाल को मरणोपरांत भारत रत्न।
- मेरठ जिले का नाम बदलकर धन सिंह गुर्जर के नाम पर रखा जाए तथा किसी मुख्य सड़क का नामकरण उनके नाम से।
- पश्चिम UP में महर्षि कश्यप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाए (श्रृंगवेरपुर धाम की तर्ज पर)।
राजनीतिक संकेत:यह महासम्मेलन सपा की हालिया “समानता रैली” (दादरी में) के जवाब में निषाद पार्टी का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। पार्टी पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अपना विस्तार दिखा रही है और निषाद-कश्यप के साथ गुर्जर समीकरण साधने की कोशिश कर रही है। संजय निषाद ने साफ संकेत दिया कि समाज अब किसी दल के “ठेकेदारों” के पीछे नहीं, बल्कि अपनी ताकत से आगे बढ़ेगा।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए, जिसे निषाद पार्टी ने “पूर्वांचल सीमा तोड़ने” वाला शक्ति प्रदर्शन बताया।निषाद पार्टी का संदेश: “समय बदल चुका है। हम किसी की जेब में रहने वाले नहीं, अपनी ताकत से आगे बढ़ने वाले हैं।”
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