स्पेशल स्टोरी: शिक्षा माफियाओं का दबदबा, ऐसे हो रहा है अभिभावकों का शोषण

लखनऊ/नोएडा(नोएडा खबर डॉट कॉम)
निजी स्कूलों में शिक्षा माफियाओं का आतंक बढ़ता जा रहा है। प्रिंसिपलों और स्कूल प्रबंधनों द्वारा अभिभावकों के साथ बदतमीजी, धमकी और दबाव की घटनाएं अब आम हो गई हैं। इसका मकसद सिर्फ एक है — महंगी किताबें, नोटबुक्स, यूनिफॉर्म और स्टडी मटेरियल जबरन बेचकर मोटा मुनाफा कमाना।एक ताजा मामले में एक स्कूल की प्रिंसिपल ने छात्रा की मां के साथ बदतमीजी की। वजह थी कि मां स्कूल द्वारा निर्धारित महंगी किताबें खरीदने से मना कर रही थीं। बाजार में 100-200 रुपये में उपलब्ध किताबें और नोटबुक्स स्कूल 300 से 400 गुना ज्यादा दाम पर बेच रहा था। अभिभावक जब विरोध करते हैं तो उन्हें धमकी दी जाती है — “बच्चे का एडमिशन कैंसल कर देंगे” या “रिजल्ट खराब कर देंगे”।शोषण के तरीके:

  • किताबें-नोटबुक्स बाजार मूल्य से 300-400% महंगे
  • हर साल नई किताबें अनिवार्य करवाना, पुरानी किताबों को बैन करना
  • यूनिफॉर्म, जूते, बैग आदि केवल खास दुकानों से ही खरीदने का दबाव
  • फीस के अलावा अलग से “स्टेशनरी चार्ज” या “किताब चार्ज” वसूलना
  • विरोध करने वाले अभिभावकों को स्कूल में अपमानित करना

इस प्रथा ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है। अभिभावक पहले ही महंगी फीस, बस किराया और कोचिंग का बोझ उठा रहे हैं, उसके ऊपर यह अतिरिक्त शोषण। कई मध्यमवर्गीय परिवार इस वजह से बच्चों की पढ़ाई बीच में छोड़ने या स्कूल बदलने पर मजबूर हो रहे हैं।अभिभावकों की मांग

  • दोषी प्रिंसिपल और स्कूल मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई
  • किताबों की कीमतों पर कैपिंग और बाजार दर से ज्यादा न बेचने का कानून
  • अभिभावक-शिक्षक संघों में पारदर्शी मूल्य निर्धारण की व्यवस्था
  • स्कूलों को किताबें बेचने का लाइसेंस खत्म करना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की गई है कि वे इस “एजुकेशन माफिया” पर लगाम कसें। शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान देना है, न कि अभिभावकों को लूटना।अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो निजी शिक्षा व्यवस्था का विश्वास पूरी तरह टूट जाएगा। अभिभावक संगठन अब इस मुद्दे को लेकर प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।

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