नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
श्रीरामचरितमानस राष्ट्रीय समिति (पंजीकृत) एवं गीता रामायण समिति (पंजीकृत) के संयुक्त तत्वावधान में श्रावण शुक्ल सप्तमी, संवत् 2083 को श्रीराम मंदिर सैक्टर-36, नोएडा में गोस्वामी तुलसीदास जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया गया। यह दोनों समितियों द्वारा आयोजित ग्यारहवाँ समारोह था।
इस पावन अवसर पर मानस मर्मज्ञ कथा व्यास पं. लक्ष्मीनारायण शर्मा ने गोस्वामी तुलसीदास जी के जीवन चरित्र पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तुलसीदास की सभी रचनाओं में
श्रीरामचरितमानस सर्वाधिक लोकप्रिय है। ईश्वरीय प्रेरणा से रचित यह महाकाव्य सनातन धर्म के वेद, पुराण, उपनिषद आदि सभी ग्रंथों में वर्णित मानव कल्याणकारी सूत्रों से ओत-प्रोत है। इसमें पाप और पुण्य की परिभाषा ‘परहित सरिस धर्म नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अघिमाई’ लिखकर जनसामान्य के आचरण के लिए सहज और सुग्राह्य बना दी गई है।
उन्होंने कहा कि दूसरों को किसी भी प्रकार से दुख पहुँचाना महापाप है। सभी पुराण-वेदों का यह निर्णय है कि जो नर शरीर पाकर दूसरों को कष्ट पहुँचाते हैं, उन्हें जन्म-मृत्यु के महान संकट झेलने पड़ते हैं। ये वचन स्वयं भगवान श्रीराम के हैं। वे अपने भाइयों को संत-असंत के लक्षण सुनाते हुए कहते हैं कि ऐसे लोगों के लिए वे कालरूप हैं और उन्हें उनके कर्मानुसार उचित दंड देते हैं। इन कल्याणकारी सूत्रों को अपनाकर ही रामराज्य जैसे सर्वसुखी समाज की कल्पना साकार की जा सकती है।
पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश शंकर त्रिपाठी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस जीवन के हर पहलू पर ऐसे सूत्र संजोए हुए है, जिनसे समाज के हर वर्ग का कल्याण संभव है।
इस अवसर पर गाजियाबाद की शशि गर्ग द्वारा लिखित और श्रीरामचरितमानस राष्ट्रीय समिति द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘सुन्दरकाण्ड-हनुमान चालीसा प्रश्नोत्तरी’ का विमोचन भी किया गया।
समारोह में श्रीरामचरितमानस राष्ट्रीय समिति के अध्यक्ष पं. दिनेश चंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष जगदीश प्रसाद शर्मा ‘सरल’, लीलूराम वर्मा, वैद्य ए.के. त्रिपाठी, सूरजमान शर्मा, सी.एस. भोगल, डॉ. रविन्द्र कुमार, डॉ. अंकित अवाना, पत्रकार विनोद शर्मा, मिक्कीलाल शर्मा, मांगेराम भारद्वाज, राधेश्याम शर्मा, हुकमचन्द्र शर्मा आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मंच संचालन पत्रकार राजेश बैरागी ने किया।
