वाराणसी, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती के अवसर पर रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में 28 विभूतियों को ‘रामायणी सम्मान’ से नवाजा गया। भारत अध्ययन केंद्र के सहयोग से आयोजित इस समारोह में देशभर के शिक्षाविद, संत, सांसद और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस मौके पर काउंसिल के पदाधिकारियों ने इस सम्मान को अभियान बनाकर देश के हर जिले तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
नैनीताल-उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) के सांसद और काउंसिल के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी अध्यक्ष अजय भट्ट ने कहा कि ‘रामायणी सम्मान’ अब पूरे देश में अभियान के रूप में आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि रामायण साहित्य, भारतीय संस्कृति और राष्ट्रहित में काम करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित कर समाज के सामने लाना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले सके।
छत्तीसगढ़ के सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि सकारात्मक काम करने वालों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उन्होंने अपने प्रदेश में भी यह सम्मान आयोजित करने का आश्वासन दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने काशी और तुलसीदास जयंती से इस पहल की शुरुआत को असाधारण बताया और इसे हर जिले तक पहुंचाने का वादा किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बीएचयू कुलपति प्रो. अजित चतुर्वेदी ने कहा कि यह आयोजन विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है। उन्होंने सभी से रामायण के आदर्शों को जीवन में उतारने की अपील की।सम्मानित पद्मश्री भजन सम्राट अनूप जलोटा ने ‘ऐसी लागी लगन’ समेत भजन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
काउंसिल के ट्रस्टी और संयोजक देवदत्त शर्मा (सेवानिवृत्त आईएएस) ने बताया कि इस सम्मान का उद्देश्य रामायण से प्रेरित साहित्य, अध्यात्म, शोध, संगीत और सामाजिक जागरण में योगदान देने वालों को सम्मानित करना है।
काउंसिल की प्रभारी साध्वी प्रज्ञा भारती ने सीतामढ़ी में मां सीता की भगवती स्वरूप में स्थापना के संकल्प की चर्चा की और मातृशक्ति से सहयोग की अपील की। भारत अध्ययन केंद्र के समन्वयक प्रो. शरदिन्दु कुमार तिवारी ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि कला संकाय की डीन प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने इसे विश्व स्तर तक पहुंचाने की कामना की।
समारोह में हरिद्वार से महर्षि योगी मधुसूदन जी, पद्मश्री आचार्य डॉ. हरिहर कृपालु त्रिपाठी, प्रो. चंद्रमौली उपाध्याय, बाल-व्यास वैदेहीनंदन पंडित वेदांत, सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता भरत नागर, एडीजी पुलिस नवीन अरोड़ा समेत कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
सम्मानित व्यक्तित्व
अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, आर.के. सिन्हा, किशोर कुणाल (मरणोपरांत), डॉ. अर्चना प्रकाश, भगवान दास, डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. अवधी हरि, योगेश्वर प्रसाद देवरानी, आदित्य जैन, अभय माणके, संत हरिओम, नरेंद्रनाथ गगन, योगेश चंद्र शर्मा योगी, संजीव कुमार, डॉ. आशा ओझा, मद्गुल्ला प्रफुल्ला, विनोद कुमार तिवारी, डॉ. चंद्र प्रभा मदान, आचार्य संतोष पांडेय, अजय याग्निक, विंध्याचल मणि त्रिपाठी, राजराधे कृष्ण शर्मा, प्रेम प्रकाश दुबे, त्रिलोकी नाथ पांडेय, रामभनी विवेदी, डॉ. रविशंकर पांडेय और रेखा मेहरा।
अनूप जलोटा, अनुराधा पौडवाल, आर.के. सिन्हा, किशोर कुणाल (मरणोपरांत), डॉ. अर्चना प्रकाश, भगवान दास, डॉ. उदय प्रताप सिंह, डॉ. अवधी हरि, योगेश्वर प्रसाद देवरानी, आदित्य जैन, अभय माणके, संत हरिओम, नरेंद्रनाथ गगन, योगेश चंद्र शर्मा योगी, संजीव कुमार, डॉ. आशा ओझा, मद्गुल्ला प्रफुल्ला, विनोद कुमार तिवारी, डॉ. चंद्र प्रभा मदान, आचार्य संतोष पांडेय, अजय याग्निक, विंध्याचल मणि त्रिपाठी, राजराधे कृष्ण शर्मा, प्रेम प्रकाश दुबे, त्रिलोकी नाथ पांडेय, रामभनी विवेदी, डॉ. रविशंकर पांडेय और रेखा मेहरा।
अजय भट्ट ने काउंसिल की अन्य पहलों का भी जिक्र किया। कोरोना काल में डिजिटल रामलीला, अयोध्या मंदिर संघर्ष पर 1250 पृष्ठों का ग्रंथ ‘श्रीरामलला—मन से मंदिर तक’, पाक्षिक पत्रिका ‘रामायण वार्ता’ और सीतामढ़ी में 12 एकड़ भूमि पर मां सीता की महालक्ष्मी स्वरूप स्थापना का संकल्प प्रमुख हैं। 25 अप्रैल 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वहां शिलापूजन किया था और 29 जुलाई 2026 से जीर्णोद्धार कार्य शुरू हो चुका है।कार्यक्रम के अंत में देवदत्त शर्मा ने सभी अतिथियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
