- झारखंड में 67.4 प्रतिशत
- बिहार में 52.3 प्रतिशत
- पश्चिम बंगाल में 50 प्रतिशत
- उत्तराखंड में 22.3 प्रतिशत
- उत्तर प्रदेश में 12.1 प्रतिशत
अमित गुप्ता बताते हैं कि सिर्फ बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तीनों राज्य मिलकर कुल कमी का करीब 79 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। आरटीआई जवाब में सीपीसीबी ने यह भी बताया कि गंगा के 112 स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी चल रही है। लेकिन इन जगहों के असली टेस्ट रिजल्ट—जैसे बीओडी, डीओ, पीएच और फेकल कोलीफॉर्म—स्टेशन-वाइज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके अलावा, प्रदूषित नदी क्षेत्रों की जानकारी के लिए सीपीसीबी ने 2022 की पुरानी रिपोर्ट का हवाला दिया है, जबकि हाल की सरकारी सूचनाओं में 2025 की नई असेसमेंट का जिक्र मिलता है। अमित गुप्ता का सवाल है—जब पांच गंगा राज्यों में इतनी बड़ी मात्रा में सीवेज ट्रीटमेंट की कमी है, तो गंगा के सबसे नए और असली पानी की गुणवत्ता टेस्ट क्या बता रहे हैं?
