नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता के आरटीआई से बड़ा खुलासा: गंगा राज्यों में लगभग 3759 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट की कमी

 
नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट अमित गुप्ता को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 10 अगस्त 2026 को मिला आरटीआई जवाब गंगा नदी की सफाई को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने लाया है। गुप्ता के अनुसार, गंगा के मुख्य प्रवाह वाले पांच राज्यों—उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल—में रोजाना कुल 11,785.5 मिलियन लीटर (एमएलडी) सीवेज पैदा होता है। लेकिन इन राज्यों में स्थापित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) की कुल क्षमता सिर्फ 8,026.685 एमएलडी है। यानी लगभग 3,759 एमएलडी सीवेज बिना ट्रीटमेंट के सीधे नदी में जा रहा है।
 आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर राज्यवार कमी इस प्रकार है:

  • झारखंड में 67.4 प्रतिशत
  • बिहार में 52.3 प्रतिशत
  • पश्चिम बंगाल में 50 प्रतिशत
  • उत्तराखंड में 22.3 प्रतिशत
  • उत्तर प्रदेश में 12.1 प्रतिशत

अमित गुप्ता बताते हैं कि सिर्फ बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तीनों राज्य मिलकर कुल कमी का करीब 79 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। आरटीआई जवाब में सीपीसीबी ने यह भी बताया कि गंगा के 112 स्थानों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी चल रही है। लेकिन इन जगहों के असली टेस्ट रिजल्ट—जैसे बीओडी, डीओ, पीएच और फेकल कोलीफॉर्म—स्टेशन-वाइज उपलब्ध नहीं कराए गए। इसके अलावा, प्रदूषित नदी क्षेत्रों की जानकारी के लिए सीपीसीबी ने 2022 की पुरानी रिपोर्ट का हवाला दिया है, जबकि हाल की सरकारी सूचनाओं में 2025 की नई असेसमेंट का जिक्र मिलता है। अमित गुप्ता का सवाल है—जब पांच गंगा राज्यों में इतनी बड़ी मात्रा में सीवेज ट्रीटमेंट की कमी है, तो गंगा के सबसे नए और असली पानी की गुणवत्ता टेस्ट क्या बता रहे हैं?

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