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यूपी में नोटा ने तोड़े कई नेताओं के सपने, जीत के अंतर से ज्यादा रही नोटा की वोट

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लखनऊ, 11 मार्च।

उत्तर प्रदेश के चुनाव में अगर नोटा ना होता तो कई नेता इस समय अपनी जीत का जश्न मना रहे होते जी हां उत्तर प्रदेश के चुनाव में कई ऐसे दिलचस्प मामले सामने आए हैं जिस में नोटा ने नेताओं को पराजित कर दिया या यूं कहिए कि नोटा की वजह से कुछ नेता हारते हारते जीत गए। ऐसा उत्तर प्रदेश के चुनाव में लगभग 20 विधानसभा क्षेत्र में हुआ है जहां वोटों का अंतर 1000 से कम रहा है जबकि नोटा की संख्या कहीं ज्यादा थी।

मंत्री धर्म सिंह सैनी का दिलचस्प उदाहरण

योगी सरकार में मंत्री रहे धर्म सिंह सैनी समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के रूप में नकुड विधानसभा सीट से मात्र 315 वोट से हारे उन्हें भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ने हराया । खास बात यह रही कि इस चुनाव में 710 मतदाताओं ने नोटा को विकल्प के रूप में चुना । सोचिए यदि यह 710 वोट धर्म सिंह सैनी को मिल जाते तो वे चुनाव जीत जाते ।

ऐसे जीती बाजी हार गए नेता

बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ने सपा प्रत्याशी को मात्र 307 मतों से हराया इस विधानसभा क्षेत्र में 1197 मतदाताओं ने नोटा को विकल्प के रूप में चुना और सपा प्रत्याशी जीती बाजी हार गए

कांटे की लड़ाई में कहीं नोटा ने जिताया कहीं हराया

ऐसा ही कुर्सी विधानसभा क्षेत्र में हुआ यहां बीजेपी ने समाजवादी पार्टी को 217 मतों के अंतर से हराया इस सीट पर 1723 मतदाताओं ने नोटा विकल्प चुना अब देखिए श्रावस्ती विधानसभा क्षेत्र का हाल इस सीट को बीजेपी ने 1457 मतों के अंतर से जीता और समाजवादी पार्टी दूसरे नंबर पर रही जबकि इस सीट पर 3198 वोटरों ने नोटा का विकल्प चुना यानी हार के अंतर से दुगने संख्या में वोटरों ने नोटा का बटन दबाया ऐसा ही रामनगर सीट पर हुआ यहां समाजवादी पार्टी ने भाजपा को 261 वोटों से हराया इस सीट पर नोटा को वोट देने वालों की संख्या 1822 थी सुल्तानपुर विधानसभा क्षेत्र को बीजेपी ने 1009 वोट से जीता सपा दूसरे स्थान पर थी योगी नोटा को वोट देने वालों की संख्या 1443 थी।

रालोद भी एक जीती सीट हार गई

बड़ौत विधानसभा बीजेपी ने 315 वोट से जीत कर राष्ट्रीय लोक दल को मात दी इस सीट पर 579 मतदाताओं ने नोटा को वोट किया सोचिए यदि नोटा का विकल्प ना होता तो इनमें से कई ऐसे जनप्रतिनिधि हैं या तो हारते या जो हार गए वह जीत जाते

क्या नोटा की हैसियत बढ़ेगी या …….

खैर नोटा के विकल्प की भूमिका अब लोगों को समझ में आने लगी है आने वाले दिनों में कहीं ऐसा ना हो कि किसी सीट पर नोटा के वोट कितने ज्यादा हो जाएं की चुनाव आयोग को दोबारा चुनाव कराने पढ़ें क्या नोटा की अहमियत बढ़ेगी या घटेगी यह राजनीतिक दलों को उम्मीदवारों को चुनाव आयोग को मिलकर सोचना है आज की यह दिलचस्प खबर आपके लिए

( Noidakhabar.com के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा की विशेष रिपोर्ट)

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