नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
यह एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी है जो एक छोटे से कदम से शुरू होकर हजारों जिंदगियों को छूने वाली यात्रा बन गई।साल 2011 था। नोएडा के सेक्टर 56 स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर में कुछ लोग इकट्ठा हुए। उनके मन में बस एक साधारण-सा विचार था—रक्तदान करके किसी की जान बचाई जाए। उस पहली बार जब कैंप लगा, तो महज 68 यूनिट खून इकट्ठा हुआ। लेकिन उस छोटी-सी शुरुआत में एक बड़ा संकल्प छिपा था। मन्दिर के ट्रस्ट से जुड़े अध्यक्ष आर. एन. गुप्ता, सचिव ओ. पी. गोयल,कोषाध्यक्ष जी. के. बंसल व मैनेजिंग ट्रस्टी जे एम सेठ व कैम्प प्रभारी ए के गुप्ता ने ठान लिया कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक निरंतर सेवा होगी।हर साल, बिना रुके, बिना थके, वे इस मंदिर के प्रांगण में रक्तदान शिविर लगाते रहे। शुरुआत में लोग कम आते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह खबर फैली। लोग समझने लगे कि एक पिन की चुभन से किसी सैनिक की जान बच सकती है, किसी बच्चे का भविष्य सुरक्षित हो सकता है, किसी परिवार की मुस्कान वापस लौट सकती है। और फिर संख्याएँ खुद बोलने लगीं—2011: 68 यूनिट
साल दर साल बढ़ती हुई यात्रा…
2023: 2100 यूनिट — एक अविश्वसनीय छलांग!
2025: 1000+ यूनिट (भले ही थोड़ा कम रहा, लेकिन संकल्प उतना ही मजबूत)
यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। ये 2100+ परिवारों की कहानियाँ हैं, हजारों सैनिकों की ताकत हैं, अस्पतालों में इंतजार कर रहे मरीजों की उम्मीद हैं। पूरा खून भारतीय सेना की मदद के लिए जाता है—क्योंकि ट्रस्ट का मानना है कि जो देश की रक्षा के लिए सीना तानकर खड़े रहते हैं, उनकी मदद करना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।इस यात्रा में साथ मिला—अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पीजीआई ऑफ चाइल्ड हॉस्पिटल नोएडा सेक्टर 30 और डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल, सेक्टर 39 नोएडा और न जाने कितने स्वयंसेवकों का। लेकिन सबसे बड़ी ताकत थी—लोगों का भरोसा।
हर साल हजारों लोग मंदिर आते हैं, अपनी बारी का इंतजार करते हैं, एक गिलास जूस पीते हैं और मुस्कुराते हुए कहते हैं—”एक और जिंदगी बचा ली!”
15 मार्च को फिर वही माहौल होगा। सुबह 8:30 से शाम 5:00 तक, लक्ष्मी नारायण मंदिर में वो पवित्र कार्य फिर शुरू होगा। यह सिर्फ ब्लड डोनेशन कैंप नहीं—यह एकता, सेवा और मानवता का उत्सव है।संदेश बहुत साफ है—
एक छोटा सा दान, एक पिन की चुभन, एक पल का समय… लेकिन उससे किसी की पूरी दुनिया बदल सकती है। क्या आप भी उस बदलाव का हिस्सा बनेंगे?
क्योंकि जैसा जे. एम. सेठ जी कहते हैं—”रक्तदान महादान है, जीवनदान है।”आइए, इस 15 मार्च को हम सब मिलकर एक नया रिकॉर्ड बनाएँ—न सिर्फ यूनिट्स का, बल्कि प्यार और करुणा का।
एक ड्रॉप बचाएगी कई जानें।
आपका एक ड्रॉप, किसी की पूरी जिंदगी।
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