नोएडा: लक्ष्मी नारायण मंदिर ने रचा इतिहास, 221 यूनिट रक्तदान के साथ छठा विशाल रक्तदान महोत्सव हुआ यादगार

-एक छोटे से मंदिर प्रांगण से निकली एक बड़ी लहर
– मानवता को नई सांस दी।“एक बूंद रक्त, एक नई जिंदगी
नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा के सेक्टर-56 स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर रविवार को सिर्फ एक पूजा स्थल नहीं रहा – वह उस दिन एक जीवनदायिनी शक्ति का केंद्र बन गया। जहां भगवान लक्ष्मी-नारायण की कृपा से लोग आशीर्वाद लेने आते हैं, वहीं इस दिन सैकड़ों दिलों ने फैसला किया कि वे खुद किसी की जिंदगी का आशीर्वाद बनेंगे।
सुबह से शाम तक मंदिर प्रांगण में उत्साह की लहर दौड़ती रही। 366 दाताओं ने आगे बढ़कर अपना रक्त देने की इच्छा जताई। मेडिकल जांच के बाद 221 यूनिट रक्त सफलतापूर्वक एकत्र किया गया – जो नोएडा जिले के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। बाकी 145 लोगों को स्वास्थ्य कारणों से बाद में आने के लिए कहा गया, लेकिन उनका उत्साह भी कम नहीं था।इस महोत्सव की खास बात यह थी कि इसमें सिर्फ आम लोग ही नहीं, बल्कि पत्रकार बंधु भी शामिल हुए। उन्होंने खुद कैमरा छोड़कर सुई थामी और संदेश दिया – “हम खबरें दिखाते हैं, लेकिन आज हम खबर बन गए – खबर जिंदगी बचाने की।”सिर्फ रक्तदान ही नहीं – एम्स, नई दिल्ली की टीम ने नेत्रदान और अंगदान का भी संदेश दिया। 10 दाताओं ने हृदय से संकल्प लिया कि उनकी अंतिम यात्रा के बाद भी उनकी आंखें किसी को रोशनी देंगी और उनके अंग किसी की जिंदगी संवारेंगे।इस नेक कार्य को बल मिला जब कई गणमान्य व्यक्तियों ने आकर दाताओं का उत्साह बढ़ाया।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद डॉ. महेश शर्मा, एनईए के महासचिव वी.के. सेठ, पंजाबी विकास मंच के वाइस चेयरमैन संजीव पुरी, आरडब्ल्यूए प्रधान संजय मावी, फोनरवा के योगेंद्र शर्मा सहित कई लोगों ने आकर दाताओं को प्रेरित किया। उनका आना इस बात का प्रमाण था कि समाज का हर वर्ग इस नेक काम में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।इस पूरे आयोजन के पीछे थी एक छोटी लेकिन समर्पित टीम।
मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी आर.एन. गुप्ता, ओ.पी. गोयल, जे.एम. सेठ, जी.के. बंसल और मुख्य प्रेरक ए.के. गुप्ता के नेतृत्व में करीब 10 सदस्यों की ब्लड डोनेशन टीम ने दिन-रात मेहनत की। डॉ. मनोज गोयल, करण अनेजा, मेहक सिंह, राजीव अजमानी, पारुल सेठ, रितु सेठ, ऋचा गर्ग जैसी कई नामी-गुमनाम हस्तियां दिन भर दाताओं की सेवा में जुटी रहीं – भोजन की व्यवस्था से लेकर हर छोटी-बड़ी जरूरत पूरी करते हुए।जब शाम ढली, तो मंदिर प्रांगण शांत हो गया, लेकिन वहां की गूंज आज भी जारी है – 221 यूनिट रक्त का मतलब है 221 परिवारों की उम्मीदें, 221 जिंदगियां जो संभवतः बच गईं।यह महोत्सव सिर्फ रक्तदान का नहीं, बल्कि सहानुभूति, एकजुटता और मानवता का उत्सव था।
लक्ष्मी नारायण मंदिर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्ची पूजा मंदिर की मूर्तियों में ही नहीं, बल्कि उन दिलों में भी होती है जो दूसरों के लिए धड़कते हैं।
एक बूंद रक्त से शुरू हुई यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है – यह हर उस इंसान की कहानी है जो आने वाले दिनों में किसी की जिंदगी बचा सकेगा।रक्तदान करो, जीवन दो – क्योंकि हर बूंद मायने रखती है।
लक्ष्मी नारायण मंदिर, नोएडा – जहां भगवान की कृपा इंसानियत के रूप में बरसती है।

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