नोएडा में श्रमिक आंदोलन: भाकपा (मार्क्सवादी) ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप की अपील की

नोएडा/ग्रेटर नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों, खासकर नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वेतन वृद्धि और काम की बेहतर परिस्थितियों को लेकर चल रहे श्रमिक आंदोलन पर भाकपा (मार्क्सवादी) ने चिंता जताई है। पार्टी के महासचिव एम. ए. बेबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पार्टी का कहना है कि नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में कम मजदूरी, लंबे काम के घंटे, महंगाई और कार्यस्थल पर सुरक्षा की चिंताओं के कारण श्रमिकों में आक्रोश लंबे समय से है। हाल ही में गैस आपूर्ति की कमी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं।
तथ्यान्वेषी रिपोर्ट और सांसद का पत्र
19 अप्रैल 2026 को ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल की रिपोर्ट में दावा किया गया कि 13 से 17 अप्रैल के बीच ग्रेटर नोएडा के कासना क्षेत्र में सैकड़ों श्रमिकों, महिलाओं और नाबालिगों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, कासना में करीब 350 नाबालिग और 800 वयस्क हिरासत में हैं।सीपीआई(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने 20 अप्रैल को गौतम बुद्ध नगर पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने सभी गिरफ्तारियों की समीक्षा, निराधार मामलों में रिहाई, FIR की प्रतियां उपलब्ध कराने और CITU कार्यालयों से सील हटाने की मांग की। पत्र में यह भी कहा गया कि CITU नेता गंगेश्वर दत्त शर्मा 9 अप्रैल से नजरबंद हैं।
मुख्य मुद्दे

  • मजदूरी: उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मासिक वेतन 11,314 रुपये से शुरू होता है, जबकि दिल्ली में यह 18,456 रुपये तक है। श्रमिक संगठनों का कहना है कि एनसीआर में बढ़ती महंगाई के मुकाबले यह राशि जीवनयापन के लिए अपर्याप्त है।
  • आंदोलन और कार्रवाई: 13 अप्रैल को नोएडा के विभिन्न सेक्टरों (जैसे सेक्टर-63, 62, 60 आदि) में हजारों श्रमिकों ने सड़क जाम कर वेतन वृद्धि की मांग की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया। कुछ जगहों पर लाठीचार्ज की भी शिकायतें आईं।
  • ट्रेड यूनियन: नोएडा के सेक्टर-8 और भंगेल में CITU के कुछ कार्यालय सील किए गए तथा कई यूनियन नेताओं को नजरबंद या गिरफ्तार किया गया।

भाकपा (मार्क्सवादी) की प्रमुख मांगें

  • दिल्ली-एनसीआर में सभी श्रमिकों के लिए एक समान न्यूनतम वेतन कम से कम 26,000 रुपये प्रति माह तुरंत लागू किया जाए।
  • श्रमिकों, महिलाओं और ट्रेड यूनियन नेताओं पर कथित दमन, झूठे मुकदमों और बिना आधार की गिरफ्तारियों पर रोक लगाई जाए।
  • सभी गिरफ्तार श्रमिकों की समीक्षा कर निराधार मामलों में तत्काल रिहाई की जाए। नजरबंदी समाप्त हो और सील किए गए CITU कार्यालय खोले जाएं।
  • गिरफ्तारी के आधार, वकील से मिलने का अधिकार और FIR की प्रतियां सुनिश्चित की जाएं।
  • नए श्रम कोडों को रद्द किया जाए, क्योंकि ये श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं।

पार्टी ने अपील की है कि प्रदर्शनों को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानने की बजाय इसे श्रम मुद्दे के रूप में देखा जाए और त्रिपक्षीय वार्ता (सरकार-मालिक-श्रमिक) के जरिए समाधान निकाला जाए।

सरकारी पक्ष
उत्तर प्रदेश सरकार ने आंदोलन के बाद तुरंत कार्रवाई करते हुए न्यूनतम मजदूरी में अंतरिम वृद्धि की घोषणा की है। गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों का वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है (अप्रैल 2026 से प्रभावी)। अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिकों के वेतन में भी 21% तक की बढ़ोतरी की गई है। सरकार का कहना है कि स्थिति अब सामान्य हो रही है।

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