स्पेशल स्टोरी: नोएडा के एक RTI एक्टिविस्ट के संकल्प ने बदला केदारनाथ धाम का नजारा

विनोद शर्मा
केदारनाथ धाम, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
हिमालय की ऊँचाइयों पर बसा केदारनाथ धाम सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति की नाजुक संतुलन का भी प्रतीक है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ भोले बाबा के दर्शन के लिए पहुँचते हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों तक इस पवित्र स्थल पर एक गंभीर समस्या छाई रही — अनुपचारित गंदा पानी सीधे मंदाकिनी नदी में बहना और चारों तरफ बिखरा कचरा। जब ज्यादातर लोग इस समस्या को देखकर बस आह भरते या सोशल मीडिया पर पोस्ट करते, तब नोएडा के एक आम नागरिक अमित गुप्ता ने चुपचाप इस लड़ाई को अपने कंधों पर ले लिया। कोई बड़ा नेता नहीं, कोई पर्यावरण वैज्ञानिक नहीं — बस एक जागरूक RTI एक्टिविस्ट, जिनकी आस्था और जिम्मेदारी की भावना उन्हें बार-बार केदारनाथ की ओर खींच लाती थी।

चार साल पहले अमित गुप्ता ने केदारनाथ की वास्तविक स्थिति को करीब से देखा। Island क्षेत्र में नई-नई इमारतें बन रही थीं, हजारों टेंट लग रहे थे, पब्लिक टॉयलेट्स बनाए जा रहे थे, लेकिन इनका गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे मंदाकिनी में जा रहा था। STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) बना जरूर था, लेकिन उससे ज्यादातर टॉयलेट और टेंट कनेक्ट ही नहीं थे। कचरा प्रबंधन की व्यवस्था भी लगभग नाममात्र की थी।अमित गुप्ता ने तय किया — अब चुप नहीं रहना है।उन्होंने चार साल का निरंतर संघर्ष शुरू किया। मुख्यमंत्री उत्तराखंड को पत्र लिखे, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास शिकायतें दर्ज कीं, RTI आवेदन दाखिल किए, बार-बार फॉलो-अप किया, अधिकारियों से मीटिंग्स कीं और दस्तावेजी सबूत जुटाए। कई बार निराशा हाथ लगी। कई बार सुनने को मिला — “बजट नहीं है”, “प्रक्रिया लंबी है”, “समय लगेगा”। लेकिन अमित जी की जिद हिली नहीं।

वे जानते थे कि यह सिर्फ एक पर्यावरण की लड़ाई नहीं, बल्कि भोले बाबा की पवित्र भूमि को बचाने की लड़ाई है।और अब परिणाम दिखने लगा है।हाल ही में नगर पंचायत केदारनाथ से अमित गुप्ता को आधिकारिक जवाब मिला, जो उनके चार साल के संघर्ष का जीवंत प्रमाण है।
Island क्षेत्र में बनी नई 84 इमारतों के सभी टॉयलेट अब STP से कनेक्ट कर दिए गए हैं। इस यात्रा सीजन में STP पूर्ण रूप से शुरू हो जाएगा।
नगर पंचायत क्षेत्र में जहां 1000 टेंट और पब्लिक टॉयलेट्स हैं, वहाँ 20 स्थानों पर 105 पब्लिक टॉयलेट सीट्स को सीप्टिक टैंक से जोड़ दिया गया है। अब गंदा पानी सीधे मंदाकिनी में नहीं जाएगा।
गार्बेज प्रबंधन के लिए नई मशीनें इस साल से शुरू हो रही हैं।

तीन प्रमुख मांगों में से दो पर ठोस काम हो चुका है और तीसरी दिशा में भी सकारात्मक प्रगति दिख रही है।यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की जीत नहीं है। यह बताती है कि लोकतंत्र में आम आदमी भी बदलाव ला सकता है — बस सही मकसद, लगन और सही हथियार (यहाँ RTI और शांतिपूर्ण पत्राचार) की जरूरत होती है। अमित गुप्ता की यह मुहिम उन हजारों अनजाने नायकों की याद दिलाती है जो बिना ट्रम्पेट बजाए, बिना नाम की तलाश किए समाज और प्रकृति के लिए चुपचाप लड़ते रहते हैं।

अगली बार जब आप केदारनाथ यात्रा पर जाएँगे और मंदाकिनी का पानी थोड़ा साफ नजर आए, टॉयलेट्स व्यवस्थित दिखें और कचरा कम हो, तो याद रखिए — इसमें नोएडा के एक साधारण RTI एक्टिविस्ट अमित गुप्ता की जिद और मेहनत का भी एक छोटा सा योगदान है।

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