नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट अमित गुप्ता के सवालों से खुलासा: दिल्ली-एनसीआर में हवा साफ करने के लिए हो रहे हैं गम्भीर प्रयास
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नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट अमित गुप्ता के सवालों से खुलासा: दिल्ली-एनसीआर में हवा साफ करने के लिए हो रहे हैं गम्भीर प्रयास

नोएडा/नई दिल्ली, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए केंद्र सरकार व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा पूछे गए सवालों में जवाब दिए गए हैं।

नोएडा के सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने आरटीआई दाखिल करके पूछा था कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार क्या कर रही है। सीपीसीबी और कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) से मिले जवाब से पता चला है कि पिछले कुछ सालों में कई ठोस कदम उठाए गए हैं। जनवरी 2026 में भी सर्दियों का प्रदूषण चिंता का विषय है, लेकिन सुधार के लिए लगातार काम चल रहा है।

यहां मुख्य बातें: जांच और कार्रवाई

दिसंबर 2021 से अब तक 40 टीमें दिल्ली-एनसीआर में जांच कर रही हैं। 2 जनवरी 2026 तक लगभग 25 हजार फैक्टरियों, प्रोजेक्ट्स और जगहों की जांच हुई। नियम तोड़ने वाली 1,600 से ज्यादा जगहों को बंद करने के आदेश दिए गए।

ईंट भट्टों को बेहतर बनाना

एनसीआर में कुल 4,608 ईंट भट्टे हैं। इनमें से 3,003 को अब ज़िग-ज़ैग तकनीक में बदल दिया गया है, जो कम धुआं छोड़ती है। बाकी पुराने भट्टों को चलने की इजाजत नहीं है।

पराली जलाने पर रोक

2018 से पंजाब, हरियाणा जैसे राज्यों में किसानों को पराली (भूसे) न जलाने के लिए मदद दी जा रही है। अब तक 4 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च हो चुके हैं। लगभग 4 लाख मशीनें बांटी गईं और 42 हजार कस्टम हायरिंग सेंटर खोले गए, ताकि किसान पराली को खेत में ही खाद बना सकें।

ईंट भट्टों में भूसे का इस्तेमाल

एनसीआर के बाहर के भट्टों में अब पैडी स्ट्रॉ (भूसे) से बने पेलेट्स या ब्रिकेट्स का इस्तेमाल करना जरूरी कर दिया गया है।

फैक्टरियों में साफ ईंधन

जनवरी 2023 से एनसीआर में सिर्फ साफ ईंधन इस्तेमाल करने का नियम लागू है। 7,759 फैक्टरियों में से 7,449 अब साफ ईंधन पर आ चुकी हैं।

निर्माण साइट्स पर धूल रोकना

बड़ी निर्माण साइटों पर एंटी-स्मॉग गन लगानी जरूरी हैं। धूल कंट्रोल सेल बनाए गए हैं और ऑनलाइन मॉनिटरिंग भी हो रही है।

अमित गुप्ता का कहना है कि ये कदम अच्छे हैं, लेकिन नोएडा जैसे शहरों में अभी भी कूड़ा जलाना, निर्माण की धूल और स्थानीय प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। इसके लिए और सख्ती की जरूरत है।ये जानकारी बताती है कि सरकार प्रदूषण कम करने के लिए काफी मेहनत कर रही है। अगर ये प्रयास लगातार चलते रहे, तो आने वाले सालों में दिल्ली-एनसीआर की हवा में सुधार और बेहतर हो सकता है

 

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