– NOVRA ने मांगी जांच और रियायती उपयोग
-प्राधिकरण की लापरवाही पर सवाल, डॉ. रंजन तोमर बोले
नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
नोएडा प्राधिकरण की एक और महंगी परियोजना जनता के पैसे की बर्बादी का शिकार हो गई है। 118 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नोएडा बस डिपो आज भी पूरी तरह बेकार पड़ा है। न यहां बसों का संचालन हो रहा है, न ही भवन को किसी अन्य उपयोग में लाया जा सका है।
नोएडा विलेज रेसिडेंट्स एसोसिएशन (NOVRA) के अध्यक्ष डॉ. रंजन तोमर द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में प्राधिकरण ने खुद इसकी पुष्टि की है। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह राशि केवल सिविल कार्यों की है; कुल व्यय इससे कहीं अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों से साफ होता है कि यह परियोजना योजना की कमी, प्रशासनिक लापरवाही और संभावित भ्रष्टाचार का नतीजा है। इतनी बड़ी रकम खर्च कर बनाया गया विशाल भवन अब खराब होने की कगार पर पहुंच चुका है, जो सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है।
NOVRA अध्यक्ष डॉ. रंजन तोमर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,”जनता के पैसे से बनी इमारत को यूं ही सड़ने-गलने के लिए छोड़ देना अपराध से कम नहीं है। प्राधिकरण को जवाब देना होगा कि इस असफलता के लिए जिम्मेदार कौन है? इतने बड़े पैमाने पर बर्बादी कैसे हुई?”
संस्था ने नोएडा प्राधिकरण के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों/ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।
बस डिपो को तत्काल प्रभावी रूप से उपयोग में लाया जाए, जैसे बस संचालन शुरू किया जाए।
जब तक नियमित बस सेवाएं शुरू नहीं होतीं, तब तक इस भवन को आम जनता, एनजीओ, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs) तथा विभिन्न सामाजिक/समुदायिक समितियों को रियायती किराया दरों पर उपलब्ध कराया जाए, ताकि यह खाली पड़ा रहकर बर्बाद न हो और जनहित में उपयोगी साबित हो।
डॉ. तोमर ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो NOVRA इस मुद्दे पर व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी और जिम्मेदार अधिकारियों से हर मंच पर जवाब तलब करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा,”जनता के पैसे की बर्बादी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी!”
इस मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी परियोजनाओं में बेहतर योजना, समयबद्ध निगरानी और पारदर्शिता की कमी से ही ऐसी स्थिति पैदा होती है। NOVRA ने आमजन से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर आवाज उठाएं ताकि सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग रोका जा सके।
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