नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
रामायण रिसर्च काउंसिल के तत्वावधान में शनिवार को सेक्टर-39 में लोकप्रिय सुंदरकाण्ड कथावाचक प्रेम प्रकाश दूबे द्वारा सुंदरकाण्ड का संगीतमय गायन किया गया। आयोजन का उद्देश्य बिहार के सीतामढ़ी स्थित 834 वर्ष प्राचीन श्रीरामजानकी मठ के जीर्णोद्धार के लिए समर्पण-संग्रह जुटाना था।
दूबे ने भावपूर्ण शैली में सुंदरकाण्ड की चौपाइयों और प्रसंगों का संगीतमय प्रस्तुतीकरण किया। भक्तिमय वातावरण में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पाठ का श्रवण किया और मां सीता के प्राकट्य क्षेत्र सीतामढ़ी के प्राचीन मठ के संरक्षण के संकल्प से स्वयं को जोड़ा। मुंबई निवासी दूबे ने काउंसिल के बैनर तले देशभर में सुंदरकाण्ड गायन कर इस जीर्णोद्धार के लिए सहयोग एकत्र करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि सुंदरकाण्ड केवल रामभक्ति का प्रसंग नहीं, सेवा और लोककल्याण की प्रेरणा भी है। उन्होंने श्रद्धालुओं से यथासंभव योगदान देने का आह्वान किया।
काउंसिल के सचिव पितांबर मिश्र ने रामभक्तों और सनातन संस्कृति के प्रति आस्थावान लोगों से इस कार्य से जुड़ने और संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का आग्रह किया। आयोजन में उज्ज्वला शर्मा, अर्चना सिंघल, देव रत्न शर्मा, विनोद जुनेजा समेत दर्जनों हनुमान भक्त उपस्थित रहे।
सीतामढ़ी में तीन चरणों का संकल्प
इस कार्यक्रम के आयोजक और काउंसिल के ट्रस्टी एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. देवदत्त शर्मा ने बताया कि सीतामढ़ी मां जानकी की प्राकट्य भूमि है और वहां के प्राचीन श्रीरामजानकी मठ का संरक्षण सांस्कृतिक दायित्व है। उनके अनुसार, पिछले वर्ष बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद ने काउंसिल को सीतामढ़ी के श्रीरामजानकी स्थान पर करीब 12 एकड़ भूमि आवंटित की थी।प्रथम चरण में प्राचीन मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 25 अप्रैल 2026 को शिलापूजन हुआ, जिसका शिलान्यास बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया।
दूसरे चरण में धरती माता की आरती ‘श्रीभूदेवी आरती’ शीघ्र प्रतिदिन शुरू की जाएगी। तीसरे चरण में 51 शक्तिपीठों से मिट्टी और ज्योत लाकर अखंड ज्योत स्थापित की जाएगी तथा गर्भगृह में श्रीचतुर्भुजा महालक्ष्मी की स्थापना होगी। इसके अलावा 108 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा, जटायु और धनुष की प्रतिमा, जानकी जी से जुड़ा अध्ययन-शोध केंद्र तथा अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्य प्रस्तावित हैं।डॉ. शर्मा ने कहा कि इसी भावना से नोएडा में सुंदरकाण्ड गायन रखा गया, ताकि अधिक से अधिक लोग इस संरक्षण कार्य से जुड़ सकें।