हिंदी साहित्य की बड़ी क्षति: पहाड़ के जीवन को शब्द देने वाले बल्लभ डोभाल पंचतत्व में विलीन, निगमबोध घाट पर दी गई भावभीनी विदाई

नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
देश के महान साहित्यकार बल्लभ डोभाल का रविवार को दिल्ली के निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार हुआ। 97 वर्षीय वरिष्ठ लेखक का शनिवार दोपहर करीब एक बजे निधन हो गया था। उनकी अंतिम यात्रा नोएडा सेक्टर-12 स्थित निवास से शुरू हुई, जहां साहित्य, संस्कृति, कला और पत्रकारिता जगत के लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
पुत्र प्रकाश डोभाल और कैलाश डोभाल ने चिता को मुखाग्नि दी। बड़ी संख्या में साहित्यकार, पत्रकार और शुभचिंतक घाट पर पहुंचे। सभी ने हिंदी साहित्य और पहाड़ी जीवन को शब्द देने वाले उनके योगदान को याद किया।वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार प्रो. प्रदीप कुमार वेदवाल ने कहा कि यह हिंदी साहित्य की बड़ी क्षति है। डोभाल ने समाज, संस्कृति और मानवीय संवेदनाओं को अपनी लेखनी से आवाज दी।
अंतिम संस्कार में पंकज बिष्ट, महेश दर्पण, राजा खुगशाल, भगवती प्रसाद डोभाल, डॉ. रोशन गौड़, कैलाश धूलिया, रमेश ध्यानी और राजेश डंडरियाल समेत कई साहित्यकार व पत्रकार मौजूद रहे। उन्होंने उनके लेखन को अमूल्य योगदान बताया।
पुत्री प्रभा थपलियाल ने बताया कि देश-विदेश से शोक संदेश और फोन आ रहे हैं। पिता ने पाठकों के बीच जो स्थान बनाया, वह याद रखा जाएगा। उन्होंने उपन्यास ‘तिब्बत की बेटी’ सहित अन्य रचनाओं और प्रकाशन के दिनों की स्मृतियां साझा कीं।बल्लभ डोभाल ने कविता, कहानी, उपन्यास और बाल साहित्य के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया। पहाड़ के जीवन, संस्कृति और संवेदनाओं को उन्होंने अपनी रचनाओं में जीवंत किया। साहित्यकार की रचनाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए उनकी विरासत बनी रहेंगी। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है।

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