विनोद शर्मा
नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर सपा-कांग्रेस गठबंधन में नोएडा सीट पर समाजवादी पार्टी का दावा ज्यादा मजबूत माना जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सपा इस बार पहली बार नया प्रत्याशी उतार सकती है और किसी ब्राह्मण उम्मीदवार पर विचार कर रही है। 2012,2017 व 2022 तक सपा यहां से तीन बार सुनील चौधरी को ही मैदान में उतारती रही है।
चुनावी आंकड़े सपा के लगातार दूसरे स्थान पर रहने और कांग्रेस के वोट बैंक के लगातार सिकुड़ने की तस्वीर दिखाते हैं। नोएडा सीट पर भाजपा का कब्जा 2012 से बना हुआ है। मौजूदा विधायक पंकज सिंह ने 2017 और 2022 दोनों चुनाव बड़ी बढ़त से जीते।
पिछले चुनावों का गणित
2012 में नोएडा नई सीट के रूप में बनी। भाजपा के डॉ महेश शर्मा 36.87 प्रतिशत वोट लेकर जीते। सपा के सुनील चौधरी को 20.06 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस को 12.15 प्रतिशत वोट मिले और बसपा दूसरे स्थान पर रही। 2014 के उपचुनाव में भाजपा की विमला बाथम ने 60.97 प्रतिशत वोट पाए। सपा की काजल शर्मा को करीब 25 प्रतिशत वोट मिले। कांग्रेस का हिस्सा 10.45 प्रतिशत रह गया।
2017 में पंकज सिंह ने 63.84 प्रतिशत वोट लेकर जीत दर्ज की। सुनील चौधरी को 22.96 प्रतिशत वोट मिले। बसपा तीसरे स्थान पर रही।2022 में पंकज सिंह का वोट शेयर बढ़कर 70.16 प्रतिशत हो गया। सुनील चौधरी को 18.04 प्रतिशत वोट मिले। बसपा 4.68 प्रतिशत के साथ तीसरे और कांग्रेस 3.88 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर रही।
सपा का वोट प्रतिशत इन चुनावों में 18 से 25 प्रतिशत के बीच रहा। कांग्रेस का वोट बैंक 2012 के 12 प्रतिशत से गिरकर 2022 में 4 प्रतिशत से भी कम रह गया। 2017 में यह सीट कांग्रेस के कोटे में नहीं थी।
गठबंधन में दावे का आधार
सूत्रों का कहना है कि सपा का लगातार दूसरा स्थान और स्थिर वोट बैंक गठबंधन में उसके दावे को मजबूत बनाता है। कांग्रेस का स्थानीय आधार काफी कमजोर हो चुका है। अगर दोनों पार्टियां साथ लड़ती हैं तो सपा के वोट में कांग्रेस का छोटा हिस्सा जुड़ने की संभावना जताई जा रही है। सपा इस बार सुनील चौधरी की जगह नया चेहरा उतारने की तैयारी में बताई जा रही है।
ब्राह्मण प्रत्याशी पर विचार इसलिए हो रहा है कि नोएडा में शहरी मतदाताओं और विभिन्न समुदायों का मिश्रण है। पंकज सिंह के खिलाफ नया चेहरा कितना असरदार साबित होता है, यह देखना बाकी है।
भाजपा की ओर से पंकज सिंह का प्रदर्शन अब तक बहुत मजबूत रहा है। 2022 में उनकी जीत का अंतर 1.81 लाख वोट से ज्यादा था। विकास कार्यों और संगठन की ताकत को भाजपा अपनी ताकत मानती है। विपक्ष का कहना है कि लंबे समय से एक ही पार्टी के कब्जे वाली सीट पर बदलाव की संभावना तलाशी जा रही है।
2027 के चुनाव अभी दूर हैं। गठबंधन की अंतिम सीट बंटवारे और प्रत्याशी चयन पर फैसला आगे होगा। नोएडा का चुनावी समीकरण शहरी मतदाताओं, प्रवासी आबादी और स्थानीय मुद्दों पर काफी हद तक निर्भर करता है। पिछले आंकड़े बताते हैं कि सपा यहां लगातार दूसरे नंबर की पार्टी बनी रही है, जबकि कांग्रेस का आधार तेजी से घटा है। यही कारण है कि गठबंधन में सपा का दावा फिलहाल मजबूत माना जा रहा है।
