नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने मंगलवार को सिर्फ मादक पदार्थ नष्ट नहीं किए, युवा पीढ़ी को एक सीधी चेतावनी भी दी। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में चले “ऑपरेशन दहन” में 972.283 किलोग्राम नशा जलाया और नष्ट किया गया। कीमत करीब 5 करोड़ 23 लाख रुपये। कागज पर यह एक पुलिस कार्रवाई है। असल में यह उस माल का अंत है, जो किसी के करियर, परिवार और भविष्य को चुपचाप खा जाता।
यह माल छह थानों के 253 एनडीपीएस मामलों से जुड़ा था। सबसे ज्यादा गांजा था 907.622 किलोग्राम, कीमत करीब 4.54 करोड़ रुपये। इसके साथ चरस, डोडा, कोकीन, एमडीएमए और नशीली गोलियां भी थीं। कोकीन महज 115 ग्राम था, लेकिन कीमत करीब 57.50 लाख रुपये बैठती है। यानी नशा मात्रा से नहीं, बर्बादी से पहचाना जाता है। थोड़ा भी काफी होता है जिंदगी मोड़ने के लिए।
थाना बादलपुर से सबसे बड़ी खेप आई—630.88 किलोग्राम गांजा और भारी मात्रा में डोडा। सेक्टर-63, सेक्टर-113, सेक्टर-126, सेक्टर-39 और रबूपुरा के मामले भी इसी ढेर में शामिल हुए। अदालत के आदेश पर, नार्कोटिक्स इकाई की निगरानी में अधिकृत एजेंसी ने यह माल जलाया। ताकि कल कोई तस्कर इसे दोबारा बाजार में न उतार सके।युवाओं के लिए यही असल खबर है। नशा चमकता हुआ सौदा लगता है, लेकिन अंत उसी आग में होता है जिसमें यह माल आज जला। जो पैकेट कैंपस, पार्टी या दोस्ती के नाम पर आता है, वही किसी थाने की मजबूती और किसी अदालत के आदेश तक पहुंचता है। बीच में पढ़ाई छूटती है, घर टूटता है, शरीर कमजोर पड़ता है। पुलिस बाद में आती है। नुकसान पहले हो चुका होता है।

कमिश्नरेट का संदेश साफ है। तस्करों पर शिकंजा जारी रहेगा, जब्त माल नष्ट होता रहेगा। लेकिन असली जीत तभी है जब युवा खुद इस चक्र से बाहर रहें। दोस्त के दबाव, रात की मजबूरी या “एक बार से कुछ नहीं होता” वाला झूठ इसी 972 किलो में दफन है। एक बार का नशा भी किसी के लिए आखिरी पन्ना बन सकता है।ऑपरेशन दहन ने दिखाया कि नशा आखिरकार राख बनता है। युवा पीढ़ी को तय करना है कि राख उनकी मेहनत की हो या उनकी जिंदगी की। पुलिस नशा जला सकती है। भविष्य बचाना युवा के हाथ में है।