नई दिल्ली/ नोएडा(नोएडा खबर डॉट कॉम)
दिल्ली सरकार के परिवहन विभाग से मिले आरटीआई जवाब में सामने आया है कि पर्यावरण मुआवजा शुल्क (ईसीसी) के रूप में मिले कुल 1,935.44 करोड़ रुपये में से केवल 781.51 करोड़ रुपये (40.38%) खर्च हुए हैं। 7 अगस्त 2026 की स्थिति के अनुसार 1,153.93 करोड़ (59.62%) अब भी बचा हुआ है। यानी फंड का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा अनुपयोगी पड़ा है।
यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता की आरटीआई पर विभाग के जवाब से मिली है। ईसीसी सुप्रीम कोर्ट के 2015 के आदेश के बाद लगाया गया शुल्क है। इसे दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाणिज्यिक वाहनों पर वसूला जाता है, ताकि प्रदूषण कम करने के उपायों के लिए पैसा जुटे। वसूली एमसीडी करती है और राशि दिल्ली सरकार के खाते में जाती है।
अमित गुप्ता के अनुसार एमसीडी ने करीब 2,200 करोड़ ईसीसी वसूले, जिनमें से करीब 1,935 करोड़ दिल्ली सरकार को हस्तांतरित हुए। एक रिपोर्ट के अनुसार एमसीडी ने 6 नवंबर 2015 से 10 अप्रैल 2026 तक कुल 2,247.66 करोड़ वसूले।
अब तक कहां गया पैसा
खर्च की गई राशि का बड़ा हिस्सा परिवहन परियोजनाओं में गया। आरटीआई में प्रमुख आवंटन ये बताए गए:
मार्च 2019 में एनसीआरटीसी को दिल्ली–मेरठ आरआरटीएस के लिए 265 करोड़
मई 2023 में उसी कॉरिडोर के लिए 500 करोड़
दोनों भुगतान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के संदर्भ में हुए। रिपोर्ट के अनुसार कुल खर्च 781.51 करोड़ में से करीब 765 करोड़ अकेले आरआरटीएस में गए, यानी खर्च का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा इसी परियोजना में लगा। बाकी राशि एचसीएनजी परियोजना, आरएफआईडी संबंधी खर्च और गैर-मोटर चालित वाहन लेन जैसे छोटे कार्यों में बताई गई है।
क्या सवाल उठ रहे हैं
अमित गुप्ता का कहना है कि आरटीआई जवाब से ईसीसी फंड के उपयोग, निगरानी और पर्यावरणीय परिणामों में पारदर्शिता की जरूरत साफ होती है। दिल्ली-एनसीआर हर साल प्रदूषण से घुटता है, लेकिन हजारों करोड़ रुपये बिना दीर्घकालिक योजना के पड़े रहते हैं। सवाल ये है कि बची हुई बड़ी राशि कैसे खर्च होगी और अब तक हुए खर्च से प्रदूषण पर कितना मापने योग्य असर पड़ा। सुप्रीम कोर्ट पहले भी शेष फंड को दीर्घकालिक उपायों और सीएक्यूएम की सिफारिशों पर लगाने की बात कह चुका है।
विभाग की ओर से शेष राशि के उपयोग की नई विस्तृत योजना अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हुई है।
