नोएडा,(नोएडा
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हड़ताल के दिनों में सेंचुरी अपार्टमेंट ने साबित किया—इंतजार करना मजबूरी हो सकती है, जिम्मेदारी नहीं, सेक्टर-100 के सेंचुरी अपार्टमेंट में इन दिनों सफाई सिर्फ प्राधिकरण का काम नहीं रह गई। प्राधिकरण के स्वच्छता कर्मी करीब एक सप्ताह से हड़ताल पर हैं। पूरे शहर में कूड़ा बढ़ा, गलियां पटीं, नालियों से बदबू आई। सेंचुरी अपार्टमेंट भी इससे अछूता नहीं था। फिर वहां के AOA ने इंतजार करने की जगह खुद आगे बढ़ाया।
फोनरवा के कोषाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता पवन यादव कहते हैं, हड़ताल लंबी खिंचती गई तो सोसायटी में जगह-जगह कूड़ा जमा होने लगा। मौसम ऐसा है कि गंदगी मच्छर और संक्रमण बुला सकती है। तब साफ फैसला हुआ—हड़ताल खत्म होने तक अपने स्तर पर कर्मी लगाकर सफाई चलती रहेगी। निवासियों का स्वास्थ्य इंतजार नहीं कर सकता।यह छोटा सा फैसला लगता है। लेकिन इसके पीछे एक बड़ी बात है। संकट आने पर अक्सर लोग दोष देते हैं, ज्ञापन लिखते हैं और रुक जाते हैं।
सेंचुरी अपार्टमेंट के निवासियों ने शिकायत के साथ काम भी शुरू किया। गंदगी इकट्ठा होने से पहले हाथ बढ़ा दिए।अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना है कि AOA का काम केवल बैठकें और बिल नहीं है। निवासियों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण देना भी उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है। हड़ताल के दौरान वैकल्पिक व्यवस्था इसलिए की गई कि किसी को बीमारी या परेशानी न हो। महासचिव वी. के. टमटा कहते हैं, जब तक नियमित कर्मी वापस नहीं आते, RWA और AOA को निजी स्तर पर मदद मिलनी चाहिए। अगर सोसायटियां खुद कर्मी लगाएं तो उनके भुगतान की व्यवस्था प्राधिकरण करे। यानी उन्होंने सिर्फ व्यवस्था नहीं संभाली, व्यवस्था की मांग भी रखी।
इस कहानी की सीख साफ है। बड़े संकट का हल हमेशा ऊपर से नहीं आता। कभी-कभी एक सोसायटी का छोटा कदम पूरे मोहल्ले को याद दिलाता है कि स्वच्छता व्यवस्था नहीं, आदत है। और आदत तब बनती है जब कोई इंतजार बंद कर काम शुरू कर दे।
सेंचुरी अपार्टमेंट AOA का संदेश सरल है—स्वच्छता स्वस्थ जीवन की पहली जरूरत है। हड़ताल खत्म होगी या नहीं, यह समय तय करेगा। लेकिन जब शहर रुकता है तब भी कोई समुदाय अगर अपने आंगन को साफ रख सकता है, तो वह इंतजार नहीं, उदाहरण बन जाता है।
