नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
श्री राम रसायन सेवा संस्थान के तत्वावधान में सेक्टर 56 में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास आचार्य मनीष कौशिक जी महाराज ने दान, भक्ति और भगवान के भक्तवत्सल स्वरूप पर प्रकाश डाला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
महाराज श्री ने कहा कि कलियुग में दान का विशेष महत्व है और शास्त्रों में इसे धर्म का आधार माना गया है। राजा बलि और भगवान वामन की कथा सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भक्त के सम्मान और उसकी मनोकामना पूरी करने के लिए स्वयं भगवान विष्णु वामन रूप में पृथ्वी पर आए। इससे स्पष्ट होता है कि भगवान अपने भक्तों को कितना मान देते हैं।
उन्होंने कहा कि दान केवल धन का नहीं, सेवा, समय, सद्भावना और समर्पण का भी होना चाहिए।कथा में कहा गया कि सच्ची भक्ति भगवान को भी भक्त के वश में कर देती है। भगवान सदैव भक्तों की रक्षा करते हैं और उनका कल्याण करते हैं।
महाराज श्री ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के चरित्र का भी वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम धर्म के साक्षात स्वरूप, त्याग की मूर्ति, आदर्श पुत्र, आदर्श पति और आदर्श राजा हैं। रावण जैसे अत्याचारी का विनाश कर उन्होंने धर्म की स्थापना की और नारी सम्मान की रक्षा का उदाहरण प्रस्तुत किया। राम जन-जन के नायक, भारत की आत्मा और धर्म की मूर्ति हैं। उनका चरित्र संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने कहा कि रामायण और भागवत केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला सिखाने वाले मार्गदर्शक हैं। इनके आदर्शों से समाज में प्रेम, सद्भाव, मर्यादा और आध्यात्मिक चेतना बढ़ सकती है।कथा के उत्तरार्ध में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन हुआ। श्रद्धालुओं ने मंगल बधाइयाँ गाईं, पुष्पवर्षा की और प्रसाद वितरित किया। पंडाल “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।
महाराज श्री ने कहा कि श्रीकृष्ण पूर्णावतार हैं और समस्त रसों से परिपूर्ण हैं। वृंदावन की मधुर लीलाएँ, गोपियों का निष्काम प्रेम और भगवान की दिव्य क्रीड़ाएँ भक्तों को प्रेम, समर्पण और ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा देती हैं। यही रस जीवन को आनंदमय बनाता है।समापन पर श्रद्धालुओं ने नाम-संकीर्तन किया और समाज, राष्ट्र तथा विश्व के कल्याण की प्रार्थना की। सभी ने कथा के संदेशों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

