-दादरी पर टिकी उम्मीद, नोएडा-जेवर पर चुनौती बड़ी;
गुर्जर-PDA पर दांव, BJP का विकास कार्ड मजबूत
नोएडा, (नोएडा खबर डॉट कॉम)
उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी (सपा) के लिए गौतमबुद्ध नगर जिले की तीन विधानसभा सीटें—नोएडा, दादरी और जेवर—लंबे समय से “अभेद्य” क्षेत्र बनी हुई हैं। पार्टी की स्थापना (1992) के बाद से इन सीटों पर सपा का खाता अभी तक नहीं खुला है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी BJP ने तीनों सीटें बड़े अंतर से जीती थीं। अब 2027 के चुनावों से पहले सवाल यह है कि क्या यूपी की नंबर-2 पार्टी यहां अपनी पहली जीत दर्ज करा पाएगी।
इतिहास और 2022 का प्रदर्शन
दादरी सीट पर सपा कभी विजयी नहीं हुई। 2022 में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी को 79,850 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर ने 1.38 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की। नोएडा में 2012 से लगातार बीजेपी का कब्जा है। 2022 में पंकज सिंह ने सपा के सुनील चौधरी को 1.81 लाख से अधिक वोटों से हराया। जेवर में भी सपा का खाता नहीं खुला और बीजेपी के धीरेंद्र सिंह विजेता रहे। इन नतीजों के पीछे नोएडा का शहरी विकास और जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (जून 2026 से चालू) जैसे मुद्दे BJP के पक्ष में गए हैं।
दादरी सीट पर सपा कभी विजयी नहीं हुई। 2022 में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी को 79,850 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे, जबकि बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर ने 1.38 लाख से अधिक वोटों के अंतर से जीत हासिल की। नोएडा में 2012 से लगातार बीजेपी का कब्जा है। 2022 में पंकज सिंह ने सपा के सुनील चौधरी को 1.81 लाख से अधिक वोटों से हराया। जेवर में भी सपा का खाता नहीं खुला और बीजेपी के धीरेंद्र सिंह विजेता रहे। इन नतीजों के पीछे नोएडा का शहरी विकास और जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (जून 2026 से चालू) जैसे मुद्दे BJP के पक्ष में गए हैं।
सपा की रणनीति
सपा ने 2027 की तैयारी में जानबूझकर अपने सबसे कमजोर इलाके से अभियान शुरू किया। मार्च 2026 में अखिलेश यादव ने दादरी में “समाजवादी समानता भाईचारा रैली” की और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ गुर्जर वोट बैंक पर फोकस किया। दादरी और जेवर में गुर्जर मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली मानी जाती है। पार्टी ने संगठन में बदलाव किए हैं और राजकुमार भाटी जैसे स्थानीय चेहरों को सक्रिय रखा है। सपा का दावा है कि पश्चिमी यूपी की करीब 100 सीटों पर गुर्जर फैक्टर से फायदा हो सकता है।
सपा ने 2027 की तैयारी में जानबूझकर अपने सबसे कमजोर इलाके से अभियान शुरू किया। मार्च 2026 में अखिलेश यादव ने दादरी में “समाजवादी समानता भाईचारा रैली” की और PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ गुर्जर वोट बैंक पर फोकस किया। दादरी और जेवर में गुर्जर मतदाताओं की संख्या प्रभावशाली मानी जाती है। पार्टी ने संगठन में बदलाव किए हैं और राजकुमार भाटी जैसे स्थानीय चेहरों को सक्रिय रखा है। सपा का दावा है कि पश्चिमी यूपी की करीब 100 सीटों पर गुर्जर फैक्टर से फायदा हो सकता है।
चुनौतियां
नोएडा के शहरी और मध्यमवर्गीय मतदाताओं में BJP का ठोस आधार है। जेवर में एयरपोर्ट और विकास के काम BJP को मजबूत स्थिति देते हैं। गुर्जर वोट निर्णायक हो सकते हैं, लेकिन BJP के पास स्थानीय चेहरे हैं। जाट वोटों पर RLD का प्रभाव है और RLD NDA के साथ है, जिससे सपा के लिए मुश्किल बढ़ जाती है। 2022 में सपा दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन अंतर बहुत बड़ा था। खाता खोलने के लिए बड़े उलटफेर की जरूरत है। मतदाता सूची पुनरीक्षण के बाद दादरी जिले की सबसे बड़ी सीट बन गई है, जो समीकरण बदल सकता है।
नोएडा के शहरी और मध्यमवर्गीय मतदाताओं में BJP का ठोस आधार है। जेवर में एयरपोर्ट और विकास के काम BJP को मजबूत स्थिति देते हैं। गुर्जर वोट निर्णायक हो सकते हैं, लेकिन BJP के पास स्थानीय चेहरे हैं। जाट वोटों पर RLD का प्रभाव है और RLD NDA के साथ है, जिससे सपा के लिए मुश्किल बढ़ जाती है। 2022 में सपा दूसरे स्थान पर रही थी, लेकिन अंतर बहुत बड़ा था। खाता खोलने के लिए बड़े उलटफेर की जरूरत है। मतदाता सूची पुनरीक्षण के बाद दादरी जिले की सबसे बड़ी सीट बन गई है, जो समीकरण बदल सकता है।
विश्लेषण
दादरी सपा के लिए सबसे बेहतर मौका है। अगर पार्टी गुर्जर-यादव-मुस्लिम-PDA को एकजुट कर मजबूत उम्मीदवार उतारे, तो चुनौती दी जा सकती है। नोएडा और जेवर पर संभावना कम है। नोएडा लगभग BJP का अभेद्य दुर्ग माना जाता है, जबकि जेवर में विकास का मुद्दा BJP के पक्ष में है। कुल मिलाकर, सपा के लिए गौतमबुद्ध नगर में खाता खोलना मुश्किल लेकिन असंभव नहीं है। सफलता मुख्य रूप से दादरी पर निर्भर करेगी। उम्मीदवार चयन, गुर्जर-PDA गठजोड़ की ताकत और BJP के खिलाफ स्थानीय नाराजगी निर्णायक हो सकते हैं। 2027 तक माहौल बदल सकता है, लेकिन फिलहाल BJP का पलड़ा भारी दिख रहा है।
दादरी सपा के लिए सबसे बेहतर मौका है। अगर पार्टी गुर्जर-यादव-मुस्लिम-PDA को एकजुट कर मजबूत उम्मीदवार उतारे, तो चुनौती दी जा सकती है। नोएडा और जेवर पर संभावना कम है। नोएडा लगभग BJP का अभेद्य दुर्ग माना जाता है, जबकि जेवर में विकास का मुद्दा BJP के पक्ष में है। कुल मिलाकर, सपा के लिए गौतमबुद्ध नगर में खाता खोलना मुश्किल लेकिन असंभव नहीं है। सफलता मुख्य रूप से दादरी पर निर्भर करेगी। उम्मीदवार चयन, गुर्जर-PDA गठजोड़ की ताकत और BJP के खिलाफ स्थानीय नाराजगी निर्णायक हो सकते हैं। 2027 तक माहौल बदल सकता है, लेकिन फिलहाल BJP का पलड़ा भारी दिख रहा है।
