खास खबर: आरटीआई से मिला जवाब, पराली जलाने के 1,383 मामले, 255 एफआईआर और 18.17 लाख रुपये जुर्माना; 75% वसूली, अन्य प्रदूषण स्रोतों पर सवाल

नोएडा,(नोएडा खबर डॉट कॉम)
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने एक आरटीआई के जवाब में खुलासा किया है कि 15 सितंबर से 29 अक्टूबर 2026 के बीच पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में पराली जलाने की कुल 1,383 घटनाएं दर्ज हुईं। इनमें सबसे अधिक 1,007 मामले पंजाब में, 345 उत्तर प्रदेश में, 29 हरियाणा में और 2 दिल्ली में दर्ज किए गए। यह जवाब नोएडा के आरटीआई एक्टिविस्ट अमित गुप्ता के सवाल पर मिला है।
सीएक्यूएम के अनुसार, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश (एनसीआर) में पराली जलाने के मामलों में कुल 18.17 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया, जिसमें से 13.57 लाख रुपए यानी लगभग 75 प्रतिशत की वसूली हो चुकी है। वर्ष 2024 से 29 अक्टूबर 2026 तक पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से जुड़े कुल 8,917 एफआईआर दर्ज की गईं। इनमें वर्ष 2024 में पंजाब में 5,802 और हरियाणा में 667, वर्ष 2025 में पंजाब में 1,963 और हरियाणा में 230 तथा वर्ष 2026 में 29 अक्टूबर तक पंजाब में 246 और हरियाणा में 9 एफआईआर शामिल हैं। इस प्रकार वर्ष 2026 में अब तक कुल 255 एफआईआर दर्ज हुई हैं।
आरटीआई आवेदक अमित गुप्ता का कहना है कि ये आंकड़े पराली जलाने पर निगरानी और कार्रवाई के स्तर को दर्शाते हैं, लेकिन दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के अन्य स्रोतों के खिलाफ जवाबदेही का सवाल भी उठता है। सड़क की धूल, निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियां, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना, निर्माण सामग्री को खुला रखना और सड़कों का रखरखाव भी प्रदूषण के प्रमुख कारण हैं। प्रदूषण के अन्य उल्लंघनों से संबंधित आरटीआई प्रश्नों के जवाब में सीएक्यूएम ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन के कुछ हिस्सों को हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्थानांतरित कर दिया है। इनके जवाब अभी प्राप्त होने बाकी हैं।
गुप्ता का तर्क है कि पर्यावरणीय जवाबदेही चयनात्मक नहीं होनी चाहिए और किसानों के साथ-साथ अन्य प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ भी समान गंभीरता से कार्रवाई होनी चाहिए।

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